Friday, January 16, 2026
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एनआईआरएफ इनोवेशन श्रेणी में जीएलए विश्वविद्यालय टाॅप 50 में

इनोवेशन की रैकिंग में जीएलए को मिला टाॅप 50 श्रेणी में स्थान

मथुरा : एनआईआरएफ की रैंकिंग में जीएलए विश्वविद्यालय, मथुरा ने इनोवेशन की श्रेणी में देश की सभी प्राइवेट और सरकारी यूनिवर्सिटीज में टाॅप 50 में स्थान प्राप्त किया है। इस रैंक की प्रमाणिकता दर्शाती है कि जीएलए यूनिवर्सिटी न्यूजेन आईईडीसी, ई-सेल, आईआईसी और स्पार्कएल टीबीआई के माध्यम से छात्रों के बीच इनावेषन और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए कार्यरत है। वहीं देश के सरकारी और प्राइवेट संस्थानों में जीएलए के फार्मेसी विभाग ने भी 54वीं रैंक हासिल की है।

बीते दिनों केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा तैयार नेशनल इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क (एनआईआरएफ) रैंकिंग को जारी किया गया। इस रैंकिंग में जीएलए विश्वविद्यालय, मथुरा ने टाॅप 50 की रैंक सूची में अपना नाम दर्ज कराया है। जबकि निजी विश्वविद्यालय श्रेणी में शीर्ष 12 में शामिल हो गया है। यह रैंक भारत के प्राइवेट और सरकारी विश्वविद्यालयों को छात्रों और संकाय सदस्यों के बीच इनोवेशन और उद्यमिता विकास से संबंधित उत्कृष्ट कार्य करने के लिए प्रदान की गयी है। वहीं इस बार फार्मेसी विभाग ने भी उत्कृष्ट पायदान पर पहुंचते हुए 54वीं रैंक हासिल की है। जबकि पिछले वर्ष 69वीं रैंक हासिल हुई थी।

विदित रहे कि विश्वविद्यालय में जीएलए इन्क्यूबेशन सेंटर के माध्यम से 41 स्टार्टअपों की शुरुआत हो चुकी है। जिनमें से 10 स्टार्टअप देश के विभिन्न राज्यों में संचालित हैं तथा 37 स्टार्टअप विश्वविद्यालय से ही लोगों के साथ जुड़कर बेहतर सेवाएं दे रहे हैं। इसके अलावा जीएलए में स्थापित इन्क्यूबेटर केन्द्र के माध्यम से आगामी वर्शों में 100 से अधिक स्टार्टअप को वित्तीय सहायता के रूप में 2 लाख 25 हजार से लेकर साढे़ 7 लाख तक प्रदान कर बढ़ावा देने पहल की है।

कुलाधिपति नारायण दास अग्रवाल ने बताया कि जीएलए विश्वविद्यालय में अब तक 122 इनोवेटिव प्रोटोटाइप तैयार किए जा चुके हैं। जीएलए में अब भी 41 स्टार्टअप कार्यरत हैं, जिसमें 15 से अधिक टीमें अपना रजिस्ट्रेशन प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में करा चुकी हैं। कुछ टीमें अपना रजिस्ट्रेशन कराने के लिए प्रयासरत हैं। जीएलए में कार्यरत स्टार्टअप टीमों को आवश्कतानुसार ट्रेडमोलेन ई-साइकिल प्रा.लि, फूड़वागोन प्रा.लि, साइबर इमपोस्टर्स को आर्थिक सहायता प्रदान की है। स्टार्टअप लांच पैड में पंजीकृत ट्रेडमोलेंन ई-साइकिल प्रा.लि, द्वारा ट्रेड ई-साइकिल का निर्माण किया जा रहा है। फूड़वागोन प्रा.लि, द्वारा रेहड़ी फुटपाथ पर ठेले लगाने वालों के लिए अत्याधुनिक ठेले का निर्माण किया जा रहा है। इसके अलावा पिछले 5 वर्षों में विश्वविद्यालय ने 430 पेटेंट दायर किए हैं, जिनमें से 400 प्रकाशित हो चुके हैं, 40 स्वीकृत हो गए हैं।

जीएलए इन्क्यूबेशन सेंटर के निदेशक डाॅ. मनोज कुमार ने विश्वविद्यालय को मिली उपलब्धि पर कहा कि एनआईआरएफ-इनोवेशन रैंकिंग भारत में नवाचार और उद्यमशीलता पारिस्थितिकी तंत्र के आधार पर अकादमिक संस्थानों को रैंक करती है। जबकि जीएलए यूनिवर्सिटी न्यूजेन आईईडीसी, ई-सेल, आईआईसी और स्पार्कएल टीबीआई के माध्यम से छात्रों के बीच नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए कार्यरत है।

इस उपलब्धि के लिए कुलपति प्रो. फाल्गुनी गुप्ता, प्रतिकुलपति प्रो. अनूप कुमार गुप्ता, टीम में शामिल वरिष्ठ प्रबंधक रवि तिवारी, जितेन्द्र कुमार, अभिषेक प्रताप गौतम सहित विश्विविद्यालय के अन्य पदाधिकारियों के प्रयासों को सराहा है।

