Friday, January 2, 2026
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जीएलए विधि संस्थान के छात्रों ने लोक अदालत पहुंचकर जानी कानूनी प्रक्रिया

मथुरा : जीएलए विश्वविद्यालय, मथुरा के इंस्टीट्यूट ऑफ़ लीगल स्टडीज एंड रिसर्च संस्थान की कानूनी सहायता समिति समन्वयक डा. आईके सिंह के दिशा-निर्देशन में विद्यार्थियों ने बीते दिन जिला न्यायालय, मथुरा में लोक अदालत का दौरा सफलतापूर्वक पूरा किया।

लोक अदालत में प्रथम और द्वितीय वर्ष के विद्यार्थियों ने कानून और कानूनी कामकाज एवं अदालत की कार्य प्रक्रिया के बारे में बारीकी से जानकारी जुटाई। सर्वप्रथम विद्यार्थियों को लोक अदालत और इसके मुख्य उद्देश्य अर्थात् न्यायालय के बाहर समझौतों के माध्यम से न्याय के शीघ्र निपटान के बारे में एक विचार दिया है। उसके बाद अदालत परिसर और विभिन्न स्थानों का अवलोकन किया, जिससे विद्यार्थी जनता की समस्याओं को हल करने में मदद कर सकें। इसके बाद 3-4 विद्यार्थियों के समूह बनाए और उन्हें लोक अदालतों की बैठकों का निरीक्षण करने के लिए अदालत में चारों तरफ निगाह बनाए रखने और लोगों केे मार्गदर्शन करने का निर्देश दिया। इस तरीके विद्यार्थियों को यह जानकारी प्राप्त हुई कि न्याय के लिए अदालत में किस सीढ़ी पर पहुंचना आवश्यक है।

इस प्रक्रिया के दौरान विद्यार्थियों ने बहुत से लोगों के साथ बातचीत की और किताबों में उल्लेखित समस्याओं के अलावा जमीनी स्तर की समस्याओं को जाना। साथ ही विद्यार्थियों को गहनता से कानून के बारे में जानकारी देने के लिए न्यायायिक मजिस्ट्रेट निशांत चैहान और एडवोकेट नीरज राठौर से जीएलए विधि संस्थान के असिस्टेंट प्रोफेसर आईके सिंह ने अनुरोध किया। अनुरोध पर विद्यार्थियों को न्यायायिक मजिस्ट्रेट ने कानूनी पेशे और अदालत के महत्व के बारे में बताया।

लोक अदालत का दौरा कर लौटे विद्यार्थियों ने संस्थान के डीन प्रो. सोमेश धमीजा से मुलाकात की। इस दौरान प्रो. धमीजा ने बताया कि विश्वविद्यालय का विधि संस्थान प्रत्येक विद्यार्थी को कानूनी विशेषज्ञ के तौर पर देखना चाहता है। यही कारण है कि विद्यार्थियों को समय-समय पर अदालतों का भ्रमण एवं बेहतर कानून की जानकारी हेतु न्यायालयों के विशेषज्ञों के माध्यम से जानकारियां प्रदान की जाती हैं।

बरसाना स्थित श्री राधारानी मन्दिर का मंडलायुक्त श्रीमती रितु माहेश्वरी जी ने जिला प्रशासन संग किया निरीक्षण। रंगोत्सव पर श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ सुविधा और सुरक्षा व्यवस्था के पुख़्ता इंतजाम करने के संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिये

मथुरा 12 मार्च। मंडलायुक्त श्रीमती रितु माहेश्वरी जी ने बरसाना स्थित श्री राधा रानी मंदिर का जिला प्रशासन संग निरीक्षण किया। सर्वप्रथम मंडलायुक्त महोदय ने मंदिर प्रांगण में श्री राधा कृष्ण जी के दर्शन किए। उसके उपरांत उन्होंने मंदिर की सभी व्यवस्थाओं का ज़ायजा लिया। लट्ठमार होली के दौरान मंंदिर में श्रद्धालुओं के प्रवेश व निकासी द्वार के साथ भीड़ को नियंत्रित करने के इंतजाम देखे। रंगीली चौक और कटारा चौक का निरीक्षण किया। यहाँ की दीवारों को होली की थीम पर रंगने, समुचित सफाई करवाने और चौक को सजाने के संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिये। कटारा चौक से लेकर बरसाना मँदिर के विशाल द्वार तक लट्ठमार होली का आनंद उठाने हेतु ज्यादा से ज्यादा संख्या में श्रद्धालुओं के बैठने की व्यवस्था भी तैयार करने के निर्देश दिये।

इसके पश्चात मण्डलायुक्त श्रीमती रितु माहेश्वरी जी की अध्यक्षता में बरसाना स्थित लोक निर्माण विभाग के निरीक्षण भवन सभागार में जिलाधिकारी शैलेन्द्र कुमार सिंह, एसएसपी शैलेश कुमार पाण्डेय, उपाध्यक्ष/सीईओ एसबी सिंह सहित विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ होली/रंगोत्सव-2024 की व्यवस्थाओं के संबंध में समीक्षा बैठक संपन्न हुई। बरसाना में दिनांक 17 मार्च 2024 को लडडूमार होली, दिनांक 18 मार्च 2024 को विश्व प्रसिद्ध लट्ठामार होली तथा नन्दगांव में दिनांक 19 मार्च 2024 को लट्ठामार होली खेली जायेगी। बैठक में रंगोत्सव के संबंध में एसएसपी ने अवगत कराया कि बरसाना को चार मुख्य सड़क मार्ग जोड़ते हैं, जिनमें गोवर्धन, छाता, कोसीकलां तथा राजस्थान से सड़क मार्ग आते हैं। विश्व प्रसिद्ध लट्ठामार होली में इन चार मार्गों से श्रद्धालु बरसाना श्री राधारानी जी के दर्शन करने आते हैं। इन मार्गों पर 78 स्थानों बैरियर लगाये गये हैं तथा 45 पार्किंग बनाई गई हैं। पार्किंगों को प्रथम आओ प्रथम पाओ के आधार पर भरा जायेगा। बरसाना में वनवे प्राणली को लागू करते हुए समस्त यातायात को संचालित किया जायेगा तथा बरसाना को 5 जोन और 12 सेक्टरों में बांटा गया है।

मण्डलायुक्त ने निर्देश दिये कि वनवे सिस्टम का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित किया जाये, जगह जगह पर साइन बोर्ड लगाये जायें तथा श्रद्धालुओं की सुविधा हेतु पहले से ही निर्धारित रूटों का प्रचार प्रसार करते हुए एकल व्यवस्था को लागू किया जाये। मण्डलायुक्त ने मन्दिर में प्रवेश एवं निकास की नई / परिवर्तित व्यवस्था की पूरी जानकारी ली तथा निर्देश दिये कि उक्त व्यवस्था हेतु पर्याप्त मात्रा में पुलिस बल एवं मजिस्ट्रेटों की तैनाती की जाये।मण्डलायुक्त ने सीसीटीवी कैमरे, कन्ट्रोल रूम, खोया पाया केन्द्र तथा ब्रजेश्वरी इंटर कॉलेज में स्थापित मास्टर कन्ट्रोल रूम में 24 घंटे डूयटी लगाने के निर्देश दिये तथा पूरे मेला क्षेत्र में निरंतर निगरानी रखने के निर्देश दिये।

मण्डलायुक्त ने लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता पर नाराजगी जताते हुए सख्त निर्देश दिये कि बरसाना को जोड़ने वाले सभी मार्गों को शीघ्र गढ्ढामुक्त किया जाये, पैंचिंग का कार्य किया जाये, पुलियों की मरम्मत करें तथा जहां जरूरत पड़े वहां नई सड़कें बनायी जायें। बरसाना को जोडते सड़क मार्ग जैसे कोसीकलां, नन्दगांव, गोवर्धन आदि पर गुणवत्ता से कार्य कराते हुए मरम्मत करने के निर्देश दिये। मण्डलायुक्त ने अधिशासी अभियंता अजय कुमार को सख्त हिदायत देते हुए अपने कार्यों में सुधार लानें के निर्देश दिये, अन्यथा की स्थिति में जिम्मेदारी तय करते हुए विभागीय कार्यवाही अमल में लाई जायेगी। मण्डलायुक्त ने यह भी निर्देश दिये कि जनपद की सभी सड़कों को गढ्ढामुक्त किया जाये, ऊंची-नीची, मोटी-पतली, चौडी-सकरी सड़कों का भेदभाव खत्म किया जाये। सभी सड़कों में गुणवत्तायुक्त कार्य सुनिश्चित किया जाये।

लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता ने बताया कि विभाग द्वारा 57 पार्किंग बनाई जा रही हैं, जिसमें 45 बरसाना तथा 12 नन्दगांव में बनाई जा रही हैं। 107 बैरियर जिसमें बरसाना में 78 तथा नन्दगांव में 29 बैरियर बनाये जा रहे हैं। बरसाना के 04 कुण्डों तथा नन्दगांव के 01 कुण्ड में बैरिकेटिंग की जा रही है। बरसाना में 04 तथा नन्दगांव में 02 वॉच टॉवर बनाये जा रहे हैं। मण्डलायुक्त ने सभी कार्यों को 15 मार्च तक पूर्ण करने के निर्देश दिये।

