Friday, July 10, 2026
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संस्कृति स्कूल आफ टूरिज्म एंड हास्पिटैलिटी के विद्यार्थी प्रशिक्षण के दौरान मेहमानों का स्वागत करते हुए (फाइल फोटो)। संस्कृति विविः पर्यटन और हॉस्पिटैलिटी कोर्स कर बनाएं भविष्य उज्ज्वल


मथुरा । बर्तमान दशक को भारत में हॉस्पिटैलिटी उद्योग का स्वर्णिम युग कहा जा रहा है। विशेषज्ञ बताते हैं कि वर्ष 2030 तक लाखों नए रोजगार की संभावना है। संस्कृति विश्वविद्यालय के स्कूल आफ टूरिज्म और हास्पिटैलिटी से पढ़कर विद्यार्थियों ने देश और दुनिया की प्रसिद्ध श्रंखला के होटलों, रिसोर्टों में उच्च वेतनमान पर नौकरी पाई है।
संस्कृति स्कूल आफ टूरिज्म एंड हास्पिटैलिटी के डीन डा. रतीश शर्मा बताते हैं कि इसी बढ़ती मांग को देखते हुए संस्कृति विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ टूरिज्म एंड हॉस्पिटैलिटी में विद्यार्थियों को उद्योगोन्मुख शिक्षा, आधुनिक प्रयोगशालाओं में व्यावहारिक प्रशिक्षण, इंटर्नशिप, व्यक्तित्व विकास एवं प्लेसमेंट सहायता प्रदान की जाती है। आज संस्कृति विश्वविद्यालय के विद्यार्थी और पूर्व छात्र संयुक्त राज्य अमेरिका, फ्रांस, मालदीव, क़तर, कुवैत, दुबई तथा तुर्की सहित अनेक देशों में प्रतिष्ठित होटलों एवं रिसॉर्ट्स में कार्यरत हैं। इसके अतिरिक्त विश्वविद्यालय के छात्र राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस, अंतरराष्ट्रीय क्रूज़ कंपनियों, भारतीय रेलवे, सीमा सुरक्षा बल, सरकारी एवं निजी अस्पतालों, कॉर्पोरेट संस्थानों तथा भारत के अग्रणी होटल समूहों में अपनी सेवाएँ दे रहे हैं।
डा. शर्मा के अनुसार तेजी से बढ़ते इस उद्योग को देखते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाला दशक प्रशिक्षित हॉस्पिटैलिटी प्रोफेशनल्स का दशक होगा। ऐसे समय में बी.एससी. (हॉस्पिटैलिटी एंड होटल मैनेजमेंट) केवल एक डिग्री नहीं, बल्कि भारत और विश्व स्तर पर सम्मानजनक, बहुआयामी और वैश्विक करियर का प्रवेश द्वार बन चुकी है। भारत का पर्यटन एवं हॉस्पिटैलिटी उद्योग तेजी से विस्तार के दौर में है। विशेषज्ञों का मानना है कि वर्ष 2030 तक यह देश के सबसे बड़े रोजगार सृजक क्षेत्रों में शामिल होगा। बेहतर सड़क, रेल और हवाई संपर्क, बढ़ता घरेलू पर्यटन, धार्मिक एवं मेडिकल टूरिज्म, वैश्विक होटल ब्रांडों का निवेश तथा बढ़ती आय के कारण प्रशिक्षित हॉस्पिटैलिटी प्रोफेशनल्स की मांग लगातार बढ़ रही है।
उद्योग रिपोर्टों के अनुसार भारत में वर्ष 2030 तक 1,00,000 (एक लाख) से अधिक नए ब्रांडेड होटल रूम विकसित होने की संभावना है। इसके साथ ही देश में सैकड़ों नए होटल, रिसॉर्ट और आतिथ्य परियोजनाएँ शुरू होंगी, जिनके संचालन के लिए बड़ी संख्या में प्रशिक्षित मानव संसाधन की आवश्यकता होगी। विश्व यात्रा एवं पर्यटन परिषद के अनुसार, वर्ष 2034 तक भारत का ट्रैवल एवं टूरिज्म क्षेत्र लगभग 6.3 करोड़ लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार प्रदान कर सकता है। यह भारत के सबसे बड़े रोजगार क्षेत्रों में से एक होगा।
विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले वर्षों में हॉस्पिटैलिटी शिक्षा प्राप्त युवाओं के लिए अवसर केवल होटलों तक सीमित नहीं रहेंगे। रोजगार के अवसर राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस, एयरपोर्ट ग्राउंड सर्विस एवं लाउंज मैनेजमेंट, अंतरराष्ट्रीय क्रूज़ लाइन, पाँच सितारा होटल एवं वैश्विक होटल चेन, भारतीय रेलवे एवं रेलवे कैटरिंग सेवाएँ, सेना, नौसेना, वायुसेना तथा BSF सहित रक्षा प्रतिष्ठानों की मेस एवं हॉस्पिटैलिटी सेवाएँ, सरकारी एवं निजी अस्पताल, मेडिकल टूरिज्म और हेल्थ एंड वेलनेस सेक्टर, कॉर्पोरेट हॉस्पिटैलिटी एवं फैसिलिटी मैनेजमेंट, इवेंट, कन्वेंशन एवं वेडिंग मैनेजमेंट, ट्रैवल, टूरिज्म एवं डेस्टिनेशन मैनेजमेंट, उद्यमिता—होटल, रेस्टोरेंट, कैफ़े एवं कैटरिंग व्यवसाय के क्षेत्र में भी इनको अवसर मिलेंगे और मिल रहे हैं।

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