Thursday, January 15, 2026
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स्टार वायर इंडिया ने चंद्रमा के बाद सूर्य से भी नाता जोड़ा

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मथुरा। देश ही नहीं विदेशों तक में अपनी धाक जमाने वाली कंपनी स्टार वायर इंडिया ने चंद्रमा को चूमने के बाद अब सूर्य से भी नाता जोड़ लिया है। यह कंपनी चंद्रमा की शीतलता का लुफ्त लेने के बाद अब सूर्य की गर्माई का भी आनंद लेगी।
     आदित्य एल-1 की सफल लॉन्चिंग में इसरो के साथ-साथ स्टार वायर इंडिया का भी योगदान है इसे नकारा नहीं जा सकता। क्योंकि चंद्रयान-3 और आदित्य एल-1 में जो स्टील का प्रयोग किया गया था वह स्टार वायर इंडिया की ही देन है। अंतरिक्ष में जाने वाले राकेटों के लिए यह खास स्टील स्टार वायर इंडिया कंपनी के वैज्ञानिकों द्वारा अनुसंधान के बाद तैयार की जाती है।
     इसरो से स्टार वायर इंडिया का करार है जिसके तहत अंतरिक्ष में जाने वाले सभी राकेटों का कवच व अन्य सामान उन्हीं के यहां तैयार की गई खास स्टील का होता है। स्टार वायर इंडिया द्वारा इतनी अच्छी क्वालिटी की स्टील इसरो को निर्यात किए जाने के लिए इसरो के डिप्टी डायरेक्टर द्वारा पत्र लिखकर स्टार वायर इंडिया के अध्यक्ष महेंद्र कुमार गुप्ता व पूरी टीम को चंद्रयान-3 की सफलता के बाद धन्यवाद दिया जा चुका है।


     उल्लेखनीय है कि स्टार वायर इंडिया कंपनी फरीदाबाद के बल्लभगढ़ में स्थित है। महावर वैश्य समाज की विभूति सेठ सीताराम गुप्ता इसके संस्थापक हैं। उन्होंने लगभग पांच दशक पूर्व इस कंपनी की स्थापना की थी। सेठ सीताराम जी वर्तमान अध्यक्ष महेंद्र कुमार गुप्ता के पिता हैं।
     ज्ञात रहे स्टार वायर इंडिया कंपनी की धाक न सिर्फ देश में वल्कि विदेशों तक में है। ब्रह्मोस मिसाइल का पूरा ढांचा इसी कंपनी में तैयार किया गया है। यही नहीं एशिया में सबसे पहले बुलेट प्रूफ कार व बुलेट प्रूफ जैकेट इसी कंपनी में बननी शुरू हुई थीं। आज भी इस कंपनी में बनी बुलेट प्रूफ जैकेट भारी मात्रा में विदेशों में निर्यात की जाती हैं। इस कंपनी में हवाई जहाज, रेल, सेना आदि के लिए तमाम सामान की सप्लाई की जाती है।
     सेठ सीताराम गुप्ता मथुरा से जुड़े हुए हैं। उनकी ससुराल मंडी रामदास स्थित बिन्दीमल श्रीनाथ शोरा वालों के यहां है तथा स्वतंत्रता सेनानी एवं समाजसेवी लाला नवल किशोर गुप्ता उनके मौसा जी हैं। सेठ सीताराम गुप्ता आज 91 वर्ष की उम्र में भी सक्रिय हैं। उनकी दानशीलता किसी से छिपी नहीं है। वे अंतर्मुखी तथा प्रसार प्रचार से दूर रहने वाले दुर्लभ स्वभाव के व्यक्ति हैं।
     चंद्रयान- 3 व आदित्य एल-1 की सफलता के बाद सेठ सीताराम गुप्ता व कंपनी के अध्यक्ष महेंद्र कुमार गुप्ता को चारों ओर से बधाइयां मिल रही हैं। लोगों का कहना है कि सेठ सीताराम द्वारा देश की जो सेवा की जा रही है वह बेमिसाल है। वे देश की शान हैं, ईश्वर उन्हें शतायु करें।

सफलता का मूलमंत्र है समय और अनुशासनः डॉ. आर.के. अशोका

के.डी. मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस-2023 सत्र का शुभारम्भ
ओरिएंटेशन कार्यक्रम में नवागंतुक छात्र-छात्राओं को दी अनुशासन की सीख