ईओ बरसाना को निर्देश दिये कि श्रद्धालुओं की सुविधाओं का विशेष ध्यान दिया जाये। श्रद्धालुओं हेतु मोबाइल टॉयलेट, पानी के टैंकर, पार्किंग, खोया पाया केन्द्र आदि की पर्याप्त व्यवस्था की जाये। अवैध होर्डिंग, बैनर, पोस्टर आदि हटाये जायें। निराश्रित गोवंशों को गौशालाओं में पहुँचायें। मन्दिर के आस पास गंदगी मिलने पर सफाईकर्मियों की टीम तैनात कर उत्तम साफ सफाई व्यवस्था सुनिश्चित की जाये। किसी भी प्रकार की प्लास्टिक, पॉलीथिन या बोतल आदि का पूर्णतः प्रतिबन्ध किया जाये। मन्दिर के आवागमन मार्गों पर दुकानों द्वारा किये गये अतिक्रमण को हटाया जाये। प्रमुख मार्गों, चौराहों, रंगीली चौक, कटारा चौक आदि स्थानों पर रंगोत्सव के संबंध में बॉल पेन्टिंग कराई जाये। सफाई कर्मियों का रोस्टर बनाकर डयूटी लगाई जाये। सड़कों के किनारे तथा बरसाना में प्रवेश एवं निकास स्थानों पर साफ सफाई सुनिश्चित करें। ईओ ने बताया कि नगर पंचायत में 103 सफाई कर्मी हैं, जिस पर मण्डलायुक्त ने निर्देश दिये कि आगामी वर्षों में सफाई कर्मी बढ़ाये जायें।

मण्डलायुक्त ने मथुरा वृन्दावन विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष एवं ईओ बरसाना को निर्देश दिये कि बरसाना में वॉटर एटीएम लगाये जायें, श्रद्धालुओं की सुविधा हेतु शेड /छांव की व्यवस्था की जाये, बैठने हेतु नियमित दूरी पर बेंच लगाये जायें, नये मानकोंनुसार सार्वजनिक शौचालय बनाये जाये, जगह जगह डस्टबिन / कूड़ादान लगाये जायें।

मण्डलायुक्त ने जिलाधिकारी को निर्देश दिये कि जनपद के समस्त एसडीएम तथ बीडीओ के माध्यम से पूरे जनपद में विशेष सफाई अभियान चलायें तथा प्रमुख मार्गों को कूड़ा, उपले, मलवे आदि से निजात दिलाया जाये। एसडीएम एवं बीडीओ अपने-अपने क्षेत्रों में सड़क एवं नालियों की मरम्मत सुनिश्चित करें। जिला पंचायतराज विभाग के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में सफाई अभियान चलायें। मण्डलायुक्त ने नगर पालिका कोसीकलां की बदहाल सफाई व्यवस्था पर नाराजगी जाहिर की तथा जिलाधिकारी को निर्देश दिये कि उक्त को गंभीरता से लेते हुए संबंधित ईओ को सफाई व्यवस्था हेतु निर्देशित किया जाये अन्यथा की स्थिति में ईओ कोसीकलां के खिलाफ़ जिम्मेदारी तय की जाए।

मण्डलायुक्त ने विद्युत विभाग की समीक्षा करते हुए निर्देश दिये कि समस्त जर्जर विद्युत पोलों को बदला जाये, पोलों की प्लास्टिक रैपिंग की जाये, जहां जहां पर विद्युत विभाग द्वारा कार्य प्रगति पर हैं, वहां पर पुनर्स्थापित कराना सुनिश्चित करें तथा बरसाना में 24 घंटे निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की जाये। विद्युत विभाग के अधिकारी ने बताया कि बरसाना में 450 तथा नन्दगांव में 250 पोलों की रैपिंग की जा रही है, निर्बाध विद्युत आपूर्ति हेतु पेड़ों छटाई की गई है, ट्रान्सफार्मरों की मरम्मत करा ली गई है। मण्डलायुक्त ने अग्निशमन के सीएफओ को निर्देश दिये कि सभी महत्वपूर्ण स्थानों पर फायर विभाग के कर्मचारियों की फायर उपकरणों के साथ डयूटी लगायें। गोवर्धन एवं कोसीकलां के फायर स्टेशनों को एक्टिव रखें। एआरएम रोड़वेज ने जानकारी दी कि पिछले वर्ष 120 बसें संचालित की गई थी, जिसको बढ़ाकर इस साल 150 बसें संचालित की जा रही हैं। मण्डलायुक्त ने एआरएम रोड़वेज को निर्देश दिये कि कोई भी सवारी बस की छत पर नहीं बैठनी चाहिए तथा श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

गोवर्धन नहर में सिल्ट भरे होने और समुचित सफाई न होने पर सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता पर नाराजगी जाहिर की। सख्त निर्देश दिये कि त्यौहार से पहले ही गोवर्धन नहर की सही से सफाई करें। अगर नहर की समुचित सफाई नहीं होती है तो उनके खिलाफ जिम्मेदारी तय की जाएगी। वहीं मुख्य चिकित्साधिकारी ने जानकारी दी कि रंगोत्सव को ध्यान में रखते हुए 12 टेम्परेरी मिनी अस्तपताल बनाये जा रहे 13 एम्बुलेंस बरसाना तथा 04 एम्बुलेंस नन्दगांव में लगाई जायेंगी। सीएचसी बरसाना में सभी प्रकार की मेडीकल व्यवस्थायें सुनिश्चित कर ली गई हैं। मण्डलायुक्त ने निर्देश दिये कि समस्त एम्बुलेंस में वाहन चालक निरंतर उपस्थित रहे तथा मानकानुसार सभी मेडीकल सुविधाओं से सुसज्जित रहे। सूचना विभाग ने अवगत कराया है कि प्रचार प्रसार हेतु मुख्यालय को 200 होर्डिंग, 15 एलईडी वैन, 15 डिस्प्ले बोर्ड तथा 10 सांस्कृतिक दलों को रंगोत्सव को भव्य बनाने हेतु जिलाधिकारी के माध्यम से पत्राचार किया गया है। मण्डलायुक्त ने निर्देश दिये विभाग से समन्वय स्थापित करते हुए प्रचार प्रसार सामग्री को शीघ्र मंगाया जाये।

जिलाधिकारी एवं एसएसपी को निर्देश दिये कि मन्दिर प्रबंधक से वार्ता कर लाइव टेलीकास्ट की व्यवस्था करने का प्रयास किया जाये। उपाध्यक्ष एमवीडीए को निर्देश दिये कि रंगीली चौक व कटारा चौक पर खेली जा रही होली की लाइव टेलीकास्ट कराना सुनिश्चित करें। उत्तर प्रदेश ब्रजतीर्थ विकास परिषद को निर्देश दिये कि बरसाना में विश्व प्रसिद्ध लट्ठामार होली के संबंध में की जाने वाली साज सज्जा को ससमय पूर्ण करें। प्रवेश द्वार, होर्डिंग, बैनर, सेल्फी पॉइंट, सांस्कृतिक दल हेतु स्टेज आदि की व्यवस्था समयबद्धता के साथ करें।

सीईओ एसबी सिंह ने जानकारी दी कि बरसाना के राधा बिहारी इंटर कॉलेज में दो दिवसीय मुख्य कार्यक्रम कराये जायेंगे, बरसाना में 05 प्रवेश द्वार बनाये जायेंग, प्रियाकुण्ड से कटारा चौक तथा रंगीली गली एवं रंगीली चौक को सजाया जायेगा, प्रियाकुण्ड पर फसाड लाइटिंग की जायेगी, सांस्कृतिक कार्यकम हेतु 07 छोटे स्टेज बनाये जायेंगे तथा 06 सेल्फी पॉइंट स्थापित किये जायेंगे। मण्डलायुक्त ने जिलाधिकारी को निर्देश दिये कि आगामी सालों हेतु कार्ययोजना बनाते हुए रंगीली चौक तथा कटारा चौक को विकसित किया जाये तथा बरसाना के अलग अलग मुख्य स्थानों को चिन्हित कर विकसित किया जाये। मण्डलायुक्त ने निर्देश दिये कि समस्त वीआईपी के साथ नोडल अधिकारी लगाये जायें तथा वीआईपी के लिए निर्धारित प्रवेश एवं निकास द्वार पर समस्त व्यवस्था सुनिश्चित की जाये। पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिये कि महिलाओं की सुरक्षा हेतु पर्याप्त मात्रा में महिला पुलिस बल वर्दी तथा सादे में तैनात की जाये। मेला को सकुशल संपन्न कराने हेतु यह सुनिश्चित किया जाये कि श्रद्धालुओं के साथ किसी प्रकार की अभ्रदता न हो। जिसके लिए पुलिस एवं मजिस्ट्रेटों की ड्यूटी लगाई जाये।

