Friday, January 2, 2026
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वृंदावन पब्लिक स्कूल ने किया नारी श्रम शक्ति सम्मान से महिला स्वच्छता वर्ग को सम्मानित

वृंदावन। एक नारी ही समस्त सृष्टि का आधार है। वह परिवार, समाज व राष्ट्र की नींव है । ऐसे ही विचारों से ओतप्रोत हो वृंदावन पब्लिक स्कूल ने महिला दिवस के अवसर पर विद्यालय की स्वास्थ्य व स्वच्छता कार्य में योगदान देने वाली महिला श्रमिक वर्ग को नारी श्रम शक्ति सम्मान से नवाजा । विद्यालय के निदेशक डाॅ.ओम जी ने कहा कि एक बालक के विकास में जहां अभिभावक व गुरु के अहम भूमिका होती है, वहीं विद्यालय में स्वास्थ्य व स्वच्छता के प्रति छात्रों की देखभाल करने वाले श्रमजीवी वर्ग के महत्व को भी नकारा नहीं जा सकता। छात्र के शारीरिक व मानसिक विकास की कड़ी में इनका सहयोग प्रशंसनीय रहता है। इसी के मद्देनजर विद्यालय द्वारा समस्त महिला श्रमिक वर्ग को उनकी सेवा पारायणता व कर्तव्य परायणता के लिए ‘नारी श्रम शक्ति सम्मान’ से सम्मानित किया गया ताकि वे स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर सके व अपने अंदर हीन भावना न पनपने दें।
विद्यालय की निदेशक डॉ निधि शर्मा ने कहा कि एक नारी होने के कारण हमारा सबसे पहला दायित्व यह है कि हम स्वयं को प्रसन्न रखें और स्वस्थ रखें जब हम स्वस्थ व प्रसन्न रहेंगे तभी हम अपने घर-परिवार का ध्यान रख पाएंगे।
बीएनएस स्कूल की संयोजकता दमयंती गोस्वामी ने कहा कि आज का युग नारीवाद का युग है। आज महिलाएं हर क्षेत्र में पुरुष के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही है। घर-परिवार और कार्य क्षेत्र को बखूबी निभा रही हैं। इससे नारियों की स्थिति सुदृढ़ हुई है। एक नारी होने के नाते हम हमें स्वयं भी नारियों का करना चाहिए और अपने आत्मसम्मान की भी रक्षा करनी चाहिए।


इसी क्रम में विद्यालय में कक्षा 12 के छात्र-छात्राओं ने समस्त महिला अध्यापिकाओं को अपने नृत्य ,गायन वादन और नाटक प्रस्तुति से नारी होने के गौरव से रूबरू कराया। संगीत विभाग के द्वारा आयोजित गीत ओ री चिरैया… ने जहां नारी के महत्व को बताया ,वहीं विभिन्न क्षेत्रों में नारियों की भूमिका को दर्शाती एक नाट्य प्रस्तुति ने नारी सशक्तिकरण की मिसाल कायम की जिससे समस्त परिकर तालियों की गडगड़ाहट से गूंजा यमान हो गया।
इस अवसर पर प्रियदर्शनी आचार्य, सीमा पाहुजा, रागिनी श्रीवास्तव, जूही अग्रवाल, अंजना शर्मा व पूजा तिवारी आदि का सहयोग सराहनीय रहा।