मथुरा। हमारा समाज चिकित्सक को भगवान तुल्य मानता है लेकिन यह तभी सम्भव है, जब हम एक अच्छे और कुशल चिकित्सक के रूप में पीड़ित मानवता की सेवा करें। जीवन का हर क्षण अमूल्य है। जो छात्र समय के मूल्य को पहचानते हैं वही सफलता के शिखर पर पहुंचते हैं। समय का मूल्य भी अनुशासन में रहकर ही समझ में आता है। उक्त उद्गार शुक्रवार को के.डी. मेडिकल कॉलेज के सभागार में आयोजित ओरिएंटेशन कार्यक्रम में प्राचार्य डॉ. आर.के. अशोका ने एमबीबीएस के नवागंतुक छात्र-छात्राओं और अभिभावकों को सम्बोधित करते हुए व्यक्त किए।
मां सरस्वती की वंदना और दीप प्रज्वलित करने के बाद प्राचार्य डॉ. अशोका ने कहा कि छात्र जीवन में अनुशासन का बहुत महत्व है। अनुशासन में रहकर एक साधारण विद्यार्थी भी सफलता के शिखर पर पहुंच सकता है। डॉ. अशोका ने अपने सम्बोधन में सभी अभिभावकों से आग्रह किया कि यदि वह अपने बच्चे को कुशल चिकित्सक बनाने का सपना देख रहे हैं तो उनका यह दायित्व है कि उसकी हर गतिविधि पर नजर रखें। डॉ. अशोका ने नवागंतुक छात्र-छात्राओं तथा अभिभावकों को आर.के. एज्यूकेशनल ग्रुप के सभी शैक्षिक संस्थानों के साथ ही के.डी. मेडिकल कॉलेज की उपलब्धियों तथा शैक्षिक और प्रयोगात्मक गतिविधियों की भी विस्तार से जानकारी दी।
महाप्रबंधक अरुण अग्रवाल ने कहा कि के.डी. मेडिकल कॉलेज में प्राध्यापकों द्वारा प्रत्येक छात्र एवं छात्रा को सही मार्गदर्शन देने के साथ उनमें नैतिक एवं भावनात्मक बदलाव लाने के प्रयास किए जाते हैं। मेडिकल के प्रत्येक छात्र-छात्रा को समय की कीमत पहचानते हुए नियमित रूप से कक्षाओं में जाने के साथ ही प्राध्यापकों द्वारा दिए गए सुझावों पर अमल करना चाहिए। उप महाप्रबंधक मनोज गुप्ता ने कहा कि के.डी. मेडिकल कॉलेज में प्रत्येक छात्र-छात्रा को पारिवारिक माहौल देने की कोशिश की जाती है। श्री गुप्ता ने अभिभावकों और छात्र-छात्राओं का आह्वान किया कि के.डी. मेडिकल कॉलेज-हॉस्पिटल एवं रिसर्च सेण्टर को अपना परिवार समझें। संस्थान में किसी भी छात्र-छात्रा को कोई परेशानी नहीं होगी। अंत में शिशु शल्य विशेषज्ञ डॉ. श्याम बिहारी शर्मा ने सभी छात्र-छात्राओं को अनुशासन और चिकित्सकीय नैतिकता की शपथ दिलाई। इस अवसर पर अभिभावकों और नवागंतुक छात्र-छात्राओं ने एम.बी.बी.एस. की पढ़ाई के लिए के.डी. मेडिकल कॉलेज के चयन पर भी अपने विचार बताए।
ओरिएंटेशन कार्यक्रम के संयोजक डॉ. अभी भूषण मिश्रा ने छात्र-छात्राओं का उत्साहवर्धन करते उन्हें कुशल चिकित्सक बनने की शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर विभागाध्यक्षों डॉ. वी.पी. पाण्डेय, डॉ. फतेह मोहम्मद, डॉ. मंजू पाण्डेय, डॉ. लीना गोयल, डॉ. के.पी. दत्ता, डॉ. शालिनी गांधी, डॉ. प्रणीता सिंह, लाइब्रेरियन डालचंद गौतम आदि ने नवागंतुक छात्र-छात्राओं को अपने-अपने विभागों की जानकारी दी। कार्यक्रम का संचालन रिया सिंह, रूपेश कुमार वर्मा, शुभ गोयल तथा साक्षी जैन ने किया। आभार डॉ. प्रणीता सिंह ने माना।

जीएलए के बायोटेक विभाग को मिला बड़ा प्रोजेक्ट

पशुओं की लाइलाज प्रमुख रोग जोन्स बीमारी की रोकथाम हेतु इंजेक्शन टीके की तर्ज पर ‘ओरल टीका‘ बनाने हेतु डीबीटी-बाईरैक द्वारा एक बड़ा प्रोजेक्ट बायोटेक विभाग को दिया गया
-पहले भी बायोटेक के विभागाध्यक्ष प्रो. शूरवीर एवं उनकी टीम के द्वारा इंजेक्शन के माध्यम से लगने वाला टीका तैयार कर चुके हैं, जो कि एक वंडर टीके की श्रेणी में आता है
-ओरल टीका भी पशुओं की जाॅन्स डिजीज नामक लाइलाज रोग के उपचार एवं रोकथाम में मिल का पत्थर साबित होगा

मथुरा : एक के बाद एक बड़ी उपलब्धि हासिल कर जीएलए विश्वविद्यालय, मथुरा के बायोटेक विभाग ने जोहन्स रोग पर शोध में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी छाप छोड़ी है। विभाग की इन्हीं उपलब्धियों को मद्देनजर रखते हुए भारत सरकार के डीबीटी-बाईरैक स्कीम के माध्यम से एक नया प्रोजेक्ट मिला है। इस प्रोजेक्ट के माध्यम से जीएलए का बायोटेक विभाग पशुओं में उत्पन्न होने वाली जाॅन्स बीमारी से बचाव व उपचार के लिए ‘ओरल वैक्सीन‘ यानि ‘मौखिक टीका‘ तैयार करेगा।