बैठक में जिलाधिकारी शैलेन्द्र कुमार सिंह, एसएसपी शैलेश कुमार पाण्डेय, डीएफओ रजनीकांत मिततल, एमवीडीए वीसी एसबी सिंह, अपर जिलाधिकारी प्रशासन विजय शंकर दूबे, एसपी ग्रामीण त्रिगुण विसेन, एमवीडीए सचिव अरविन्द कुमार द्विवेदी, ओएसडी प्रसून्न द्विवेदी, उप जिलाधिकारी गोवर्धन नीलम श्रीवास्तव, सीओ गोवर्धन आलोक कुमार, सीएमओ डॉ अजय कुमार वर्मा, अधिशासी अभियंता लोक निर्माण विभाग अजय कुमार सहित अन्य संबंधित विभागों के अधिकारीगण उपस्थित रहे।

लाडली जी मंदिर रिसीवर कमेटी ने ग्रहण किया चार्ज

रिपोर्ट राघव शर्मा

बरसाना। विश्व प्रसिद्ध मंदिर ठाकुर श्री लाडली जी महाराज की नवनियुक्त रिसीवर कमेटी ने पूर्व रिसीवर संजय गोस्वामी से विधिवत चार्ज ग्रहण कर अपना कार्य संचालन शुरू कर दिया है।

सिविल जज जूनियर डिवीजन गौरव सिंह द्वारा बरसाना के विश्व प्रसिद्ध लाडली जी मंदिर के संपूर्ण संचालन के लिए गठित की गई रिसीवर कमेटी ने सोमवार को पूर्व रिसीवर संजय गोस्वामी से विधिवत रूप से चार्ज ग्रहण किया। इस दौरान पूर्व रिसीवर संजय गोस्वामी ने समस्त दस्तावेज, मंदिर की रसीद बुक, बैंक रिकॉर्ड, पासबुक, चेक बुक, पैन कार्ड, लॉकर रिकॉर्ड व अन्य समस्त वस्तुओं का प्रभार रिसीवर समिति के सदस्य सुशील गोस्वामी पत्रकार ,आशीष कृष्ण शर्मा एडवोकेट ,प्रवीण गोस्वामी, यज्ञ पुरुष गोस्वामी और मधु मंगल गोस्वामी को लिखित रूप में सौंप दिया। मंदिर की संपूर्ण व्यवस्थाओं के संचालन का चार्ज मिलने के बाद रिसीवर कमेटी के सभी सदस्यों ने सिविल जज जूनियर डिवीजन गौरव सिंह को मथुरा पहुंचकर चार्ज मिलने की जानकारी दी। इस दौरान सिविल जज गौरव सिंह ने रिसीवर कमेटी के सभी सदस्यों को निर्देश देते हुए कहा कि आगामी विश्व प्रसिद्ध लठामार होली के मेले का संचालन बेहतर ढंग से हो, किसी भी तरह की समस्या उत्पन्न ना हो। इसी के साथ मंदिर में व्याप्त कमियों और अव्यवस्थाओं को तत्काल प्रभाव से सुधारा जाए। इसके लिए उन्होंने श्रीजी मंदिर पुलिस चौकी के इंचार्ज रजत दुबे को भी निर्देश देते हुए कहा कि वह तत्काल प्रभाव से रिसीवर कमेटी का पूर्ण सहयोग करें और मंदिर परिसर में लगी अवैध दुकानों ,अवैध दान पात्रों, स्कैनर आदि को तत्काल हटवाकर व्यवस्थाओं को सुचारु करने में पुलिस विभाग का सहयोग प्रदान करे। इसी के साथ उन्होंने सह रिसीबर रास बिहारी गोस्वामी व पूर्व गठित समिति के सदस्य छैल बिहारी गोस्वामी से भी अपने अपने समय का हिसाब नव गठित कमेटी को देने को कहा है।

