
मथुरा। जीएलए विश्वविद्यालय, मथुरा के इंस्टीट्यूट ऑफ लीगल स्टडीज एंड रिसर्च संस्थान की लीगल एड कमेटी ने जिला परिवीक्षा अधिकारी विकास चंद्र के नेतृत्व में किशोर संप्रेक्षण गृह का शैक्षणिक भ्रमण किया। इस दौरान जेल अधीक्षक प्रभाकर सिंह का विशेष सहयोग प्राप्त हुआ।भ्रमण के दौरान संस्थान के छात्र-छात्राओं ने बालकों से जुड़ी व्यवस्थाओं, उनकी देखरेख, संरक्षण एवं पुनर्वास की प्रक्रिया को निकट से देखा और समझा। विद्यार्थियों ने किशोर संप्रेक्षण गृह में संचालित व्यवस्थाओं की कार्यप्रणाली की जानकारी प्राप्त की।इसके पश्चात समिति ने राजकीय बाल गृह, मथुरा की कार्यप्रणाली का भी अवलोकन किया। यहां अधीक्षक राजेश कुमार वर्मा के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों को बालकों की देखभाल, शिक्षा एवं पुनर्वास संबंधी व्यवस्थाओं की व्यावहारिक जानकारी दी गई।जीएलए विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ लीगल स्टडीज एंड रिसर्च संस्थान के डीन प्रो. सोमेश धमीजा ने कहा कि इस प्रकार के शैक्षणिक भ्रमण विधि के विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान से आगे बढ़कर न्याय व्यवस्था की वास्तविक कार्यप्रणाली समझने का अवसर प्रदान करते हैं। किशोर न्याय प्रणाली, बाल संरक्षण और पुनर्वास की प्रक्रियाओं का प्रत्यक्ष अनुभव विद्यार्थियों की विधिक समझ को मजबूत करता है। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयास विद्यार्थियों में सामाजिक जिम्मेदारी, संवेदनशीलता और व्यावहारिक कानूनी ज्ञान विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।उन्होंने आगे कहा कि विधि के विद्यार्थियों के लिए न्यायिक एवं सामाजिक संस्थानों की कार्यप्रणाली को समझना आवश्यक है, क्योंकि इससे उन्हें कानून के व्यावहारिक पक्ष और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का बोध होता है। ऐसे भ्रमण विद्यार्थियों को संवेदनशील मुद्दों को मानवीय दृष्टिकोण से समझने तथा भविष्य में एक जिम्मेदार विधि विशेषज्ञ बनने के लिए प्रेरित करते हैं।इस शैक्षणिक भ्रमण से विद्यार्थियों को क्लीनिकल लीगल एजुकेशन के अंतर्गत किशोर न्याय प्रणाली को प्रत्यक्ष रूप से समझने का अवसर मिला। साथ ही, बाल संरक्षण, देखरेख और पुनर्वास से जुड़ी व्यवस्थाओं का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हुआ, जो उनके विधिक ज्ञान को मजबूत करने में सहायक होगा।