विदित रहे कि घरेलू पशुओं की पैराट्यूबरकुलोसिस (पीटीबी) नामक अत्यधिक व्यापक संक्रामक बीमारी के खिलाफ ‘ओरल वैक्सीन‘ विकसित करने के लिए यह परियोजना दी गई है। रोग को जॉन्स रोग (जेडी) के रूप में भी जाना जाता है, यह गाय, भैंस, बकरी, भेड़, ऊंट, याक आदि की एक लाइलाज बीमारी है। यह पाचन और प्रतिरक्षा प्रणाली दोनों को नुकसान पहुंचाती है। इस संक्रमण से पषु को दीर्घकालिक दस्त और वजन कम हो जाता है और पशु एक या दो प्रसव के भीतर अनुत्पादक हो जाता है। ऐसे संक्रमित पशुओं के दूध को मनुष्यों द्वारा सेवन करने पर यह संक्रमण मनुष्यों में तथा पशुओं की आने वाली अगली पीढ़ी में संचारित होता रहता है।
यह भी कह सकते हैं कि यह एक दूध के माध्यम से पशुओं की अगली पीढ़ी तथा मनुष्यो में फैलने वाले संक्रमण को रोकने के लिए ही जीएलए बायोटेक विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. शूरवीर सिंह के नेतृत्व में बायोटेक टीम पहले ही इंजेक्शन के रूप में एक अत्यधिक प्रभावी टीका जाॅन्स रोग के विरूद्ध विकसित कर चुकी है। यह टीका बायोवेट मालर बैंगलोर कंपनी के साथ मिलकर बनाया गया था और जिसमें 2008 से 2014 तक के 6 वर्षों के अथक प्रयासों से निर्मित किया गया एवं डीसीजीआई भारत सरकार द्वारा मान्यता भी दी गई थी। भारत बायोवेट के प्रमुख डाॅ. इल्ला इस प्रोजेक्ट में पूरी तरह से सम्मिलत थे। यह डाॅ. इल्ला वही व्यक्ति हैं जिन्होंने, कोविड़-19 हेतु को-वैक्सीन बनाई, अपनी दूसरी कंपनी भारत बायोवेट के द्वारा जो कि हैदराबाद में स्थित है। उन्होंने ने जोन्स रोग के टीका बनाने की विधि की तर्ज पर ही कोविड वैक्सीन बनाई है, जिसमें उनको जोन्स रोग के टीके के अनुभव का पूरा लाभ मिला।

चूंकि देश में 500 मिलियन से अधिक घरेलू पशुधन है, जो कि बहुत कम दूध व मास उत्पादक है। इस कम उत्पादकता का मुख्य कारण केवल भारत में ही नहीं अपितु विश्व स्तर पर घरेलू पशुधन आबादी में इस रोग का अत्याधिक संक्रमण है। इसलिए प्रत्येक जानवर को हर वर्ष या तीन वर्ष में एक बार (पशुओं की स्वास्थ्य स्थिति के आधार पर) इंजेक्शन लगाना संभव नहीं है। इस बड़ी समस्या को देखते हुए टीम ने उपयोगकर्ता के अनुकूल ‘ओरल वैक्सीन‘ का विचार प्रस्तावित किया है, ताकि किसान निर्देशों के अनुसार अपने जानवरों को मौखिक रूप से टीकाकरण कर सकें। इस वैक्सीन को 18 महीने के रिकॉर्ड समय में बनाकर बाजार में लाने की एक बड़ी चुनौती है।

विभागाध्यक्ष प्रो. शूरवीर सिंह ने बताया कि डीबीटी-बाईरैक के माध्यम से मिले प्रोेजेक्ट के तहत तैयार की जाने वाली यह ‘ओरल वैक्सीन‘ (टीका) एक पोलियो रोग के टीके की तरह है। इस वैक्सीन को पशु को मुंह के माध्यम से दिया जायेगा। टीका भी चिकित्सीय प्रकृति का होगा और अनुत्पादक पशुओं की उत्पादकता में सुधार करके उन्हें किसानों के लिए उपयोगी बना देगा। उन्होंने बताया कि इस प्रोजेक्ट पर कार्य करने के लिए 38 लाख की राशि जारी हुई है। इसमें पीएचडी के विद्यार्थियों का भी सहयोग लिया जायेगा।

जीएलए प्रबंधन ने बायोटेक विभाग की इस उपलब्धि की सराहना की है और जीएलए विश्वविद्यालय पर विचार करने और विश्वविद्यालय की अनुसंधान क्षमता में विश्वास जताने के लिए डीबीटी बाईरैक को धन्यवाद दिया है।