ऐसी करनी कर चलौ हम हंसैं जग रोऐ

विजय गुप्ता की कलम से

 मथुरा। कबीर दास जी का एक दोहा है "जब हम पैदा हुए जग हंसा हम रोऐ, ऐसी करनी कर चलौ हम हंसैं जग रोऐ"। यह दोहा चरितार्थ होते हुए एक बार मैंने मथुरा के रेलवे स्टेशन पर देखा। संत कबीर ने तो यह दोहा जग छोड़ते वक्त के लिए लिखा था किंतु इसका प्रतिबिंब एक जिलाधिकारी के जनपद छोड़ने के समय दिखाई दे रहा था।
 लगभग साढ़े तीन दशक पुरानीं बात है। मथुरा जंक्शन के प्लेटफार्म नंबर दो और तीन के मध्य का वाकया है, लोगों की भारी भीड़ लगी हुई थी। उनमें से कुछ तो फूट फूट कर ऐसे रोए जा रहे थे, जैसे इनके घर का कोई मर गया हो। उस भीड़ में स्वयं मैं भी था। भले ही मैं खुद तो नहीं रो रहा था, किंतु मेरा मन जरूर रो रहा था। रोने का कारण किसी की मौत नहीं बिछोह था, ठीक उसी प्रकार जैसे शादी के बाद लड़की की विदाई के समय घर वालों का होता है।
 यह बिछोह था मथुरा के तत्कालीन जिलाधिकारी श्री गोपबंधु पटनायक के यहां से स्थानांतरित होकर लखनऊ जाने के समय का। इस जमघट के मध्य एक लंबी लाइन भी लगी हुई थी। लाइन में लगे लोग माला हाथ में लिए अपनी बारी आने का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। माला पहनाने को आतुर लोगों की लाइन में स्वयं मैं भी था। जहां तक मुझे याद है यह लाइन घंटों चली तथा जितने लोग आगे से कम होते उतने ही पीछे से जुड़ जाते। पटनायक जी सभी के हाथ से माला पहन और फिर उन्हें गले लगाकर भावनात्मक विदाई सत्कार स्वीकार कर रहे थे।
 अब सोचने की बात है कि आखिर पटनायक जी में ऐसी कौन सी ख़ास बात थी? जो ऐसा अभूतपूर्व मेला सा लगा हुआ था रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म पर। खास बात उनकी दुर्लभता थी, वे बड़े ईमानदार तो थे ही साथ ही उनकी सौम्यता और भोलापन सभी को लुभाता था। शांत स्वभाव के मितभाषी पटनायक जी के चेहरे पर छोटे बच्चों जैसा सलौनापन बहुत प्यारा और मनमोहक लगता था। उड़िया लहजे में हिंदी बोलना तो बड़ा लुभावना होता यानी सौने में सुगंध का काम करता था। कहते हैं कि दुकानदारी नरमी की और हाकिमी गरमी की। पटनायक जी ने इस कहावत को पलटकर रख दिया यानी बड़ी नरमी के साथ सफलतापूर्वक ऐसी हाकिमी कर गए जिसे लोग आज भी याद करते हैं। मैंने उन्हें कभी किसी पर यहां तक कि अपने मातहतों तक पर भी गुस्सा होते नहीं देखा। गुस्सा तो क्या ऊंची आवाज तक उनके मुंह से कभी नहीं सुनी जो बड़े अचंभे की बात है। पटनायक जी की एक और खास बात यह थी कि वे हमेशा ना सावन सूखे और ना भादौ हरे रहते थे यानी कि ना काहू से दोस्ती और ना काहू से बैर।
 मैंने सुबह सुबह इस लेख को लिखने की शुरुआत ही की थी कि आकाशवाणी के प्राचीन काल वाले उद्घोषक तथा 117 वर्ष तक का जीवन जीने और अपनी मृत्यु के दिन और समय की पूर्व घोषणा कर देने वाले गृहस्थ के सच्चे संत बाबा शीतल दास के नाती श्रीकृष्ण शरद का कासगंज से फोन आया कि "विजय बाबू आज क्या लिख रहे हो"? मैंने उन्हें बताया कि शरद जी आज तो मैं गोपबंधु पटनायक जी के बारे में लिख रहा हूं और साथ ही मैंने इस लेखन का शुरुआती अंश भी सुनाया। पहले तो भी वाह-वाह की रटना लगाते रहे और फिर उन्होंने जो कहा उससे मैं अवाक सा रह गया।
 शरद जी ने कहा कि इनकी माधुर्यता और विलक्षणता के कारण तो मुझे जो भी पटनायक मिलता है उसे श्रद्धा और सम्मान की नजर से देखता हूं। वे यहीं नहीं रुके, आगे उन्होंने कहा कि पटनायक जी ने कटक जहां के ये रहने वाले हैं, ही नहीं पूरे उड़ीसा का नाम सिर्फ रोशन ही नहीं किया बल्कि पटनायक शब्द को भी शोभित और आनंदित किया है। उनकी ये बातें मुझे हक्का-बक्का सा कर गईं। मुझे लगा कि उनकी बातों में कुछ ज्यादा ही अतिशयोक्ति है किंतु मेरी अंतरात्मा कहने लगी कि यह सुगंधित बयार बनावटी या दिखावटी नहीं यह तो सुसंस्कृत परिवार से मिले संस्कारों की देन है जो चहुंओर अपनी महक बिखेर रही है। अरे मूर्ख इसे अतिशयोक्ति समझने की गलती मत कर और अंतरात्मा की आवाज मेरी सोच पर भारी पड़ गई तथा मैंने यू-टर्न ले लिया। शरद जी से वार्तालाप के दौरान एक बार तो मैं भावुक हो उठा और क्षण भर के लिए मेरी आवाज बंद हो गई। यही स्थिति कुछ-कुछ शरद जी की भी हो उठी।
 इसके बाद मेरी बातचीत मूर्धन्य विद्वान तथा उत्तर प्रदेश रत्न स्वर्गीय वासुदेव कृष्ण चतुर्वेदी के सुपुत्र श्री हरदेव कृष्ण चतुर्वेदी से हुईं। जब उन्हें यह पता चला कि आज में गोप बंधु पटनायक जी के बारे में लिख रहा हूं तो वे बड़े आनंदित हो उठे तथा चतुर्वेदियों वाले बोलचाल के अंदाज में बोले कि "यै तौ दूसरे शैलजा कान्त हैं, सचमुच में बृज के विरक्त संत गुप्ता जी इनपै तौ जरूर लिखौ, मौय बड़ी खुशी होयगी"। इसके बाद उन्होंने पटनायक जी के गुणगान करने शुरू कर दिए।
 हरदेव चतुर्वेदी लगातार तीन चार दशक तक सभी जिलाधिकारियों के निजी सहायक रहे तथा इनकी विद्वता के कारण रिटायरमेंट के बाद भी कई जिलाधिकारी इन्हें अपने साथ जोड़े रहे व मार्गदर्शन लेते रहे किंतु पारिवारिक दुखों मुख्यतः पुत्र वियोग के कारण आगे चलकर हरदेव जी ने जिलाधिकारी कार्यालय से अपने आपको को अलग कर लिया। कहने का मतलब है कि इन्हें दर्जनों जिलाधिकारियों की नस नस की जानकारी है कि कौन विरक्त संत है और कौन आसक्त चंट है। 
 अब मैं पटनायक जी के बारे में अपने निजी अनुभव बताता हूं। मेरे सबसे छोटे भाई सुनील कुमार की शादी थी। स्वागत समारोह घर के निकट भिवानी वाली धर्मशाला में था। पटनायक जी उस दिन रात्रि में वृंदावन में थे। उन दिनों मोबाइल तो बहुत दूर की बात है आमतौर पर घरों में भी फोन नहीं होते थे। पटनायक जी ने वृंदावन से हमारे घर के बराबर गिरधर मोरारी गेस्ट हाउस में फोन करके कहा कि मैं यहां फंसा हुआ हूं। आने की पूरी कोशिश करूंगा यदि नहीं आ सकूं तो क्षमा कर देना।
 इसके काफी देर बाद लगभग अर्धरात्रि के समय पटनायक जी आऐ। उस समय वर-वधू खाना खाने को बैठे ही थे। मैंने पटनायक जी से कहा कि मैं अभी बुलाता हूं वर वधु को। पटनायक जी ने मुझे रोक दिया तथा कहा कि गुप्ता जी उन्हें डिस्टर्ब मत करो। मैं इंतजार कर लूंगा तथा हाथ में फूलों का गुलदस्ता लिए काफी देर तक चहल कदमी करते रहे। जब वर-वधू खाना खाकर बाहर आए तो उन्हें अपना आशीर्वाद देकर पटनायक जी विदा हुए।
 दूसरी घटना उस समय की है जब ये लखनऊ में उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन के चेयरमैन थे। हमारे घर से कुछ दूरी पर सुभाष इंटर कॉलेज के निकट एक ट्रांसफॉर्मर बिना बैरिकेडिंग का था, उससे चिपक कर कई गाय मर चुकी थीं किंतु स्थानीय अधिकारी लापरवाही कर रहे थे। मैंने पटनायक जी को फोन करके यह बात बताई उन्होंने तुरंत अधीनस्थों को आदेश दिया कि शीघ्र बैरिकेडिंग  लगवाई जाय।
 संयोग ऐसा कि दूसरे दिन फिर एक गाय मर गई। मैंने पटनायक जी से कहा कि आपके आदेश का पालन नहीं हुआ और आज फिर एक गाय और मर गई। उससे थोड़ी देर बाद बिजली विभाग के आला अधिकारियों की गाड़ियों की लाइन लग गई तथा आनन-फानन में यानी शाम तक बैरिकेडिंग लगा दी गई इस दौरान पटनायक जी बराबर पूंछते रहे कि अभी बैरिकेडिंग लगनी शुरू हुई या नहीं। इस घटना से सिद्ध होता है कि यह सच्चे गोपबंधु हैं। यह लिखते समय मुझे वह दृश्य याद आ रहा है जब गोपाष्टमी मेले में इन्होंने धोती कुर्ता पहनकर शिरकत की थी।
 तीसरी एक और बात जो सबसे अधिक महत्वपूर्ण है, भी बताता हूं। हमारे घर पर बिजली की जो सप्लाई आती है उसे गोकुल क्षेत्र से आने वाली सप्लाई के चालू होने के बाद पुरानीं केंट वाली सप्लाई से विच्छेदित कर दिया गया। फलस्वरूप आंधी तूफान आदि के कारण गोकुल वाली सप्लाई जो जंगली इलाके की वजह से बार-बार बाधित होती थी। एक बार तो बड़े फॉल्ट के कारण लगातार दो दिन तक बंद रही। मैंने पटनायक जी से कहा कि मुझे नलकूप चलाने में बहुत दिक्कत होती है जबकि शहर की बड़ी आबादी हमारे नलकूप के पानीं पर ही निर्भर है। लगातार लंबे समय तक जनरेटरों का चलाना भी कठिन हो रहा है। इसके अलावा गोकुल वाली सप्लाई के बाधित होने से शहर का बहुत बड़ा भाग भी विद्युत विहीन हो जाता है।
 पटनायक जी जो उस समय रिटायर हो चुके थे, ने इस बात को गंभीरता से लिया तथा पावर कॉरपोरेशन के तत्तकालीन चेयरमैन संजय अग्रवाल से कहा भी किंतु सरकारी कामकाज वाली स्थिति के चलते मामला लंबित होता गया। इसके बाद पटनायक जी स्वयं पावर कारपोरेशन के कार्यालय गए तथा चेयरमैन संजय अग्रवाल को सारी वस्तु स्थिति विस्तार से समझाई। जिसका परिणाम यह हुआ कि लगभग एक करोड़ की लागत से एक स्पेशल लाइन कैंट बिजली घर से लेकर शमशान घाट बिजलीघर तक डाली गई। आज इस लाइन की वजह से मथुरा शहर का बहुत बड़ा हिस्सा भी लाभान्वित हो रहा है।
 एक और घटना बताए बगैर नहीं रहा जा रहा। करीब पच्चीस तीस वर्ष पुरानीं बात है। उड़ीसा के जिला बालासोर के भद्रक कस्बे में बहुत बड़ा हिंदू मुस्लिम दंगा हो गया। हमारी बहन बहनोई व उनका परिवार मुस्लिम आक्रमण कारियों से घिर चुका था। चारों ओर आगजनी व उपद्रव मचा हुआ था। बड़ी मुश्किल से उनकी जान तो बची किंतु दुकान गोदाम आदि सबकुछ जलकर राख हो गया। मैंने तुरंत पटनायक जी को फोन किया और पटनायक जी ने भी उसी समय जिला बालासोर के कलेक्टर से बात की तथा कहा कि जितनी भी हो सके उनकी मदद करें। उस दौरान पटनायक जी राज्यपाल के प्रमुख सचिव थे। इस घटना के बारे में मैंने रविकांत गर्ग जी को भी बताया उन्होंने अटल जी को उपद्रवियों द्वारा किए गए अत्याचारों के बारे में अवगत कराया। इसके बाद अटल जी खुद भद्रक गए व पीड़ितों के प्रति गहरी सहानुभूति व्यक्त की।
 अब फिर एक और गजब की बात बताऊं शायद पांच सात वर्ष पुरानीं बात है। उन दिनों पटनायक जी जल निगम के चेयरमैन थे। हमारे घर के पास जल निगम ने बहुत बड़ी खुदाई कर दी तथा अपना काम पूरा करने के बाद सड़क की मरम्मत नहीं की और वाहन दुर्घटनाग्रस्त होने लगे। कई माह बीतने पर भी यथा स्थिति बनी रही। फिर एक दिन मैंने शाम को 6-7 बजे के करीब पटनायक जी को फोन करके सब कुछ बताया। थोड़ी देर में जल निगम के एक्सईएन का फोन आया और उसके कुछ देर बाद जेसीबी मशीन व अन्य मेटेरियल भी पहुंच गए। रात काम चला सुबह सूर्योदय से पहले ही पूरी सड़क टनाटन हो गई अब मैं और क्या क्या लिखूं पटनायक जी की पटकथा।
 लिखने को तो और बहुत है किंतु लेख लंबा होता जा रहा है इसलिए यहीं विराम देता हूं। पटनायक जी ने यहां से जाने के बाद भी बृज वासियों को अपने हृदय में समाहित कर रखा है तथा कोई भी व्यक्ति अपने दुख को लेकर इनसे मदद की गुहार करता है तो ये हमेशा उसके मददगार साबित होते हैं। ऐसे एक नहीं अनेक मामले मैंने देखे और सुने हैं। धन्य है वह माता जिसने ऐसा सपूत जना, मैं उस मां को भी नमन करते हुए ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि घर-घर में गोपबंधु जन्में।