जिनके अंदर राष्ट्र भक्ति का सैलाब उमड़ता रहता था ऐसे थे बाबूलाल जी

मथुरा। अगर कोई मुझसे पूछे कि राष्ट्र के प्रति सबसे ज्यादा समर्पित व्यक्ति कौन है? जिसे देखा और खुद परखा हो तो मैं कहूंगा बाबूलाल होटल वाले।
मेरे ये शब्द कोई दिखावटी या बनावटी नहीं बल्कि यथार्थ हैं। वैश्य परिवार में जन्मे देहाती से दिखने वाले बाबूलाल जी का शारीरिक कद भले ही मध्यम रहा हो किंतु अपनी मातृभूमि और अपने हिंदू समाज के प्रति समर्पण की अनूठी भावना के कारण उनका कद गगनचुंबी था। भोले भाले सीधे-साधे बाबूलाल जी अंतर्मुखी स्वभाव वाले ग्रहस्थ के सच्चे संत थे। सेवा ही संकल्प उनके जीवन का मूल मंत्र था। उनकी विलक्षणतायें ऐसी अजब गजब थीं कि कोई आसानी से विश्वास नहीं कर सकता।
सबसे बड़ी विचित्र बात जो मैंने स्वयं भी महसूस की थी कि वे कभी-कभी सामने वाले के मनोभाव व अंदरूनी परिस्थितियों को भांपकर सही दिशा दिखाने व समझाने की कोशिश करते थे। उनका यह व्यवहार उसी के साथ होता जिसमें उनका आत्मिक प्रेम हो। उन भाग्यशालियों में मैं स्वयं भी हूं। हमारे पिताजी से उनका खास प्रेम था तथा शाखा भी अक्सर साथ-साथ जाते थे। उस समय मैं बहुत छोटा था शायद चार-पांच वर्ष का। पिताजी के साथ मैं भी जाता था, पिताजी की उंगली पकड़कर।
बाबूलाल जी की कुछ विलक्षणतायें बताता हूं। लगभग पैंसठ सत्तर वर्ष पूर्व की बात है। गुरु गोल्वरकर जी की गिरफ्तारी के विरोध में आंदोलन चल रहा था। मथुरा से एक जत्था सत्याग्रहियों का लखनऊ के लिए रवाना होना था। उन दिनों बाबूलाल जी की पान व लैमन सोड़ा की दुकान छत्ता बाजार में हनुमान गली के निकट थी। दोपहर का समय था दुकान पर किशोर उम्र का उनका एकमात्र यानी एकलौता लड़का रमेश आया तो वे बोले कि तू आ गया अब मैं जा रहा हूं। लड़के ने समझा रोजाना की तरह घर पर खाना खाने जा रहे होंगे। इसके बाद वे खाना खा कर लौटे नहीं तो बेटे ने सोचा कि हो सकता है घर पर कोई काम लग गया होगा। अतः वह शाम को जल्दी दुकान बंद करके घर गया तो पता चला बाबू लाल जी घर पर पहुंचे ही नहीं।
अब तो घर में मां बेटे को घबराहट हुई तथा चारों तरफ ढूंढ ढकोर हुई किंतु पता नहीं चला। शेष में हार झक मार कर चुपचाप बैठ गए। कुछ दिन बाद उनका पत्र आया कि मुझे मीसा में बंद कर दिया गया है। मैं लखनऊ जेल में ठीक-ठाक हूं किसी बात की चिंता मत करना उन्होंने लिखा कि मुझे तीन माह की जेल हो गई है। जेल से छूट कर आ जाऊंगा। मामला यह था कि वे दुकान से घर न जाकर बिना बताए स्टेशन चले गए सत्याग्रहीयों को विदा करने। वहां पर सत्याग्रहीयों की संख्या कम थी तथा संघ के वरिष्ठ लोगों ने कहा कि बाबूलाल जी तुम भी चले जाओ लखनऊ, तो बाबूलाल जी झट से तैयार हो गए और बैठ गए रेल में। बाबूलाल जी ने न घर की चिंता की और ना ही उन्हें दुकान का होश रहा। इसी चक्कर में दुकान भी बंद हो गई और घर में खाने पीने तक के लाले पड़ गए। लखनऊ से आने के बाद उन्होंने कंसखार पर भोजन करने वाला होटल खोला। जिसका नाम था गुजराती होटल।
दूसरी घटना सन 1965 की है जब दिल्ली में गौरक्षा को लेकर बहुत जबरदस्त आंदोलन हुआ तथा अनेक लोग मारे गए थे। उस समय भी बाबूलाल जी बगैर घरवालों को बताये चुपचाप अन्य सत्याग्रहियों के साथ चले गए। वहां उनकी भी गिरफ्तारी हुई तथा दो माह जेल में काटे। वहां से भी कुछ दिन बाद पत्र आया कि मैं तिहाड़ जेल में हूं। जेल से छूटते ही घर आऊंगा। जाते समय उन्होंने घर पर इसलिए नहीं बताया कि पत्नी व पुत्र जाने नहीं देते।
तीसरी घटना उस समय की है जब अयोध्या में राम जन्मभूमि आंदोलन चल रहा था। उस दौरान ये जीवन की अंतिम बेला में थे तथा लगभग डेढ़ वर्ष इन्होंने चारपाई पर ही बिताए क्योंकि इन्हें पक्षाघात हो गया था। उस समय इन्हें एक ही रटना लगी रहती कि मुझे अयोध्या ले चलो। पत्नी व पुत्र कहते कि आपको हाथों से खाना खिलाया जा रहा है तथा सब काम चारपाई पर ही हो रहे हैं। दीपावली का त्यौहार सिर पर है ऐसी स्थिति में अयोध्या के बबाल में कैसे ले चलें? जैसे तैसे बड़ी मुश्किल से इन्हें समझाया गया।
चौथी घटना उन्हीं दिनों की है जब ये चारपाई पर थे। चुनाव में वोट देने का समय आया और ये जिद पकड़ गए कि मुझे वोट डालने जाना है। हालत गंभीर, घर वाले परेशान, इस पर इन्होंने कह दिया कि तभी कुछ खाऊंगा पीऊंगा जब तक कि वोट न डाल लूं। इन्होंने खाना तो दूर पानीं भी नहीं पिया। इस पर पुत्र रमेश गोदी में उठाकर गली के बाहर रामजी द्वारे मतदान केन्द्र तक लेकर गये और जब इन्होंने वोट डाल दिया तब इन्हें चैन पड़ा और घर आकर खाना खाया व पानीं पीया।