संस्कृति विवि ने नार्म हैदराबाद के साथ किया महत्वपूर्ण समझौता

मथुरा। संस्कृति विश्वविद्यालय ने कृषि और संबद्ध विज्ञान और प्रबंधन के अत्याधुनिक क्षेत्रों में छात्रों के प्रशिक्षण और गुणवत्ता स्नातकोत्तर अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए आईसीएआर- राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रबंधन(एनएएआरएम) अकादमी हैदराबाद के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं।
संस्कृति विश्वविद्यालय के कुलपति डा. एमबी चेट्टी और एनएएआरएम हैदराबाद की ओर से डा. सीएच. श्रीनिवासराव ने इस समझौते को एक कार्यक्रम में हस्ताक्षर कर अमलीजामा पहनाया। हैदराबाद संस्थान(नार्म) के निदेशक सीएच श्रीनिवासराव के साथ संस्थान के सयुंक्त निदेशक डा. जी वेंकटेश्वरलू भी इस समझौते में सयुंक्त रूप से शामिल हुए। संस्कृति विश्वविद्यालय के कुलपति डा.एमबी चेट्टी ने बताया कि इस समझौते के अनुसार संकाय और छात्रों के आदान-प्रदान कार्यक्रमों के लिए राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों के साथ द्विपक्षीय सहयोग विकसित करने, संयुक्त अनुंसंधान प्रस्ताव विकसित करने और दाखिल करने की दिशा में कार्य किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि संस्कृति विश्वविद्यालय के चांसलर डा. सचिन गुप्ता के द्वारा ली गई रुचि के अनुरूप यह महत्वपूर्ण समझौता मूर्त ले सका है। उन्होंने निदेशक एनएएआरएम के प्रयासों की भी सराहना की जिन्होंने प्रस्ताव पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। दोनों संस्थानों के बीच समझौता ज्ञापन शिक्षा के उद्देश्य को आगे बढ़ाने के लिए संकाय को पारस्परिक रूप से आकर्षित करने में सुविधा प्रदान करेगा। इसका उद्देश्य एनएएआरएम में संस्कृति विश्वविद्यालय के सभी संकायों को उसके विभिन्न चल रहे कार्यक्रमों के लिए प्रशिक्षित करना है। दोनों संकाय विभिन्न संकाय विकास कार्यक्रमों में सहयोग करेंगे।
डॉ. एम.बी. चेट्टी ने प्रोफेसर जयशंकर तेलंगाना राज्य कृषि विश्वविद्यालय, हैदराबाद के अपनी तरह के पहले इनोवेशन हब, एगहब का भी दौरा किया और मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं डॉ. विजय नंदिमंती के साथ चर्चा की। कल्पना शास्त्री, प्रबंध निदेशक ने छात्र उद्यमिता कार्यक्रमों और एग्रीटेक स्टार्टअप्स के लिए एगहब के साथ संस्कृति विश्वविद्यालय के संभावित सहयोग के बारे में बताया।