बलदेव उप डाकघर से वितरण नहीं हो रहीं डाक, किसी और के यहां से लोग खुद लेने पहुंच रहे अपनी पोस्ट

बलदेव निवासी बोले हमने मुख्य डाकिया को घरों पर डाक बांटते हुए कभी नहीं देखा, किसी अन्य के घर से खुद ही लानी होती है अपनी डाक

बलदेव : आज-कल भर्ती देख रहे या सरकारी नौकरी की तैयारी में जुटे युवाओं को आस रहती है कि न जाने कब डाक द्वारा साक्षात्कार अथवा टेस्ट एवं ऑफर लेटर आ जाये, लेकिन बलदेव के निवासी/युवाओं की यह आस भी खत्म हो गयी है। इसका मुख्य कारण मुख्य डाकघर पर डाकिया का न होना। स्थानियों के माध्यम से पता चला है कि अगर डाकिया है भी तो वह कहीं बाहर रहता है। बलदेव उपडाकघर की स्थिति दयनीय हालातों से गुजर रही है। यहां की व्यवस्थाएं रामभरोसे है। लोगों को स्पीड पोस्ट, रजिस्ट्री या साधारण डाक से कोई वस्तु पोस्ट करनी है तो, यह जरूरी नहीं है कि वह उसी दिन समय से संभव हो सकेगी। स्थिति ये है कि यहां कार्यरत कम संख्या कर्मी या तो आनाकानी करते हैं या फिर आने वाले कल के लिए टाल देते हैं। डाक कर्मियों की इस लापरवाही पर डाक कराने के लिए आने वाले व्यक्ति अपना सिर पकड़कर बैरंग लौट जाते हैं।
इससे कहीं बुरी स्थिति बलदेव की डाक सेवा की है। स्थिति ये है कि मुख्य डाकिया को अभी तक किसी नगरवासी ने डाक बांटते हुए तक नहीं देखा है। नगरवासियों ने बताया कि वह अपनी डाक को लेने के लिए किसी अन्य व्यक्ति के यहां खुद जाते हैं।

ऐसा ही एक मामला सोमवार को सामने आया है। हुआ ये है कि कृष्णमुरारी पांडेय ने बालीगंज कोलकाता से पुराना पोस्ट ऑफिस बलदेव निवासी देवेन्द्र कुमार पांडेय को 27 फरवरी 2024 को कोई सामान रजिस्ट्री के माध्यम से भेजा, जो कि बलदेव उपडाकघर पर 5 मार्च को पहुंच गया, लेकिन यहां डाकिया न होने के कारण डाक कर्मियों ने मुख्य डाकिया द्वारा डाक बांटने के लिए अपने द्वारा चुने गए बलदेव के ही एक व्यक्ति के यहां रखवा दिया गया। यहां से भी उस व्यक्ति ने डाक संबंधित व्यक्ति के यहां नहीं पहुंचाया। जब इसकी जानकारी देवेन्द्र कुमार को हुई तो उन्होंने 11 मार्च सोमवार को अपने पुत्र गोपाल पांडेय को डाकघर भेजा।
बलदेव उपडाकघर से गोपाल को जानकारी मिली मुख्य डाकिया यहां नहीं आते। आपका सामान दूसरे व्यक्ति के यहां रखा हुआ होगा। वहां से जाकर प्राप्त कर लो। तब दूसरे व्यक्ति के यहां से गोपाल ने देवेन्द्र कुमार पांडेय का सामान प्राप्त किया। इससे साफ जाहिर होता है कि मुख्य डाक अधिकारी कुम्भकर्णीय नींद में सोए हुए हैं। किसी की डाक पहुंचे या नहीं पहुंचे इससे डाक अधिकारियों को कोई लेना देना नहीं है।
बलदेव वासियों ने मांग की है कि मुख्य डाकिया पर कार्यवाही कर सभी डाक वितरित की जायें और समय से डाकघर पर काम सुचारू हों।

अबीर गुलाल से सराबोर हुआ भानु भवन लठामार होली के बाद रविवार को श्रद्धालुओं से खचाखच भरा लाडिली जी मंदिर

बरसाना: लठामार रंगीली होली के बाद रविवार को बरसाना में श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ पड़ा। अबीर गुलाल में सराबोर श्रद्धालु मस्ती में डूबे नजर आ रहे थे। वहीं मंदिर परिसर व सफेद छतरी श्रद्धालुओं से खचाखच भरा हुआ था। हाल ही में बरसाना में लड्डू होली व लठामार होली का आयोजन हुआ था। जिसमें देश विदेश के लाखों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। रविवार को बरसाना में श्रद्धालु इस कदर उमड़े कि कोई मेला हो। लाडिली जी मंदिर परिसर से लेकर सिंघपौर तथा सफेद छतरी पर श्रद्धालुओं से खचाखच भरा हुआ था। होली के रसियाओं पर श्रद्धालु थिरकते नजर आ रहे थे। तो वहीं बृषभान दुलारी भी अपने कान्हा के साथ जगमोहन में विराजमान होकर भक्तों को दर्शन दे रही थी। वहीं भक्त भी आराध्य के दर्शन पाकर आंनद से झूम रहे थे। इस दौरान अबीर गुलाल में सराबोर श्रद्धालु एक दूसरे को गुलाल लगा रहे थे तो राधा का आंगन भी मस्ती से झूम रहा था। सेवायत श्याम गोस्वामी ने बताया कि बरसाना में होली की मस्ती धुलेंडी के दिन तक चलेगी।

बरसाना में लगा दो किलोमीटर लंबा जाम
हाईकोर्ट के जज भी एक घन्टे जाम में फंसे

बरसाना: बसंत पंचमी से बरसाना में होली की धूम मची हुई है। हाल ही में लड्डू होली तथा लठामार होली में श्रद्धालु उमड़े थे। रविवार को बरसाना में दो किलोमीटर लंबा जाम लग गया। जिसके चलते जाम खुलवाने में पुलिस के पसीने छूट गये। इस दौरान जाम में हाईकोर्ट के जज भी एक घन्टे तक फंसे रहे।
शनिवार रविवार को बरसाना बम अक्सर जाम लग जाता है। जिसके चलते श्रद्धालुओ सहित स्थानीय निवासी भी कई घन्टे तक जाम में फंसे रहते है। रविवार को भी बरसाना में दो किलोमीटर लंबा जाम लग गया। यह जाम राणा की प्याऊ से लेकर गोवर्धन रोड स्थित पुल तक लग गया। जाम खुलवाने को बरसाना पुलिस के पसीने छूट गये, लेकिन पूरे दिन जाम लगता रहा खुलता रहा। श्रद्धालुओं सहित स्थानीय लोगो के वाहन घण्टो जाम में फंसे। वहीं हाईकोर्ट के जज का काफिला भी जाम में फस गया। बड़ी मशक्कत के बाद पुलिस ने हाईकोर्ट के जज के काफिले को जाम से निकलवाया।