इनके पुत्र रमेश बाबू बताते हैं कि घर की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण हम इन्हें उपचार हेतु दिल्ली भी नहीं ले जा सके तथा कुछ दिन मैथोडिस्ट अस्पताल में रखा इसके बाद घर ले आऐ। जहां तक आर्थिक स्थिति की बात है तो यह स्थिति तो आज भी बहुत अच्छी नहीं है किंतु चैंकाने वाली बात यह है कि आज भी इनके होटल में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जो प्रचारक पदाधिकारी व अन्य स्वयंसेवकों के जत्थे आते हैं उन्हें भी निःशुल्क भोजन कराया जाता है।
बाबूलाल जी के होटल में अटल बिहारी वाजपेई, रज्जू भैया, नानाजी देशमुख, पंडित दीनदयाल उपाध्याय तथा जगन्नाथ राव जोशी जैसी हस्तियां आकर भोजन कर चुकी हैं। इसके अलावा चाहे आपातकाल का दौर रहा हो अथवा अन्य कोई मौका जब-जब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शीर्षस्थ हस्तियां मथुरा के कंस किले, जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का गढ़ है पर अथवा अन्यत्र स्थानों पर आईं सभी के लिए यहीं से भोजन तैयार होकर जाता रहा। बाबूलाल जी ने कभी किसी से एक भी पैसा नहीं लिया।
आपातकाल के दौरान का एक रोचक किस्सा भी आपको बताता हूं। एक बार किसी ने इनकी शिकायत कर दी थी कि इनके यहां रज्जू भैया आऐ और तीन दिन होटल में रुके व खाना खाया कोतवाल ने इन्हें गिरफ्तार कराकर कोतवाली में बुलवाया तथा पूछा कि रज्जू भैया आपके यहां आऐ। इन्होंने सच-सच बता दिया कि हां साहब आऐ। इसके बाद कोतवाल ने पूछा कि क्या करने आऐ? तो उन्होंने कहा कि खाना खाने। कोतवाल ने फिर पूछा कि ठहरे भी तो थे तुम्हारे होटल में, इस पर इन्होंने कहा कि साहब हमारा होटल तो सिर्फ खाने का है ठहरने का नहीं।
इसके बाद कोतवाल ने जांच कराई तो जो सच्चाई थी वह सामने आ गई कि होटल सिर्फ खाने का ही था। फिर भी कोतवाल ने इन्हें दो दिन तक कोतवाली में ही बंद रखा क्योंकि रज्जू भैया खाना खाने तो आऐ ही थे। पुलिस की नजर में तो यह भी गुनाह हो गया। दूसरे दिन इन्होंने कोतवाल से कहा कि साहब आपके नाती का जन्मदिन है। अगर अनुमति हो तो जन्मदिन में शामिल हो जाऊं।
कोतवाल इनकी भोली भाली सूरत व सीधेपन से प्रभावित था, उसने कहा कि चले जाओ पर सुबह आठ बजे आ जाना। बाबूलाल जी घर चले गए और दूसरे दिन अपना बिस्तर भी साथ लेकर सुबह सात बजे ही कोतवाली पहुंच गए और कोतवाल के घर का दरवाजा खटखटा दिया। कोतवाल बाहर आए और उन्होंने बाबूलाल जी को देखा, तो झल्लाकर बोले कि बाबूलाल मैंने तुम्हें आठ बजे आने को कहा था और तुमने सात बजे ही आकर मुझे जगा दिया। इस पर बाबूलाल जी ने हाथ जोड़कर कहा कि सरकार क्या सात और क्या आठ आना है तो आना ही है।
इनके भोलेपन पर कोतवाल भी मुग्ध हो गए और बोले कि ठीक है अब तुम घर जाओ इस पर बाबूलाल जी ने कहा कि अब फिर कब आऊं? इतना सुनकर कोतवाल और भी मुरीद हो उठे और बोले कि अब तुम्हें आने की जरूरत नहीं यदि होगी तो हम बुला लेंगे। बाबूलाल जी के बारे में यदि विस्तार से लिखा जाय तो ग्रंथ बन जायगा। पंडित दीनदयाल उपाध्याय से जुड़ा एक रोचक किस्सा और बताता हूं। एक बार दीनदयाल जी कहीं बाहर से आऐ और होलीगेट होकर रिक्शे से संघ के गढ़ कंस किले की ओर जा रहे थे। सावन का महीना था अतः पुलिस वालों ने भीड़ के कारण रिक्शे को होली गेट अंदर जाने से रोक दिया।
फिर क्या था पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने अपने थैले को हाथ में लिया तथा बिस्तर बंद को कंधे पर लादकर होलीगेट के अंदर बढ़ने लगे तभी किसी ने उन्हें पहचान लिया और दौड़कर बाबूलाल जी के होटल पर सूचना दी। उस समय बाबूलाल जी मौजूद नहीं थे, उनके पुत्र रमेश ही थे वे दौड़े-दौड़े गए तथा दीनदयाल जी को अपने होटल पर लाये। वहां उन्होंने मुंह हाथ धोए व तृप्त होकर भोजन किया उसके बाद फिर वे कंस किले पर चले गए।
राष्ट्र और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रति समर्पण की कितनी जबरदस्त भावना थी बाबूलाल जी के अंदर वह कल्पना से भी परे है। उनका होटल आज भी वैसा ही साधारण है जैसा पचास साठ वर्ष पूर्व था। वे अक्सर धार्मिक पुस्तकें कल्याण आदि पढ़ते दिखाई देते थे। आज भी जब कभी मैं वहां जाकर बैठता हूं तो मंदिर या किसी साधु के आश्रम जैसी अनुभूति होती है। ऐसे महापुरुष को मेरा कोटि-कोटि नमन।