वैदिक ऋचाओं के मंत्रोच्चारण से हवन कर मनाया गया संस्कृत दिवस

प्राचीन संस्कृत धर्मग्रंथों का किया गया पूजन

संस्कृत भारती ब्रज प्रान्त मथुरा महानगर एवं श्री दीर्घ विष्णु मंदिर सेवा संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में श्रावण पूर्णिमा को भरतपुर गेट घीया मंडी स्थित प्राचीन श्री दीर्घ विष्णु मंदिर में संस्कृत दिवस वैदिक विधि विधान से हवन व संस्कृत धर्मग्रंथों का पूजन कर मनाया गया।
इस अवसर पर सर्व प्रथम भगवान श्री दीर्घ विष्णु जी के सम्मुख अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। वैदिक विद्वान आचार्य देवदत्त चतुर्वेदी देवो पंडित एवं आचार्य मुरलीधर चतुर्वेदी, पंडित गौरव दीक्षित द्वारा सस्वर सामूहिक स्वस्तिवाचन किया गया। इसके पश्चात संस्कृत भारती शिक्षण प्रमुख आरती राजपूत व दीपांशी अग्रवाल द्वारा ध्येय मंत्र का पाठ किया गया। ज्योतिषाचार्य पंडित कामेश्वर नाथ चतुर्वेदी द्वारा वैदिक व पौराणिक मंगलाचरण प्रस्तुत किया गया।
यज्ञाचार्य पंडित देवदत्त चतुर्वेदी द्वारा चारों वेदों की ऋचाओं के मंत्रोच्चारण एवं पुरुष सूक्त व श्री सूक्त से सामूहिक हवन पूजन करवाया गया जिसमें सभी ने आहूति देकर पुण्य लाभ प्राप्त किया।
इसके बाद विद्वत गोष्ठी का आयोजन श्री दीर्घ विष्णु मंदिर सेवा संस्थान के अध्यक्ष एवं दीर्घ विष्णु मंदिर के सेवायत महन्त श्री कान्तानाथ चतुर्वेदी की अध्यक्षता में किया गया जिसमें प्रमुख रूप से संस्कृत भारती ब्रज प्रान्त मंत्री डॉ धर्मेन्द्र कुमार अग्रवाल ने संस्कृत भारती के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मथुरा महानगर सहकार्यवाह विजय अग्रवाल बंटा व विश्व हिन्दू परिषद के जिलाध्यक्ष विनोद राघवजी ने संस्कृत भाषा को विश्व की सबसे प्राचीन भाषा बताते हुए कहा कि विश्व के अनेक देशों में संस्कृत भाषा के प्रति आकर्षण बढ़ रहा है।
इस अवसर पर संस्कृत भारती ब्रज प्रान्त न्यास अध्यक्ष ओमप्रकाश बंसल व ब्रज प्रान्त संगठन मंत्री नरेन्द्र भागीरथी ने कहा कि वर्तमान में संस्कृत भाषा को विश्व के अनेक देशों में ज्ञान व विज्ञान की भाषा के रूप में स्वीकार किया जा रहा है।
गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए दीर्घ विष्णु मंदिर के सेवायत महन्त कान्तानाथ चतुर्वेदी ने कहा कि भारतीय संस्कृति, सभ्यता और परम्पराओं को सुरक्षित रखना है तो संस्कृत का अभ्यास अवश्य करना चाहिए। उन्होंने संस्कृत दिवस पर सभी को हार्दिक शुभकामनाएं प्रेषित कीं
कार्यक्रम का संचालन करते हुए संस्कृत भारती ब्रज प्रान्त मथुरा महानगर अध्यक्ष आचार्य ब्रजेन्द्र नागर ने सभी भारतीय धर्मपरायण जन मानस के लिए, संस्कृत दिवस, श्रावणी महापर्व, गायत्री जयंती, रक्षाबंधन की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भारत में संस्कृत दिवस सर्वप्रथम सन् 1969 में भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के आदेश पर राष्ट्रीय व प्रदेश स्तर पर मनाया गया उन्होंने कहा संस्कृत भाषा विश्व की सबसे प्राचीनतम भाषा है। हमारे प्राचीन धर्मग्रंथ भी संस्कृत भाषा में लिखे गए हैं।
संस्कृत भारती ब्रज प्रान्त मथुरा महानगर प्रचार प्रमुख रामदास चतुर्वेदी शास्त्री ने अंत में धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कहा कि भविष्य में संस्कृत भाषा विशेषज्ञों की मांग तेजी से वैज्ञानिक और भाषा के क्षेत्र में बढ़ेगी देश-देशांतर में आज युवक युवतियों के मध्य संस्कृत भाषा के प्रति निरंतर रूचि बढ रही है।
संस्कृत भारती द्वारा चलाएं जा रहे संस्कृत संभाषण के शिविरों में उत्साह और उमंग के साथ जन मानस की उपस्थिति दिन प्रतिदिन बढ रही है।संस्कृत दिवस के उपलक्ष्य में संस्कृत सप्ताह मनाया जायेगा जिसमें विभिन्न प्रतियोगिताएं व गोष्ठियों का आयोजन किया जाएगा।
इस अवसर पर प्रमुख रूप से संस्कृत भारती ब्रज प्रान्त न्यास सचिव गंगाधर अरोड़ा, कार्यालय प्रमुख हरस्वरुप यादव, पत्राचार प्रमुख गणेश शंकर पाण्डेय, योगेश उपाध्याय आवा, बालकृष्ण चतुर्वेदी, लालकृष्ण चतुर्वेदी, विश्व हिन्दू परिषद जिला संपर्क प्रमुख योगेश गौतम, सरदार राजेन्द्र सिंह होरा, संजय आदि भारी संख्या में उपस्थित संस्कृत भारती ब्रज प्रान्त मथुरा महानगर एवं श्री दीर्घ विष्णु मंदिर सेवा संस्थान के पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं ने सभी को श्रावणी उपाकर्म, रक्षाबंधन व विश्व संस्कृत दिवस पर हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए संस्कृत भाषा को जन जन की भाषा बनाने का आव्हान किया।
कार्यक्रम का समापन सामूहिक रूप से कल्याण मंत्र के साथ किया गया।
कार्यक्रम के पश्चात् प्रसाद वितरण किया गया और सभी को संस्कृत दिवस की मंगलमय शुभकामनाएं प्रेषित की गई।