एक अद्भुत चमत्कार का दूसरा स्वरूप थीं सती हरदेवी

मथुरा। गत दिवस मैं अखबार पढ़ रहा था तो एक समाचार देखकर मैं एकदम स्तब्ध रह गया। आगरा की एक महिला ने आठवीं शादी करने के लिए अपने पति की, प्रेमी के साथ मिल कर हत्या कर दी। हे भगवान यह समय तो कलयुग नहीं बल्कि घोर कलयुग का भी बाप है। इसी बात की सोचा बिचारी करते-करते मुझे लगभग साढ़े चार दशक पुरानीं सती हरदेवी की अद्भुत व चमत्कारिक घटना याद आ गई जो अविश्वसनिय सी लगती है।
     गोवर्धन के गांव पलसों में एक सच्ची पतिव्रता महिला थी, जो हर समय अपने बीमार पति की सेवा में तल्लीन रहती। दिन भर असाध्य रोग से पीड़ित अपने पति की सेवा और फिर उससे बचे समय में अपने चार पांच बच्चों का लालन-पालन। बस यही उस पतिव्रता का धर्म था, नाम था हरदेवी। उसका मायका  बरसाना के खायरा गांव में था। शादी के बाद से ही वह अपने पति में ही ईश्वर का भाव रखती थी यानी कि “पति परमेश्वर”।
     एक दिन पति ने बीमारी के चलते अपने प्राण त्याग दिए। हरदेवी पति के वियोग में एकदम विक्षिप्त सी हो गई और अपने छोटे बच्चों के मोह को भी त्याग दिया तथा घरवालों से कह दिया कि मैं भी अपने परमेश्वर की चिता के साथ जल कर प्राण त्यागूंगी। घरवालों ने बहुतेरा समझाया और फिर गांव वालों तक ने मनामने किए छोटे-छोटे बच्चों की दुहाई भी दी किंतु वह नहीं मानी और अपनी जिद पर अड़ी और डटी रही। जैसे ही पति की चिता लगाई गई वह उस पर जा बैठी तथा पति का सिर अपनी गोद में रख लिया।
     चारों तरफ हल्ला मच गया और जिला प्रशासन भी सतर्क हो उठा। उस समय जिलाधिकारी बी.डी. माहेश्वरी थे। उन्होंने सख्त निर्देश दिए कि कहीं हरदेवी सती न होने पाऐ क्योंकि सती होना कानूनन जुर्म था। खैर पूरे जमघट ने जिसमें अफसरों के अलावा पुलिस भी भारी संख्या में मौजूद थी। हरदेवी को जबरदस्ती उठाकर चिता में आग लगा दी। हरदेवी चिता स्थल के पास बने मंदिर में बैठा दी गई। उसके बाद उसे जबरदस्ती जिला अस्पताल लाकर भर्ती कराया गया ताकि उसका मानसिक इलाज हो किंतु उसे तो वही राम धुन सवार कि मैं तो अपने परमेश्वर के पास जाऊंगी। फिर उसे वापस लाया गया।
     चमत्कार की बात यह कि शरीर का जो भाग हरदेवी की गोद में रखा था वह जला ही नहीं। खूब प्रयास किए किंतु नतीजा ढाक के तीन पात। फिर यह तय हुआ कि शरीर के उस अधजले हिस्से को गंगा जी में विसर्जित कर दिया जाय। उस हिस्से को लेकर घरवाले गंगा जी पहुंचे और तेज धारा में छोड़ दिया किंतु उससे भी बड़ा चमत्कार यह हुआ कि वह हिस्सा तेज धार में बहे ही नहीं और बार-बार किनारे पर लौट आऐ।
     इसके पश्चात उस अधजले हिस्से को वापस गांव लाया गया तथा यह तय हुआ कि चिता को दोबारा लगाया जाय और उस पर उसी हिस्से को लेकर हरदेवी बैठ जांय किंतु उसमें आग नहीं लगाई जाय। फिर यही प्रक्रिया अपनाई गई सती हरदेवी श्रृंगार करके चिता पर बैठ गईं। फिर क्या हुआ कि एक बाबा  कहीं से अचानक आऐ और उन्होंने हरदेवी को सती होने के नियमों की कुछ जानकारी दी और पता नहीं कि अचानक गायब भी हो गए।
     उसी दौरान हजारों लोगों की भारी भीड़ ने देखा कि आसमान से केसर की वर्षा हुई और हरदेवी ने अपने हाथों को रगड़ा और तुरंत अग्नि प्रकट हुई तथा देखते ही देखते सती अपने पति के साथ जलकर भस्म हो गई। लोग बताते हैं कि सती ने भस्म होने से पूर्व जोर-जोर से कुछ कहा भी किंतु सती माता की जय हो, सती हरदेवी अमर रहे आदि के जयकारों के मध्य कोई सुन समझ नहीं पाया। जिलाधिकारी बी.डी. माहेश्वरी स्वयं मौके पर गये तथा उन्होंने सती स्थल पर माथा टेका।
     जब हरदेवी सती हुईं थीं। उन दिनों कांतिचंद्र अग्रवाल अमर उजाला के जिला प्रतिनिधि थे उनके आदेशानुसार एक-दो दिन बाद चिता स्थल को देखने मैं भी गया तथा वहां देखा कि चिता स्थल पहाड़ जैसी ऊंचाई बनी हुई थी तथा लोग हवन सामग्री आदि उस पर डाले जा रहे थे और सती हरदेवी के जयघोषों का सिलसिला जारी था। यह सब बातें बहुत पुरानीं हो गईं जितना मुझे याद था वह तथा कुछ सुनी हुई बातों के आधार पर लिखा है क्योंकि मैं हर समय मौके पर तो मौजूद था नहीं हो सकता है कुछ उन्नीस बीस हो गया हो। यह मामला कांतिचंद्र जी ने अमर उजाला में खूब लिखा तथा देश भर के समाचारों की सुर्खियां भी बना। वहीं कुछ नास्तिक लोग भी तिलमिलाऐ और उन्होंने इसे गप्प और अंधविश्वास करार दिया।
     जहां तक नास्तिकों की बात है मैंने बड़े-बड़े नास्तिक देखे जो अंत समय पर माला जपते नजर आऐ। अब मैं आगे बढ़ता हूं पलसों गांव में सती हरदेवी की याद में एक भव्य मंदिर बना हुआ है तथा पिछले लगभग दस वर्षों से श्रावण मास की अष्टमी को एक मेला भी लगता है। उस मेले में दूर-दूर के लोग आकर माथा टेकते हैं।
     कहते हैं कि गोबर गिरता है तो साथ में मिट्टी लेकर उठता है। सती हरदेवी की कथा तो समाप्त हो गई किंतु इसी प्रसंग के साथ मैं अपनी एक लघु कथा को भी अटैच किए दे रहा हूं। क्योंकि अब मुझे अपने मुंह मियां मिट्ठू बनने का चस्का जो लग चुका है। यह किस्सा भी रोचक है। दरअसल जब मैं सती के गांव पलसों गया था तब उसी स्थान पर एक किशोर उम्र के बालक ने मुझे पहचान लिया और अदब से नमस्कार करके घर चलने को कहा चूंकि मैं जल्दी में था और वापस लौटने के साथ-साथ शायद परिक्रमा भी देनी थी। वह लड़का मेरे मना करते ही अपने घर की ओर भागा शायद माता-पिता को बुलाने के लिए किंतु मैं रुका नहीं और तुरंत लौट लिया।
     अब इस लघु कथा को भी बताता हूं सती वाली इस घटना से कुछ दिन पहले गिरिराज जी की बड़ी परिक्रमा में एक अधेड़ महिला इधर-उधर भागते हुए दहाड़ मार मार कर रो रही थी उसके साथ चार पांच बच्चे भी थे। मैंने पूंछा कि क्या बात है? इस पर उसने बताया कि बंदर मेला झोला ले गया है उसमें खाना था तथा बहुत सारे रुपए भी थे। मैंने पूंछा कितने? तो जहां तक मुझे याद है शायद ढाई तीन सौ के मध्य थे। उन रुपयों से वह गोवर्धन में खरीददारी करने आई थी।
     इसके बाद मैंने लगभग आधा या पौन घंटा थैले को ढुढ़वाने में भागदौड़ की किंतु वह नहीं मिला। उस गरीब महिला का रो-रोकर बुरा हाल उसे पैसों के खोने से अधिक अपने पति की गुस्सा का भय ज्यादा लग रहा था। वह ऐसे रोऐ जा रही थी जैसे कोई मर गया हो। मैंने कहा कि जो हो गया सो हो गया तू किसी बात की चिंता मत कर। इसके बाद मैंने अपनी जेब में से पैसे निकाले (शायद पचास साठ रुपए होंगे) और बस किराए के लिए कुछ रुपए रखकर कहा कि ले, और अपने आदमी से कह देना कि बाकी के पैसे भी आ जाएंगे। वह भौचक्की सी रह गई। मैंने उससे पता ठिकाना पूंछा तो वह बोली कि सी पलसौं की हूं तथा मेरे आदमी का नाम यह है। सी पलसौं पलसौं गांव से ही सटा हुआ है।
     मैं घर आया तथा पिताजी को पूरा किस्सा बताया और उनसे पैसे लेकर उसके गांव के पते पर मनी ऑर्डर कर दिया। एक सप्ताह बाद मनी ऑर्डर मिलने की रसीद भी मेरे पास आ गई। उस लड़के ने मुझे पहचान कर इसीलिए घर चलने और न जाने पर शायद मां बाप को बुलाने हेतु दौड़ लगाई होगी। पहले सती की कथा और फिर अपनी लघुकथा बताकर ऐसा ही चैन मिल रहा है जैसे मनी आर्डर करके मिला था।