विजय गुप्ता की कलम से

गंगा घाट से कांवड़ लेकर आ रहे युवक की कांवड़ खण्डित, कस्बा राया के कोयल रेलवे क्रॉसिंग पर हुई खण्डित, साथी कांवड़ियों में पनपा आक्रोश, बवाल का अंदेशा देख पुलिस ने मामला शांत कराया

रिपोर्ट – विनोद शर्मा

मथुरा।महाशिवरात्रि के पर्व पर बाबा भोलेनाथ का जलाभिषेक करने के लिए भक्त गंगा स्नान कर कावड़ लेकर आते हैं।जो राजघाट से पैदल पैदल सजी धजी कांवड़ों के साथ टोली बनाकर आते हैं।वहीँ गुरुवार की सांय युवक अंकित चौधरी निवासी धाना तेजा राजघाट से कावड़ लेकर कस्वा के राया से गुजर रहा था।इसी बीच कस्वा के कोयल रेलवे फाटक ख़राब हो गया।जहाँ से कावड़ियों को निकलने में परेशानियों का सामना करना पड़ा।इसी दौरान किसी शराबी से कावड़िया अंकित टकरा गया।

जिससे उसकी कावड़ खण्डित हो गई।इस मामले को लेकर साथी कावड़ियों में आक्रोश पनप गया।और वहीं सड़क पर बैठ बबाल करने लगे।जिस पर सक्रिय हुई पुलिस ने मामला शांत कराया।और गंगा घाट पर कावड़ लाने के लिये युवक को साथ लेकर गई।रास्ते मे अंकित ने अपने पुजारी से बात की जिससे वह वापस लौट आये।बताया गया है कि कावड़ में गंगाजल का एक कलश फूट गया था।शेष कलश में गंगाजल भरा हुआ था।जिसपर वह अपने साथियों के साथ आगे चले गये।और पुलिस ने राहत की सांस ली।

मथुरा बीएसए का नया आदेश मिलने के लिए करानी होगी एंट्री और लगाना होगा आधार कार्ड, अजीबो गरीब आदेश से हर कोई सन्न