संस्कृति स्कूल ऑफ होटल मैनेजमेंट बना रहा विद्यार्थियों के लिए रोजगार की आसान राह

मथुरा। वर्तमान दौर की गलाकाट प्रतिस्पर्धा में विद्यार्थियों के सामने उच्च शिक्षा में अपने लिए भविष्य की राह चुनना एक कठिन चुनौती साबित हो रहा है। ऐसे में संस्कृति विश्वविद्यालय का स्कूल ऑफ टूरिज्म एंड होटल मैनेजमेंट विद्यार्थियों के लिए एक ऐसा उपयोगी पाठ्यक्रम साबित हो रहा है, जिसको पास करने के बाद विद्यार्थी देश-विदेश में आसानी से रोजगार पाने में सफल हो रहे हैं।

स्कूल ऑफ़ टूरिज्म एंड होटल मैनेजमेंट के डीन रतीश कुमार शर्मा बताते हैं कि मुझे यह बात साझा करते हुए सहर्ष प्रसनत्ता हो रही है की इस वर्ष संस्कृति स्कूल ऑफ़ टूरिज्म एंड होटल मैनेजमेंट , संस्कृति यूनिवर्सिटी के तकरीबन ८5 प्रतिशत बच्चो का चयन अंतर्राष्ट्रीय होटलों में हुआ है , जो कि टर्की, दुबई एवं मालदीव्स इत्यादि जगहों पर स्थित हैं। इनकी औसतन सैलरी करीब 7.2 लाख रुपए है सालाना। यह सभी छात्र बहुत ही सामान्य परिवारों से हैं कोई किसान का बेटा है तो कोई मैकेनिक का, यह उपलब्धि इनके परिवारों के लिए बहुत मायने रखती है।
डीन रतीश शर्मा का कहना कि शिक्षण संस्थान का उद्देश्य न केवल अपने छात्रों को रोजगार हेतु तैयार करना है, बल्कि रोजगार उपलब्ध करना भी है, मैं अभिभावकों को जिनके बच्चे पढ़ाई में औसत या फिर बमुश्किल ही उत्तीर्ण हुए हो , उन सभी को होटल मैनेजमेंट का कोर्स करने की सलाह देता हूँ , होटल मैनेजमेंट में अच्छा करियर बनाने के लिए आपको प्रेसेंटेबल दिखना चाहिए, आपकी औसत कद काटी हो एवं आपका स्वाभाव सौम्य हो, यदि यह दो तीन खूबियां आपके अन्दर हैं तो होटल मैनेजमेंट में आप एक अच्छा करियर बना सकते है।

उन्होंने बताया कि वैश्वीकरण के इस दौर में अंतरराष्ट्रीय होटलों की संख्या बहुत तेजी से बढ़ती जा रही है, 2030 तक यह इंडस्ट्री 238 अरब डॉलर की हो जाएगी, जिससे एक उद्योग और शिक्षा के रूप में इसकी प्रासंगिकता लगातार बढ़ रही है। होटल इंडस्ट्री सबसे ज्यादा करियर ऑप्शन देना वाली इंडस्ट्री है, इस कोर्स के बाद, आप विभिन्न क्षेत्रों में अपना करियर बना सकते हैं जैसे की पर्यटन , क्लब और रेस्त्रां मैनेजमेंट, क्रूज जहाज , होटल मैनेजमेंट, किचन मैनेजमेंट, सेना में हॉस्पिटैलिटी सर्विस, इवेंट मैनेजमेंट ,एयरलाइन में ग्राउंड ड्यूटी , एयरलाइन कैटरिंग अस्पताल एडमिनिस्ट्रेशन और केटरिंग , रेलवे, बैंकों, सशस्त्र बलों, शिपिंग कंपनियों आदि के केटरिंग डिपार्टमेंट इतियादी क्षेत्रों में विद्यार्थी अपने करियर को आगे बढ़ा सकते हैं। ज्यादा करियर ऑप्शन होने के वजह से इसकी लोकप्रियता दिन-प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है।

उन्होंने बताया कि वर्ल्ड टूरिज्म एंड ट्रेवल कौंसिल के अनुसार २०२६ तक , विश्वा पर्यटन उद्योग लगभग 370 मिलियन लोगों के रोजगार को सपोर्ट करेगा , यानी की हर 9 में से 1 व्यक्ति पर्यटन व्यवसाय से जुड़ा होगा , यह एक अपार सम्भावना है , जिसका उपयोग किया जाना चाहिए , एक बेहतर भविष्य के लिए।