विजय गुप्ता की कलम से

संस्कृति स्पोर्ट्स फिएस्टा-2024 में नीलगिरी हाउस बना विजेता

विजेता खिलाड़ियों पर हुई पदकों की बौछार

मथुरा। संस्कृति विश्वविद्यालय में वार्षिक खेलकूद प्रतियोगिता ‘स्पोर्ट्स फिसटा 2024’ के दौरान विवि के विद्यार्थियों ने लगभग सभी खेलों में पूरे जोश-खरोश के साथ भागीदारी की। खिलाड़ियों के चारों हाउसों के बीच आगे निकलने की होड़ मची रही। विश्वविद्यालय के नीलगिरी, अरावली, विंध्याचल व शिववालिक हाउसेस के मध्य कुल चौबीस प्रकार(क्रिकेट, वालीबाल, फुटबाल, बैडमिंटन, टेबल टेनिस आदि) की खेलकूद प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। प्रारभ्भिक दौर में चारों हाउस के मध्य समान्तर का मुकाबला रहा । अंतिम दौर में नीलगिरी व शिवालिक हाउसस् के मध्य कड़े संघर्ष के बाद नीलगिरी हाउस विनर तथा शिवालिक हाउसस् रनर घोषित हुए। सभी प्रतियोगियों में खिलाड़ियों ने 215 स्वर्ण पदक, 215रजत पदक व 200 कांस्य पदक हासिल किए।
‘स्पोर्टस फिएस्टा 2024‘ के समापन पर आयोजित एक भव्य कार्यक्रम के दौरान विजेता नीलगिली हाउस और उप विजेता शिवालिक हाउस को ट्राफी व अन्य खिलाड़ियों को उनके व्यक्तिगत प्रदर्शन के आधार पर मेडल प्रदान किए गए। वार्षिक खेलकूद प्रतियोगिताओं के समापन समारोह के मुख्य अतिथि संस्कृति ग्रुप आफ़ इंस्टीट्यूशनस् के चैयरमेन आरके गुप्ता तथा विशिष्ट अतिथि संस्कृति विश्वविद्यालय के चांसलर डा सचिन गुप्ता रहे। इस दौरान समापन समारोह में सभी हाउस के रंग-बिरंगे परिधानों में खिलाड़ियों ने शानदार मार्च पास्ट करके लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि आरके गुप्ता, चेयरमैन, संस्कृति ग्रुप आफ़ इंस्टीट्यूशनस् ने विभिन्न खेलों में भाग लेने वाले विद्यार्थियों का उत्साह वर्धन करते हुए कहा कि हार-जीत इतनी महत्वपूर्ण नहीं होती जितना कि आपका खेलों में भाग लेना। जो आज हारे हैं वे निश्चित रूप से कल जीत सकते हैं, यदि अपने में सुधार के लिए मेहनत करें तो। अतिथियों ने कहा कि विश्वविद्यालय में आपके खेलों के लिए हर तरह के साधन उपलब्ध हैं आप इनका भरपूर उपयोग करें और अपनी खेल प्रतिभा को निखारें। डायरेक्टर डा. रजनीश त्यागी ने मुख्य अतिथि का स्वागत करते हुए कहा कि खेलकूद न केवल शारीरिक सौष्ठव के लिए बल्कि व्यक्ति के चरित्र निर्माण से लेकर राष्ट्र निर्माण में गौरवशाली योगदान प्रदान करते हैं तथा इससे छात्रों में बौद्धिक-शारीरिक विकास के साथ साथ संगठनतमक शक्ति का सम्वर्द्धन होता है। कुलपति प्रो. एमबी चेट्टी ने स्पोर्ट्स फिसटा के प्रस्तावना पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम का संचालन ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट सेल की अनुजा गुप्ता ने किया।


इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि संस्कृति विश्वविद्यालय के चांसलर डा सचिन गुप्ता ने बताया कि विश्वविद्यालय में सभी खेलों के लिए विश्वस्तरीय मैदान, संसाधन के लिए विवि लगातार प्रयासरत है। आने वाले समय में यहां प्रदेश स्तरीय, राष्ट्र स्तरीय खेलकूद के आयोजन भी होंगे, जो हमारे खिलाड़ियों को एक बड़ा स्तर प्रदान करेंगे। उन्होंने कहा कि आज भी हमारे विवि के कई खिलाड़ी राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विवि का नाम ऊंचा कर रहे हैं,जोकि हम सभी के लिए गर्व की बात है। विश्वविद्यालय की सीईओ डा. मीनाक्षी शर्मा ने सभी खिलाड़ियों को शुभकामनाएं देते हुए खेलकूद के महत्व पर प्रकाश डाला। अंत में डीन छात्र कल्याण डा डी एस तोमर के द्वारा सभी का आभार व्यक्त किया गया। आयोजन समिति में मो फईम, डा विशाल, डा. राजश्री, डा. दुर्गेश वाधवा, रिचा सिंह, डा. अनुभव सोनी, कृष्ण राज सिंह आदि का सराहनीय योगदान रहा। आयोजन में मुख्य रूप से अकेडमिक डीन डा. मीनू गुप्ता के दिशा-निर्देश उपयोगी साबित हुए।

बेटियां शिक्षित होंगी तभी वह सशक्त बनेंगीः विनी सिंह महिला दिवस पर के.डी. डेंटल कॉलेज की छात्राओं को किया प्रोत्साहित

मथुरा। बदलते समय के साथ आधुनिकता अच्छी बात है, मगर यह एक दायरे में रहे, इसका ख्याल रखा जाना जरूरी है। हमारे पहनावे से हमारी इमेज नहीं झलकती बल्कि हमारा व्यवहार मायने रखता है, इस बात को हर छात्रा को समझना चाहिए। समाज का भी यह दायित्व है कि वह बेटी-बेटे में भेद न करे। बेटियां शिक्षित होंगी तभी वह ज्यादा सशक्त बनेंगी तथा समाज में बदलाव भी आएगा। उक्त सारगर्भित उद्गार शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर मैत्री संस्था की सह-संस्थापक विनी सिंह ने के.डी. डेंटल कॉलेज एण्ड हॉस्पिटल की छात्राओं को सम्बोधित करते हुए व्यक्त किए।
के.डी. डेंटल कॉलेज और इंटरनेशनल कॉलेज ऑफ डेंटिस्ट के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित महिला दिवस का शुभारम्भ केक काटकर किया गया। इस अवसर समाजसेविका विनी सिंह ने महिला सशक्तीकरण पर कहा कि प्रत्येक नारी में अपरिमित शक्ति और क्षमताएं विद्यमान हैं, जरूरत है उन्हें प्रोत्साहित करने की। उन्होंने कहा कि आज बेटियां अपने साहस के बल पर पूरे आत्मविश्वास के साथ हर क्षेत्र में कामयाबी हासिल कर रही हैं। नई सदी की नारी के पास कामयाबी के उच्चतम शिखर को छूने की अपार क्षमता है। उन्होंने कहा कि समाज के दो पंख हैं, एक स्त्री व दूसरा पुरुष। यह दोनों पंख समान होंगे तभी समाज और राष्ट्र का विकास होगा।
के.डी. डेंटल कॉलेज के प्राचार्य और डीन डॉ. मनेष लाहौरी ने मुख्य अतिथि विनी सिंह का पुष्पगुच्छ भेंटकर स्वागत करते हुए कहा कि मैत्री की सह-संस्थापक एक प्रतिबद्ध सामाजिक कार्यकर्ता हैं। लगभग दो दशक से यह स्वास्थ्य, बुजुर्गों तथा लैंगिक समानता के क्षेत्र पर शिद्दत से काम कर रही हैं। विनी सिंह मैत्री संस्था की कार्यकारी निदेशक के रूप में महिलाओं और बच्चों के अधिकारों, स्वास्थ्य तथा गरीबी पर न केवल मुखर हैं बल्कि पूर्ण मनोयोग से इस दिशा में काम कर रही हैं। मैत्री की स्थापना 2005 में शिलांग मेघालय में एचआईवी/एड्स से लड़ने के लिए वर्दीधारी सेवाओं में सहायता समूह बनाने और समर्थन करने की आवश्यकता के रूप में की गई थी।
मैत्री संस्था द्वारा वर्दीधारी सेवाओं के साथ दिल्ली की मलिन बस्तियों में महिलाओं के खिलाफ हिंसा को कम करने तथा उन्हें एचआईवी आदि से बचाने का काम भी किया जा रहा है। 2008 से मैत्री संस्था के माध्यम से मथुरा-वृन्दावन में उन विधवा, परित्यक्त महिलाओं के उद्धार का काम किया जा रहा है, जिन्हें उनके परिजनों ने बेघर और निराश्रित छोड़ दिया है। पिछले 13 वर्षों में अपने काम के माध्यम से विनी सिंह ने महसूस किया कि करुणा और सद्भावना वृद्ध, बेघर और निराश्रित विधवाओं के जीवन में परिवर्तनकारी सुधार ला सकती है। मैत्री संस्था का ध्येय वाक्य पहचानें, समझें और खुश रहें है।