  • सूत्र बोले कुछ असमाजिक लोगों के चलते किया गया है ऐसा

रिपोर्ट – रवि यादव

मथुरा मथुरा जनपद का जिला बेसिक शिक्षा कार्यालय अपने आप में चर्चाओं में बना रहता है लेकिन नया चर्चा का केंद्र बना है बी एस ए कार्यालय द्वारा लगाया गया एक नया नोटिस जिसमें जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के माध्यम से लिखा गया है कि जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय में मिलने के लिए अब आने वाले व्यक्ति को रजिस्टर में एंट्री करानी होगी साथ ही में अपना आधार कार्ड पैन कार्ड या अन्य कोई पहचान पत्र की फोटो कॉपी भी आपको लगानी होगी इस सारी प्रक्रिया के बाद ही आप जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी से मिल पाएंगे यह नोटिस विभाग के दरवाजे पर चिपका हुआ है ऐसे अजीबोगरीब आदेश को देखकर हर कोई चर्चा कर रहा है सूत्र बताते हैं कि ऐसा इसलिए किया गया है की कोई ऐसा व्यक्ति ऑफिस का समय जाया ना करें जो की शिक्षा विभाग से संबंधित ना हो ऐसे में पहचान करने हेतु आदेश दिया गया है, इस तरह के आदेश को देखकर के और पढ़कर के हर कोई शिक्षक और शिक्षक नेता परेशान सा है आखिरकार यह आदेश कैसा है इस आदेश को लेकर के शिक्षा जगत में और बेसिक शिक्षा विभाग में तरह-तरह की चर्चाएं हो रही है इस संबंध में जब जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी सुनील दत्त से बात करने का प्रयास किया गया तो उन्होंने फोन नहीं उठाया फिलहाल इस नए आदेश को लेकर के हर तरफ चर्चा शुरू हो चुकी है कि आखिरकार माजरा क्या है।

अपना दल एस के जिलाध्यक्ष बने हिमांशु

एंकर-लोकसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी एवं उसके घटक दलों द्वारा जिला स्तर पर कार्यकर्ताओं को मजबूत किया जा रहा है ।इसी क्रम में भाजपा के घटक दल अपना दल एस ने भी मथुरा जनपद के जिला अध्यक्ष की घोषणा की है ।जिसमें हिमांशु चौधरी को अपना दल एस का जिला अध्यक्ष घोषित करते हुए लोकसभा चुनाव की तैयारी में जुट जाने के लिए कहा गया है ।दूरभाष पर हुई वार्ता के दौरान नवनिर्वाचित अपना दल एस के जिला अध्यक्ष हिमांशु चौधरी ने कहा कि वह पार्टी की रीति नीति को आगे बढ़ते हुए पूरी निष्ठा ईमानदारी के साथ अपने पद का निर्वहन करेंगे ।और जल्द ही जिले की कार्यकारिणी घोषित कर लोकसभा चुनाव में पार्टी के हाथ मजबूत करने का काम करेंगे।जो जिम्मेदारी उन्हें मिली है उस पर शीर्ष नियंत्रित का तहे दिल से धन्यवाद भी करते हैं। हर्ष व्यक्त करने वालों में वरुण प्रताप मानवेंद्र ठाकुर,मनोज शर्मा सौरभ कपिल उपमन्यु गोपाल गौतम सोनवीर परिहार मजीत चौधरी हरी रावत राकेश शास्त्री नरेन्द्र सिंह आदि

शिक्षण संस्थान युवा शक्ति को राष्ट्रसेवा की दें तालीमः प्रो. मोहन हेडेराजीव एकेडमी में टाकिंग एन अपाइंटमेंट विद योरसेल्फ पर कार्यशाला आयोजित