गायत्री तपोभूमि के तीन बुजुर्गों ने लिया देहदान का निर्णय

के.डी. मेडिकल कॉलेज के एनोटॉमी विभाग में भरे संकल्प पत्र

मथुरा। जीवन अमूल्य है, यदि मृत्यु के बाद भी यह किसी के काम आए तो इससे बड़ी बात और क्या हो सकती है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए गायत्री तपोभूमि मथुरा के तीन बुजुर्गों जगदीश प्रसाद श्रीवास्तव (90), गोपाल कृष्ण चतुर्वेदी (85) तथा महिपाल प्रजापति (75) ने के.डी. मेडिकल कॉलेज-हॉस्पिटल एण्ड रिसर्च सेण्टर पहुंच कर देहदान का न केवल निर्णय लिया बल्कि खुशी-खुशी संकल्प पत्र भी भरे।
सोमवार को गायत्री तपोभूमि मथुरा के तीन वयोवृद्ध के.डी. मेडिकल कॉलेज के डीन और प्राचार्य डॉ. आर.के. अशोका से मिले तथा देहदान की इच्छा जताई। इन बुजुर्गों ने बताया कि उनके लिए कुसुमलता प्रेरणा बनी हैं। दरअसल, कुछ माह पहले एच-210, कृष्णा ग्रीन छटीकरा रोड, वृंदावन बांगर निवासी कुसुमलता (59) ने के.डी. मेडिकल कॉलेज में देहदान का संकल्प पत्र भरा था। समाचार पत्रों में कुसुमलता के साहसिक फैसले की खबर प्रकाशित हुई थी, उसे पढ़कर ही इन तीनों बुजुर्गों ने भी देहदान का निर्णय लिया है। देहदान का संकल्प लेने वाले इन बजुर्गों का कहना है कि मरने के बाद इंसान की देह तो मिट्टी हो जाती है, यदि यह मिट्टी भी किसी के काम आए, तो इससे बड़ी समाजसेवा क्या होगी।
आर.के. एज्यूकेशनल ग्रुप के अध्यक्ष डॉ. रामकिशोर अग्रवाल तथा प्रबंध निदेशक मनोज अग्रवाल ने देहदान का संकल्प लेने वाले तीनों बुजुर्गों के संकल्प की सराहना करते हुए कहा कि इससे दूसरे लोगों को भी प्रेरणा मिलेगी। डॉ. अग्रवाल ने कहा कि आज के समय में सबसे बड़ा दान शिक्षा दान है, इसके बाद देहदान है। मृत शरीर भावी चिकित्सकों के रिसर्च में काफी मददगार होता है।
डीन डॉ. आर.के. अशोका का कहना है कि मृत देह मेडिकल छात्र-छात्राओं के शोध में काम आती है। हमारे समाज में देहदान के प्रति जागरूकता का अभाव होने से इसका सीधा असर चिकित्सा शिक्षा पर पड़ रहा है। डॉ. अशोका ने तीनों बुजुर्गों के निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि इससे बेहतर चिकित्सक तैयार करने में मदद मिलेगी क्योंकि मेडिकल ऑपरेशन में जब भी कोई नई तकनीक आती है, तो उसे सीखने और प्रैक्टिकल कर देखने के लिए मृत मानव देह जरूरी होती है।
डॉ. अशोका ने कहा कि यदि कोई भी व्यक्ति देहदान करना चाहता है तो उसे के.डी. मेडिकल कॉलेज के एनोटॉमी विभागाध्यक्ष के नाम लिखित में आवेदन करना होगा। एनोटॉमी विभाग की ओर से ऐसे दानवीर को दो पेज का फार्म निःशुल्क दिया जाता है। इस फार्म में देहदान करने वाले व्यक्ति का नाम, पता, उत्तराधिकारी का नाम तथा दो विटनेस का होना जरूरी है।

राहुल और तनु बने क्रॉस कंट्री चैंपियन

जीएलए में मेजर ध्यानचंद के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में खेल दिवस पर आयोजित हुई विभिन्न खेल प्रतियोगिताएं

मथुरा : भारत एवं विश्व हॉकी के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में खेल दिवस पर जीएलए विश्वविद्यालय, मथुरा ने क्राॅस कंट्री सहित विभिन्न खेल प्रतियोगिताएं आयोजित कीं। क्राॅस कंट्री में छात्र महिला एवं पुरुष वर्ग के साथ-साथ विश्वविद्यालय के स्टाफ की सहभागिता रही।

प्रतियोगिता में लगभग 200 प्रतिभागियों ने प्रतिभाग किया। स्टाफ इवेंट कोऑर्डिनेटर एथलेटिक्स कोच भूपेन्द्र मिश्रा के अनुसार बालक वर्ग क्रॉस कंट्री दौड़ में राहुल कुमार ने प्रथम, सोमवीर सिंह ने द्वितीय, देवेश ने तृतीय, आकाश सिंह ने चतुर्थ, साहिल कुमार पांचवें स्थान पर रहे।
छात्र महिला वर्ग में तनु कुमारी ने प्रथम, खुशी शर्मा ने द्वितीय, अंशिका रावत ने तृतीय, भव्य गोयल ने चतुर्थ, प्रियांशी बंसल पांचवें स्थान पर रहीं। वहीं स्टाफ पुरुष वर्ग में देवांश शर्मा ने प्रथम, गौरव सिंह ने द्वितीय, जितेंद्र पाल सिंह ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। स्टाफ महिला वर्ग में डा. शिल्पी पाठक ने प्रथम, रितु जाट ने द्वितीय, सोनिका ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।

इससे पूर्व मुख्य अतिथि डीन स्टूडेंट वेलफेयर डा. हिमांशु शर्मा, डॉ नवीन, डा. अजीतेष कुमार एवं उत्तम गोस्वामी ने संयुक्त रूप से क्रॉस कंट्री दौड़ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। सभी अतिथियों का माला, पटुका, साफा पहनाकर स्वागत किया गया।

इस दौरान मुख्य अतिथि डा. हिमांशु शर्मा ने मेजर ध्यान चंद की सफलताओं के बारे में छात्र-छात्राओं को जानकारी दी। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को हर कठिनाई से लड़कर आगे बढ़ने सीख लेनी चाहिए। क्योंकि जीवन में तमाम असफलताएं आतीं हैं, जो कि सफलता के मार्ग को अत्यधिक सरलता की ओर ले जाती हैं। इसलिए हम सभी को मेजर ध्यानचंद के पदचिन्हों पर चलने की सीख लेनी चाहिए।

उन्होंने बताया कि इस अवसर पर कई खेल प्रतियोगिताओं में छात्र-छात्राओं ने प्रतिभाग कर अपनी प्रतिभा को दर्शाया है। चैस चैंपियनशिप भी देर सायं तक जारी रही। चैस चैंपियनशिप पर कब्जा पाने के लिए छात्र एक दूसरे के साथ कश्मकश में जुटे रहे।