के.डी. डेंटल कॉलेज के प्राचार्य और डीन डॉ. मनेष लाहौरी ने कहा कि दृढ़ इच्छा शक्ति और शिक्षा ने नारी मन को उच्च आकांक्षाएं, सपनों के सप्तरंग एवं अंतर्मन की परतों को खोलने की नई राह दी है। जबकि हम अपने करियर की आकांक्षाओं को पूरा करने और पेशेवर सीढ़ी चढ़ने में इतने व्यस्त हैं कि कभी-कभी अपने माता-पिता तथा उन लोगों को भूल जाते हैं जिन्होंने हमारे सपनों को पूरा करने के लिए अपना तन-मन-धन से समर्थन दिया है। डॉ. लाहौरी ने छात्राओं को सम्बोधित करते हुए कहा कि हर महान सपना एक सपने देखने के साथ शुरू होता है। हमेशा याद रखें, आपके अंदर दुनिया को बदलने के लिए सितारों तक पहुंचने की ताकत, धैर्य और जुनून है। महिला दिवस कार्यक्रम में महिला प्राध्यापकों के साथ ही बड़ी संख्या छात्राएं उपस्थित रहीं।

बहुत याद आती है देवराहा बाबा की

मथुरा। ब्रह्म ऋषि देवराहा बाबा को देह त्यागे हुए भले ही लंबा समय हो गया है, पर आज भी वह हमारे जहन में इस कदर समाए हुए हैं कि भुलाए नहीं भूलते। वह दृश्य बार-बार आंखों के सामने नाचता रहता है कि बाबा अपनीं मचान पर बैठे हैं और भक्तों की भीड़ आ रही है तथा आशीर्वाद लेकर जा रही है।
अब तो बाबा का आश्रम चारों ओर से कवर्ड हो गया है। उस समय तो एकदम खुला हुआ था। कैसा मनोरम और शांत वातावरण था सिर्फ कुछ झोपड़ियां थीं। पक्का निर्माण तो था ही नहीं। मुझे वह दिन याद आ रहा है जब बाबा ने देह त्यागी थी। उस दिन योगिनी एकादशी का महान पर्व था। इससे भी कहीं अधिक विलक्षण बात यह थी कि बाबा ने ब्रह्म मलंद विधि से अपने प्राण त्यागे थे। ब्रह्म मलंद विधि को आम बोल चाल की भाषा में ब्रह्मांड फाड़कर प्राण त्यागना बोला जाता है। इस विधि से सर के बीचो-बीच होकर प्राण निकलते हैं। यह विधि सर्वश्रेष्ठ मानीं जाती है। इस दौरान सर के बीचो बीच एक छोटा सा छिद्र हो जाता है और प्राण पखेरू निकल जाते हैं।
सतयुग में तो ऐसी घटनाएं अक्सर होती सुनीं गईं है किंतु इस घोर कलयुग में यह चौंकाने वाली बात है। बाबा का पूरा जीवन चमत्कारों से भरा हुआ है, इसे बताने की जरूरत नहीं सब जानते हैं। जिस समय बाबा को जल समाधि दी जा रही थी उस मौके पर मैं भी मौजूद था। स्व. अटल बिहारी वाजपेई सहित बड़ी-बड़ी हस्तियां मौजूद थीं सभी लोग अलग-अलग नावों में सवार थे। जैसे ही बाबा की पवित्र देह को यमुनाजी में विसर्जित किया गया तुरंत एक जोरदार अंधड़ सा आया और हल्की बूंदाबांदी के साथ बादल घुमड़ने लगे और सभी नावें जोर-जोर से हिचकोले लेने लगीं। ऐसा लगने लगा कि नावों में बैठे लोगों की भी कहीं यमुना में जल समाधि न हो जाय। लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ और कुछ क्षण के बाद सब कुछ एकदम शांत हो गया।
बाबा के करोड़ों शिष्य इस पृथ्वी पर हैं। मैंने यह महसूस किया कि सर्वप्रिय शिष्य शैलजा कांत मिश्र है, जो उस समय मथुरा के पुलिस कप्तान थे और बाबा की कृपा से ही आज भी मथुरा में रहकर ब्रज की सेवा कर रहे हैं। बाबा ने उसी दौरान कह दिया था कि शैलेज बच्चा तुमको रिटायर होने के बाद फिर दोबारा मथुरा में आकर ब्रज की सेवा करनी है। जिस समय बाबा ने अपनी देह त्यागी थी, उन्होंने शैलजा कांत जी को बुला लिया तथा जब बाबा मचान पर देह त्याग रहे थे, उस समय भी मिश्रा जी मचान के नींचे मौजूद थे। मिश्रा जी के बारे में एक बात और बताना चाहूंगा कि बाल्यावस्था से ही उनकी माताजी बाबा के चरणों को धो-धोकर उन्हें पिलाया करती थीं। कहने का मतलब है कि कई पीढ़ियों से मिश्रा जी का परिवार बाबा को मानता चला आ रहा है। भारत के प्रथम राष्ट्रपति स्व. डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद जी का परिवार भी कई पीढ़ियों से बाबा को मानता चला आ रहा था। यही नहीं उनके ननिहाल की भी कई पीढ़ियां बाबा के प्रति अगाध श्रद्धा रखती थीं।
मिश्रा जी जो गृहस्थ के विलक्षण संत हैं, के माध्यम से ही मुझे बाबा का आशीर्वाद मिला था। बाबा मुझे गुप्ता भगत कहकर पुकारते थे। एक मौका ऐसा भी आया जब बाबा ने मेरी जान बचा दी। मेरी ही नहीं मेरी पत्नी व दोनों बच्चों की जान भी बचाई। हुआ यह कि मैं अपनी लूना (विक्की) से पत्नी व दोनों बच्चों को लेकर बाबा के दर्शनार्थ जा रहा था। जैसे ही वृंदावन के पौंन्टून पुल के पास पहुंचा मेरी लूना अचानक बंद हो गई। लाख जतन किए पर लूना चली ही नहीं। शाम का समय था इस ऊहापोह में अंधेरा छाने लगा। इसी दौरान मुझे सामने से आती हुई एक गाड़ी की सर्च लाइट दिखाई दी मैंने हाथ देकर उसे रोका तो पता चला कि वह गाड़ी उस समय के सी.ओ. सिटी एस.एन. सिंह जी की थी। वे भी बाबा के आश्रम जा रहे थे।
एस.एन. सिंह जी ने जैसे ही मुझे देखा तो वे गाड़ी से नींचे उतर आए तथा सारा माजरा समझा। उन्होंने अपनीं गाड़ी में बैठे एक पुलिस वाले से कहा कि तुम गुप्ता जी की लूना को ठीक करके मथुरा पहुंचा दो। फिर इसके बाद वे हम चारों को अपनी गाड़ी में लेकर पौन्टून पुल की ओर बढ़े। वहां का नजारा देखकर तो हम सभी के पैरों के नींचे से जमीन खिसक गई। दरअसल कुछ देर पहले ही यमुना में पानी का बहाव अचानक तेज होने की वजह से पूरा पौन्टून पुल ही बह गया। इसका मतलब यह हुआ कि यदि हमारी लूना खराब नहीं होती तो हम चारों की जल समाधि होना तय थी। यह सब बाबा महाराज की कृपा का ही परिणाम था।
इसके बाद हम लोगों ने तय किया कि अब तो हमें बाबा के दर्शन करने ही हैं। अतः गाड़ी को वापस किया तथा मांट होकर बाबा के आश्रम पहुंचे। उस समय रात हो चुकी थी संयोग ऐसा कि वहां शैलजा कांत जी भी पहले से मौजूद थे। बाबा को सारी घटना सुनाई तो बाबा बस मुस्कुरा दिए ऐसा लगा कि बाबा को तो सब कुछ पहले से ही पता था। खैर बाबा का आशीर्वाद लेने के बाद जब हम सभी वापस लौटने को हुए तो बाबा ने मिश्रा जी को हिदायत दी कि “शैलेज बच्चा गुप्ता भगत और इनके बाल बच्चों को अपने साथ अपनीं गाड़ी में लेकर जाओ तथा इन्हें घर पर छोड़कर फिर अपने घर जाना” इस बात को बाबा ने मिश्रा जी से दो बार दोहराया। इससे पता चलता है कि बाबा की मेरे और मेरे परिवार के ऊपर कितनी जबरदस्त कृपा थी।
लिखने को तो बाबा के बारे में बहुत कुछ है किंतु लेख को ज्यादा लंबा खींचने के बजाय सिर्फ इतना कहना चाहूंगा कि भले ही आज सशरीर बाबा हमारे मध्य नहीं हैं, किंतु उनकी दिव्यात्मा ब्रज के कण-कण में आज भी विद्यमान हैं। बल्कि यदि मैं यौं कहूं तो अतिशयोक्ति नहीं होगी कि बाबा महाराज की आत्मा आंशिक रूप से संत शैलजा कांत जी के अंदर भी विराजमान हैं। परमपिता परमात्मा और बाबा महाराज जो स्वयं ईश्वर के अंशावतार थे, की कृपा हम सब ब्रज वासियों के ऊपर संत शैलजा कांत जी के माध्यम से लंबे समय तक इसी प्रकार बरसती रहे।

विजय गुप्ता की कलम से