मथुरा। हमारी हर समस्या का समाधान हमारे पास है। ईश्वर निर्मित इस शरीर में ऐसी शक्ति है जिसके माध्यम से हमारे लिए हर वह कार्य सम्भव है जिसमें परोपकार और स्वयं की उन्नति दिन दूनी रात चौगुनी हो सकती है। भारतीय युवा पीढ़ी को विकास पथ पर आगे बढ़ना है तो उसे स्वयं की काबिलियत पर भरोसा होना बहुत जरूरी है। यह बातें राजीव एकेडमी में टाकिंग एन अपाइंटमेंट विद योरसेल्फ विषय पर आयोजित कार्यशाला में हार्टफुलनेस रिसर्च सेण्टर मैसूर के डायरेक्टर प्रो. मोहन हेडे ने छात्र-छात्राओं को बताईं।
प्रो. हेडे ने कहा कि हमारे देश में प्राचीन गुरुकुलों द्वारा छात्र-छात्राओं के जीवन दर्शन हेतु स्थापित मानदण्ड लुप्त हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि वैदिक युग में सर्टिफिकेट से अधिक महत्व छात्र-छात्राओं के स्किल्स को सुधारने पर दिया जाता था। गुरुकुल के आचार्य छात्र-छात्राओं को इस योग्य बनाते थे ताकि वे हर परेशानी का स्वयं निदान कर सकें। अफसोस की बात है कि आज हमारे देश के युवा सर्वाधिक डिप्रेसन का शिकार हो रहे हैं।
प्रो. हेडे ने कहा कि भारत में दुनिया की सबसे युवा आबादी है। विश्व में युवा शक्ति के बारे में भारत नम्बर वन है। भारत में लगभग 65 प्रतिशत युवा शक्ति मौजूद है। आवश्यकता है शिक्षण संस्थान इस महाशक्ति को राष्ट्रसेवा में लगाएं। प्रो. हेडे ने पश्चिमीकरण के अंधानुकरण को गलत बताते हुए कहा कि एक-एक युवा स्वयं में एक रेजीमेंट है। भारतीय सेना के जवानों की राष्ट्ररक्षा और राष्ट्रभक्ति की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि देश के युवाओं को सजग राष्ट्ररक्षक-राष्ट्रसेवक बनाने में एनएसएस, एनसीसी सहित योग शिक्षा महती भूमिका का निर्वहन करती है।
रिसोर्स परसन ने छात्र-छात्राओं से कहा कि वे स्वयं से परिचित हों तथा स्वयं की उपयोगिता को समझें। अपने कर्तव्य का पालन करें तथा दूसरे क्या कह रहे हैं इस पर बिल्कुल ध्यान नहीं दें। श्रीमद्भगवद्गीता का उदाहरण देते हुए उन्होंने चेताया कि हमारे आध्यात्मिक विज्ञान को विदेशी अपना कर आगे बढ़ रहे हैं परन्तु हम जानते हुए भी अनजान इसलिए हैं क्योंकि हम रट्टू तोता बने हुए हैं। जबकि हमें जानने के साथ-साथ करके भी दिखाना है। हम जो कहते हैं उस पर अमल नहीं करते।
प्रो. हेडे ने छात्र-छात्राओं से प्रैक्टिकल अप्रोच रखने का आह्वान किया। उन्होंने भारत के सभी शैक्षिक संस्थानों में योग केन्द्र की स्थापना कर भटकती युवा शक्ति को राष्ट्रसेवा में संलग्न करने की अपील की। अन्त में 15 मिनट का ध्यान योग व ध्यान समाधि के साथ ही कार्यशाला का समापन हुआ। संस्थान के निदेशक डॉ. अमर कुमार सक्सेना ने अतिथि वक्ता का आभार माना। छात्र-छात्राओं ने इस मोटिवेशनल कार्यशाला को बहुत उपयोगी बताया।

प्रेस नोट यातायात डायवर्जन

प्रत्येक वर्ष की भांति आगामी त्यौहार महाशिवरात्रि को दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 07.03.2024 से प्रातः 08.00 बजे से दिनांक 08.03.2024 को समय रात्रि 10.00 बजे तक यातायात व्यवस्था को सुगम एवं सुचारू रूप से चालाये जाने हेतु निम्न स्थानो पर वैरियर लगाकर डायवर्जन किया जायेगाः-