विजेता खिलाड़ियों को ट्रॉफी, सर्टिफिकेट, मेडल देकर सम्मानित किया गया। इस मौके पर विश्वविद्यालय के कोच जेपी सिंह, अमित कुमार शर्मा, बृज बिहारी सिंह, श्याम नारायण राय, आशीष राय, राहुल उपाध्याय, हरिओम शुक्ला, आकाश कुमार, सोनिका, रितु जाट, सौरव गुप्ता, मुकेश कुमार, छात्र इवेंट कोऑर्डिनेटर अभिषेक कुमार, भारत सिंह, अथर्व गुप्ता, मृदुल, अरमान उपाध्याय, आलोक कुमार, दीपक सिंह, गौरव, धु्रव शक्ति रावत, पारस, नीरज राघव, ग्राउंडमैन चुरा सिंह, शेर सिंह, लाल सिंह, विज्जो आदि का विशेष सहयोग रहा।

राष्ट्रीय खेल दिवस पर आरआईएस के छात्र-छात्राओं ने दिखाया दम

हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद को उनकी जयंती पर किया नमन

मथुरा। मंगलवार को राजीव इंटरनेशनल स्कूल में राष्ट्रीय खेल दिवस पर छात्र-छात्राओं ने विभिन्न खेलों में अपना शानदार कौशल और दमखम दिखाया। खेल प्रतियोगिताओं के शुभारम्भ से पूर्व छात्र-छात्राओं ने हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद के छायाचित्र पर श्रद्धासुमन अर्पित किए। इस अवसर पर शारीरिक शिक्षकों ने छात्र-छात्राओं को मेजर ध्यानचंद के कृतित्व और व्यक्तित्व की जानकारी दी।
राजीव इंटरनेशनल स्कूल में मंगलवार को मेजर ध्यानचंद की 118वीं जयंती राष्ट्रीय खेल दिवस के रूप में मनाई गई। इस अवसर पर शारीरिक शिक्षकों लोकपाल सिंह राणा, राहुल सोलंकी, निशांत शर्मा और सोनिका वर्मा की देखरेख में छात्र-छात्राओं ने विभिन्न खेल स्पर्धाओं रस्साकशी, शॉटपुट, फुटबॉल, एथलेटिक्स, खो-खो आदि प्रतियोगिताओं में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। कक्षा एक से पांच तक के छात्र-छात्राओं के बीच दौड़ प्रतियोगिता आयोजित की गई।
आर.के. एज्यूकेशनल ग्रुप के अध्यक्ष डॉ. रामकिशोर अग्रवाल ने सभी को राष्ट्रीय खेल दिवस की बधाई देते हुए कहा कि विद्यार्थी जीवन में शिक्षा के साथ-साथ खेलकूद का भी बहुत महत्व है। खेलों से तन-मन स्वस्थ रहता है। डॉ. अग्रवाल ने कहा कि मेजर ध्यानचंद ने हमारे देश को खेलों में उस समय गौरवान्वित किया जब हमारा राष्ट्र गुलामी की जंजीरों में जकड़ा हुआ था। हॉकी में दद्दा ध्यानचंद के जादुई खेल की तो एडोल्फ हिटलर तक ने तारीफ की थी।
प्रबंध निदेशक मनोज अग्रवाल ने हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद को महान खिलाड़ी मानते हुए छात्र-छात्राओं का आह्वान किया कि वे शिक्षा के साथ-साथ प्रतिदिन कुछ समय खेलों को भी दें। इससे न केवल तन-मन स्वस्थ रहेगा बल्कि राष्ट्र भी गौरवान्वित होगा। श्री अग्रवाल ने कहा कि खेल अब समय की बर्बादी नहीं बल्कि करिअर को नया मुकाम देने का माध्यम भी हैं। विद्यालय की शैक्षिक संयोजिका प्रिया मदान ने विद्यार्थियों को बेहतरीन प्रदर्शन पर बधाई दी और कहा कि छात्र-छात्राएं खेलों को जीवन का हिस्सा बनाएं।

