Thursday, May 7, 2026
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बस नहीं चल वर्ना ममता बनर्जी शैलजाकांत जी को कच्चा ही चबा जाती

 मथुरा। बात सन 2001 की है। ममता बनर्जी उस समय रेल मंत्री थीं तथा शैलजाकांत जी उत्तर प्रदेश पुलिस में आई.जी. मेरठ थे। ममता बनर्जी के रेल मंत्री रहते यदा कदा पूरी रेलगाड़ी में हजारों गायें भरकर कलकत्ता भिजवाती थीं, कटान के लिए। इन गायों को पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश तथा दिल्ली आदि से एकत्र करके भेजा जाता था।
 शैलजाकांत जी को यह बात पता चली तो उन्होंने एस.एस.पी. गाजियाबाद को निर्देशित किया कि इसे रोकें। इस पर एस.एस.पी. गाजियाबाद ने प्रयास भी किए किंतु उन्हें सफलता नहीं मिली। इसके बाद एस.एस.पी. गाजियाबाद ने अपने हाथ खड़े कर दिए तथा शैलजाकांत जी से कहा कि सर मैं इसे रोक नहीं पा रहा हूं। शैलजाकांत जी की भृकुटी तन गई और उन्होंने आदेश दिए कि अबकी बार जैसे ही गायों से भरी रेलगाड़ी गाजियाबाद से गुजरे पूरी रेलगाड़ी को सीज कर दो।
 फिर क्या था अगली बार जैसे ही रेल गाजियाबाद की सीमा में घुसी उसे रोक लिया गया तथा लगभग दो हजार गायों को मुक्त कराकर आसपास के गांव में लोगों को बांट दिया और रेलगाड़ी जब्त करके एक किनारे खड़ी करवा दी गई। जब यह बात रेल मंत्री ममता बनर्जी को पता चली तो वे आग बबूला हो गई.ममता बनर्जी ने उस समय के प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई तथा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह से शिकायत की कि शैलजाकांत ने अवैध काम किया है ट्रेन को सीज करके। इसके अलावा संसद में भी खूब चीख पुकार मचाई किंतु शैलजाकांत जी के खिलाफ हुआ कुछ नहीं उल्टे सबसे बड़ा फायदा यह हुआ कि इस घटना के बाद रेल से गायों का जाना बंद हो गया।
 इस बारे में जब शैलजाकांत जी से बात की तथा पूंछा कि आपने किस आधार पर इतना बड़ा कदम उठाया? उन्होंने बताया कि पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के तहत। उन्होंने बताया कि इन गायों को रेल के डिब्बो में ठुसम ठुस्स भरकर ले जाया जाता था। न उनके खाने को चारा न पीने को पानीं तथा कुछ गायें तो उतारते समय ही मर गईं। उन्होंने बताया कि इस पूरे प्रकरण में मेनका गांधी उनके साथ खड़ी रहीं तथा उनका भरपूर सहयोग मिला।
उल्लेखनींय है कि ब्रह्म ऋषि देवराहा बाबा महाराज के परमप्रिय शिष्य और महान गौभक्त शैलजाकांत जी की ही इतनी हिम्मत थी कि इतनीं बड़ी कार्यवाही की पूरी की पूरी रेल को सीज करा डाला यह उनके आत्म बल को प्रदर्शित करता है। 

लाखों गायों की हत्यारिन का आज जो हश्र हुआ है उससे उन गऊ माताओं की आत्मा को भी शांति मिली होगी जिनकी हत्या कराने में उनकी भूमिका रही। यह तो अभी शुरुआत है देखो आगे आगे होता है क्या?

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