1.गोवर्धन चौराहा एवं मण्डी चौराहा से भूतेश्वर की ओऱ तथा थाना हाइवे कट से धौली प्याऊ की ओर एवं पुराना आरटीओ कट से शहर की ओऱ सभी प्रकार के कामर्शियल /भारी वाहन रोडवेज बसे, ट्रैक्टर को शहर की तरफ पूर्णतः प्रतिबन्धित रहेगे । रोडवेज बसे मालगोदाम रोड होकर बस स्टेड तक जा सकेगी तथा उसी रास्ते से वापस आ सकेगी ।
2.गोवर्धन चौराहा एवं मंण्डी चौराहा से ऑटो / ई-रिक्शा भूतेश्वर की ओर की ओर पूर्णतः प्रतिबन्धित रहेगे ।
3.मसानी चौराहा से भूतेश्वर की तरफ सभी प्रकार के कोमर्शियल तथा भारी वाहन नगर निगम की वसे, ट्रैक्टर , ऑटो / ई-रिक्शा आदि प्रतिबन्धित रहेगे ।
4.नये बस अड्डे से भूतेश्वर की ओर आने वाली रोडवेज व नगर निगम की बसे भूतेश्वर की ओर पूर्णतः प्रतिबन्धित रहेगी । ये सभी बसे मालगोदाम होकर अपने गनतव्य को जा सकेगी ।
5.स्टेट बैक चौराहा से सभी प्रकार के कॉमर्शियल /भारी वाहनो ट्रैक्टर , बडे टैम्पो / ई-रिक्शा आदि भूतेश्वर की ओर पूर्णतः प्रतिबन्धित रहेगे ।
6.कृष्णापुरी से सभी प्रकार के कोमर्शियल / भारी वाहनो को होलीगेट तथा टैंक चौराहा की तरफ पूर्णतः प्रतिबन्धित रहेगे ।
7.लक्ष्मी नगर से एन0सी0सी0 तिराहा की ओर सभी प्रकार के कोमर्शियल / भारी वाहनो को पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगे ।
8.टैक चौराहा से स्टेट बैक की ओर सभी प्रकार के कोमर्शियल /भारी वाहन ट्रैक्टर आदि पूर्णतः प्रतिबन्धित रहेगे ।
9.गोकुल बैराज मोड से टैक चौराहा की ओर सभी प्रकार के कॉमर्शियल / भारी वाहन ट्रैक्टर , बसे आदि को पूर्णतः प्रतिबन्धित रहेगे ।
10.गोकुल बैराज मोड से अलीगढ हाथरस को जाने वाले भारी वाहन लक्ष्मीनगर तिराहा की ओर पूर्णतः प्रतिबन्धित रहेगे यह वाहन गौशाला मोंड से महावन वल्देव, सादाबाद होते हुए अपने गन्तव्य को जा सकेगे ।
11.राया कट यमुना एक्सप्रेस-वे से मथुरा शहर की ओर सभी प्रकार के भारी वाहन पूर्णतः प्रतिबन्धित रहेगे ।
12.बिचपुरी चौकी से मथुरा शहर की ओर सभी प्रकार भारी वाहन पूर्णतः प्रतिबन्धित रहेगे ।

नोटः- फायर सर्बिस तथा एम्बूलेन्स जैसे आपात कालीन वाहनो को सभी प्रतिबन्धो से मुक्त रखा जायेगा ।

मथुरा में बैण्ड के साथ झाल उठाने वाले 16 बाल श्रमिको को लाइट के साथ चिन्हित किया गया

आज दिनांक 6/03/2023 को जनपद मथुरा में बैण्ड के साथ झाल उठाने वाले 16 बाल श्रमिको को लाइट के साथ चिन्हित किया गया। बाल श्रमिको का मुख्य चिकित्साधिकारी मथुरा द्वारा आयु परीक्षण की कार्यवाही अपनायी जा रही है। बाल श्रमिको द्वारा अवगत कराया गया कि वह प्रकाश बैण्ड भरतपुर गेट मथुरा के लिए काम कर रहे हैं। रेस्क्यू टीम में एम एल पाल सहायक श्रमायुक्त,राजेश दीक्षित अध्यक्ष बाल कल्याण समिति,एस पी पाण्डेय श्रम प्रवर्तन अधिकारी एवं ए एच टी यू प्रभारी कर्मवीर सिंह मौजूद रहे।

गिरिधर के अनुराग के रसरंग भीग रह्यो चहुँधा बरसानो…..

नारायण भट्ट ने शुरु कराई थी सबसे पहले लठामार होली

हुरियारिनों को दी शक्ति स्वरूपा की उपाधी

बरसाना की लठामार होली के दौरान नंदगांव के हुरियारों पर लट्ठ बरसाती हुरियारिन।

रिपोर्ट- राघव शर्मा, बरसाना

बरसाने की वाम…।’ लट्ठ धरे कंधा फिरे जबहि भगावत ग्वाल, जिमि महिषासुर मर्दिनी चलती रण में चाल। दक्षिण के मुदरैपट्टनम से आए श्रील नारायण भट्ट के वंशज हरीगोपाल भट्ट की नंदगांव बरसाना की लठामार होली पर सैकड़ों वर्ष पूर्व लिखी ये पंक्तियां सशक्त नारी के आधुनिक स्वरूप को दर्शाती हैं। विश्व प्रसिद्ध ब्रज की लठामार अपने आप में अनोखा पर्व है। यह पर्व न सिर्फ भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति का प्रतीक है बल्कि नारी सशक्तिकरण को भी दर्शाता है। फागुन शुक्ल की नवमीं को बरसाना में लठामार होली का आयोजन होता है।