संस्कृति विवि में व्यक्तित्व विकास पर हुई उपयोगी सेमिनार

मथुरा। संस्कृति विश्वविद्यालय में आयोजित एक महत्वपूर्ण सेमिनार, ‘ट्रेन द मसल आफ ब्रेन’ में विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए मुख्य विशेषज्ञ वक्ता बबल चेट्टी ने कहा कि नकारात्मकता अनेक बीमारियों को जन्म देती है। सकारात्मकता से हम अपने लक्ष्य को हासिल कर सकते हैं। सकारात्मकता से राह में आने वाले रोड़े हट जाते हैं और सफलता हासिल हो जाती है।
अपने बहुउपयोगी संबोधन में उन्होंने बताया कि किस तरह से हम अपने आपको खुश रख सकते हैं। उन्होंने कहा कि हर किसी को दुखी रहने वाला व्यक्ति अच्छा नहीं लगता। सबको अच्छा बोलने वाले, खुश रहने वाले लोग अच्छे लगते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों के साथ सवाल-जवाब करते हुए कहा कि आज बहुत ज्यादा सोचना सारे विश्व की समस्या बन चुकी है। इस समस्या से निजात कैसे पाया जा सकता है, यह जानना सबके लिए जरूरी है। हर बात पर नकारात्मक बनना, चिंता करना, अपने पर भरोसा न करना, तनाव लेना आपकी राह के रोड़े हैं। उन्होंने कहा कि यह सब हमारी मानसिक दशा पर निर्भर करता है। हमें वह मानसिक मजबूती हासिल करनी है जिससे हम इन रुकावटों पर विजय पा सकें। बहुत ज्यादा विचार करने से हमारा ध्यान भंग होता है, बहुत ज्यादा विचार करना कैसे कम हो, इसी को सीखना है। सबसे पहले विद्यार्थी अपनी विचारधारा को बदलें। अपने ध्येय को पाने के लिए प्रसन्न रहने की कोशिश करें और सकारात्मक सोच के साथ काम को अंजाम दें, सफलता हासिल हो जाएगी। नकारात्मक विचार हमारी सफलता के लिए रोड़ा हैं, इसलिए उनको अपने ऊपर हावी न होने दें। उन्होंने कहा कि कभी भी तुरंत प्रतिक्रिया देने दें। गुस्सा आए तो हमेशा सोचें कि गुस्से का कारण क्या है, हो सकता है कि इसपर ध्यान देते ही आपका गुस्सा दूर हो जाएगा। कभी किसी से कठोरता का व्यवहार न करें क्योंकि कोई भी रुखे और कठोर व्यवहार को पसंद नहीं करता। अपका विनम्र और अहंकारहीन व्यवहार अनेक समस्याओं का समाधान कर देगा। उन्होंने विद्यार्थियों को विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि कैसे अपने व्यक्तित्व में बदलाव कर हर क्षेत्र में सफलता हासिल की जा सकती है।
कार्यक्रम के प्रारंभ में संस्कृति विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एमबी चेट्टी ने मुख्य वक्ता का स्वागत करते हुए विद्यार्थियों से कहा कि आज आपके लिए एक अच्छा मौका है। इस मौके का लाभ उठाकर आप अपने अंदर बड़ा बदलाव ला सकते हैं। कार्यक्रम के अंत में संस्कृति विवि के डाइरेक्टर जनरल डा. जेपी शर्मा ने धन्यवाद ज्ञापित किया। संस्कृति प्लेसमेंट एंड ट्रेनिंग सेल की वरिष्ठ प्रबंधक अनुजा गुप्ता ने सेमिनार का संचालन किया।

छात्राएं नौकरी के पीछे भागने की बजाय स्वयं का स्थापित करें उद्यम

राजीव एकेडमी में हुई महिला उद्यमिता पर कार्यशाला

मथुरा। राजीव एकेडमी फॉर टेक्नोलॉजी एण्ड मैनेजमेंट के बीबीए विभाग द्वारा सोमवार को महिला उद्यमिता पर एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्य वक्ता एमजी बेकर्स की फाउण्डर श्रुति द्विवेदी ने बीबीए की छात्राओं को नौकरी के पीछे भागने की बजाय स्वयं का उद्यम स्थापित करने को प्रोत्साहित किया।
श्रुति द्विवेदी ने कार्यशाला में छात्राओं को न केवल उद्यमिता का अर्थ समझाया बल्कि उन्हें इस क्षेत्र में करिअर बनाने का आह्वान किया। उन्होंने छात्राओं को व्यावहारिक धरातल पर एक महिला अपनी पृष्ठभूमि को मजबूत बनाते हुए कैसे अपना उद्यम शुरू कर सकती है और यह उद्यम सफल कैसे हो, इस पर भी विस्तृत जानकारी दी। कार्यशाला में रिसोर्स परसन ने कारपोरेट जगत के ऐसे कई क्षेत्रों की चर्चा की जहां महिला उद्यमियों के लिए बहुत अधिक स्कोप है। उन्होंने कहा कि लड़कियों को पढ़-लिखकर अपना स्वयं का उद्यम खड़ा करना चाहिए। लड़कियां समाज में केवल नौकरी तक ही सीमित न रहें।
श्रुति द्विवेदी ने छात्राओं को स्वयं का उद्यम स्थापित करने के महत्वपूर्ण और आवश्यक टिप्स भी दिए। उन्होंने छात्राओं को सरकार द्वारा महिला उद्यमियों को दी जाने वाली सहूलियतों तथा सब्सिडी की भी जानकारी दी। रिसोर्स परसन ने छात्राओं को प्रोत्साहित करने हुए कहा कि वे आगे आएं और उद्यम लगाते वक्त सरकारी योजनाओं का लाभ उठाएं। उन्होंने सरकार के न्यू स्टार्टअप्स यूपीएस स्कीम और बैंक की फाइनेंशियल स्कीम की जानकारी देते हुए छात्राओं को कुछ महिला उद्यमियों के नाम बताते हुए कहा कि इन्होंने बहुत छोटी आयु में ही अपना उद्यम शुरू किया और आज वे उद्योग जगत की बुलन्दियां छू रही हैं।
इस अवसर पर छात्राओं ने राजीव एकेडमी से प्रबंधन की डिग्री हासिल करने के बाद अपना स्वयं का उद्यम शुरू करने का संकल्प लिया। अंत में बीबीए विभागाध्यक्ष ने मुख्य वक्ता का आभार माना। संस्थान के निदेशक डॉ. अमर कुमार सक्सेना ने छात्राओं का आह्वान किया कि वे प्रबंधन की तालीम हासिल करने के बाद स्वयं का उद्यम स्थापित कर रोजगार प्रदाता बनने का संकल्प लें।