राधाकृष्ण के प्रेम व अनुराग के रंग में रंगी बरसाना की लठामार होली वैसे तो विश्व विख्यात है लेकिन इस अद्भुत होली का शुभारंभ आज से साढ़े पांच सौ वर्ष पहले श्रील नारायण भट्ट ने नन्दगांव व बरसाना के ग्वाल वालों को साथ लेकर शुरु कराया था। वहीं श्रील नारायण भट्ट की सातवीं पीढ़ी में जन्में श्रील जानकी दास भट्ट ने लठामार होली को नया स्वरुप दिया। जिसमें उन्होंने नन्दगांव के हुरियारे व बरसाना की हुरियारिनों के मध्य लठामार होली का आयोजन कराया। नारायण भट्ट चरित्रामृत व रंग नाटक पुस्तक में श्रील जानकी दास भट्ट ने लठामार होली का जिक्र भी किया है। वहीं लाख बार अनुपम बरसानो पुस्तक में भी श्रील हरिगोपाल भट्ट ने बरसाना की लठामार होली का वर्णन किया है। जिसमें उन्होंने बरसाना की हुरियारिनों की तुलना शक्ति स्वरूपा से की है। आज भी नन्दगांव व बरसाना के लोग एक दूसरे को राधाकृष्ण का पूरक मानते है। आज भी प्राचीन परंपरा को निभाते हुए नन्दगांव के हुरियारे हाथ मे ढाल व सिर पर पाग, पीली बगलबंदी धारण किए बरसाना आते हैं। नन्दगांव के हुरियारों की टोली सबसे पहले बरसाना के पीली पोखर पर आती है। जहां बरसाना के लोग उनका आदर व सत्कार करते हैं। जिसके बाद हुरियारे लाडिली जी मंदिर जाते हैं जहां उन पर रंगों की बौछार होती है। अबीर गुलाल व रंग में सराबोर होकर हुरियारों की टोली रंगीली गली पहुचती है। जहां वह हुरियारिनों से हंसी ठिठोली करते हैं। इसी हास-परिहास के मध्य हुरियारिनें अपनी प्रेमपगी लाठियां हुरियारों पर बरसाती हैं।

वर्जन—
वैसे तो राधाकृष्ण की होली अनादिकाल से चली आ रही है लेकिन राधारानी की प्रेरणा से लठामार होली की सबसे पहले शुरुआत श्रील नारायण भट्ट ने नन्दगांव व बरसाना के ग्वालों को साथ लेकर शुरु कराई थी। जिसका वर्णन रंग नाटक पुस्तक व नारायण भट्ट चरित्रामृत में किया गया है। बाद में नंदगांव व बरसाना के पुरुष महिलाओं को समल्लित कर श्रील जानकी भट्ट जी ने इस होली को नया रूप सन 1757 में दिया था।
घनश्यामराज भट्ट प्रवक्ता
ब्रजाचार्य पीठ ऊंचागांव।

राधा रानी मंदिर का 12.66 लाख बकाया था बिल

सोशल मीडिया पर कनैक्शन काटने पर बिजली विभाग व प्रबंधको के खिलाफ रोष उत्पन्न हुआ था

रिपोर्ट राघव शर्मा

बरसाना। राधा रानी मंदिर का बिजली बिल एक वर्ष से 12.66 लाख बकाया बिल का भुगतान करने के आदेश कोर्ट ने बैंक को कर दिए हैं।
सिविल जज जूनियर की बेंच ने राधा रानी मंदिर के बकाया बिल की जानकारी बिजली विभाग के उपखंड अधिकारी से ली। जिसपर उपखण्ड अधिकारी संजय सिंह ने 15 फरवरी को सिविल जज जूनियर गौरव सिंह के समक्ष बकाया बिल 12.66 हजार का स्टीमेट दिया। उक्त स्टीमेट पर 4 मार्च को सिविल जूनियर जज गौरव सिंह लाड़लीजी मंदिर का खाता पंजाब नेशनल बैंक की शाखा बरसाना के शाखा प्रबंध को बकाया बिल का भुगतान करने के आदेश दिए। उपखंड अधिकारी संजय सिंह ने बताया कि कोर्ट का आदेश मिलने के बाद बैंक ने बकाया बिल का भुगतान कर दिया है।

शाखा प्रबंधक को बकाया बिजली बिल का भुगतान करने के आदेश कोर्ट ने दिए