होटल मैनेजमेंट कोर्स के लिए आवश्यक न्यूनतम योग्यता 10+2 है, होटल मैनेजमेंट का डिग्री कोर्स तीन वर्षों का होता है , और इसे किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से ही किया जाना चाहिए। डिग्री कोर्स के प्रथम 5 सेमेस्टर क्लास रूम ट्रेनिंग एवं प्रैक्टिकल कराये जाते है , जो छात्रों को होटल एवं वैश्विक पर्यटन उद्योग के हिसाब से तैयार करता है , इसके बाद , 6th सेमेस्टर में इन छात्रों के किसी एक पांच सितारा होटल जैसे की ताज होटल , ली मेरीडियन , रैडिसन , ललित, लीला केंपिंस्की, आदि होटलों में 6 महीनो की इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग करवाई जाती है , जो इन छात्रों को होटल इंडस्ट्री के प्रैक्टिकल आस्पेक्ट्स से परिचित करता है , तत्पश्चात ही इन छात्रों का प्लेसमेंट हेतु तैयार माना जाता है।

के.डी. हॉस्पिटल में विप्पल सर्जरी से बची कैंसर पीड़ित की जान

गैस्ट्रो सर्जन डॉ. मुकुंद मूंदड़ा और उनकी टीम की बड़ी सफलता

मथुरा। के.डी. मेडिकल कॉलेज-हॉस्पिटल एण्ड रिसर्च सेण्टर के जाने-माने गैस्ट्रो सर्जन डॉ. मुकुंद मूंदड़ा और उनकी टीम ने विप्पल सर्जरी कर छाता निवासी कैंसर पीड़ित दौलतराम (35) को नई जिन्दगी दी है। खाना-पीना छोड़ चुके दौलतराम के चेहरे पर लौटी मुस्कान से अब उसके परिजन भी खुश हैं।
जानकारी के अनुसार छाता, जिला मथुरा निवासी दौलतराम कई महीनों से शारीरिक रूप से परेशान चल रहा था। उसे उपचार को दिल्ली भी ले जाया गया लेकिन उसकी जांच रिपोर्ट्स और स्थिति को देखने के बाद वहां के चिकित्सकों ने परिजनों को जो कुछ बताया उसे सुनकर वे वापस लौट आए। एक दिन स्थिति काफी बिगड़ने के बाद उसे के.डी. हॉस्पिटल लाया गया। गैस्ट्रो सर्जन डॉ. मुकुंद मूंदड़ा ने मरीज तथा उसकी जांच रिपोर्ट्स को देखने के बाद परिजनों को आपरेशन की सलाह दी।
परिजनों की स्वीकृति के बाद डॉ. मुकुंद मंदड़ा के मार्गदर्शन में डॉ. यतीश शर्मा, डॉ. सिद्धार्थ वर्मा, डॉ. अनुराग कुमार, निश्चेतना विशेषज्ञ डॉ. लीना गोयल, डॉ. कौस्तुभ की देखरेख में विप्पल सर्जरी की गई। शल्य चिकित्सा में ऐसी सर्जरी कम होती हैं। वजह जोखिम का अधिक होना बताया जाता है। सफल सर्जरी के बाद जहां चिकित्सकों की टीम ने चैन की सांस ली वहीं परिजन भी बहुत खुश थे। अब दौलतराम बिल्कुल स्वस्थ है। इस सर्जरी पर डॉ. मुकुंद मूंदड़ा ने कहा कि यह जोखिम हमारी टीम द्वारा सिर्फ मरीज की उम्र को देखकर लिया गया। हम चाहते तो मना कर देते लेकिन मैं ऐसा नहीं कर सका।
डॉ. मूंदड़ा बताते हैं कि विप्पल एक जटिल ऑपरेशन है। इसमें पैंक्रियाज (अग्नाशय) के शुरुआती हिस्से के साथ ही डिओडेनम, गॉलब्लेडर और बाइल डक्ट (पित्त नली) को हटाया जाता है। विप्पल प्रोसीजर से पैंक्रियाज, डिओडेनम और बाइल डक्ट में ट्यूमर और अन्य डिसऑर्डर को ठीक करने में मदद मिलती है। यह पैंक्रियाज में हुए कैंसर के इलाज के लिए सबसे जरूरी सर्जरी है। सर्जरी के बाद पैंक्रियाज को स्मॉल इंटेस्टाइन से जोड़ दिया जाता है ताकि खाने को सही तरह से डायजेस्ट किया जा सके।
डॉ. मूंदड़ा का कहना है कि पैंक्रियाज के कैंसर के इलाज में विप्पल सर्जरी कैंसर पीड़ित के लिए फिर से नया जीवन मिलने जैसा है। वह बताते हैं कि जब किसी व्यक्ति के पैंक्रियाज, डिओडेनम, गॉलब्लेडर और बाइल डक्ट में कैंसर की शुरुआत या कोई डिसऑर्डर की समस्या होती है, तो विप्पल प्रोसीजर की ही आवश्यकता होती है। आर.के. एज्यूकेशनल ग्रुप के अध्यक्ष डॉ. रामकिशोर अग्रवाल, प्रबंध निदेशक मनोज अग्रवाल, डीन और प्राचार्य डॉ. आर.के. अशोका, उप प्राचार्य डॉ. राजेन्द्र कुमार ने बड़ी और सफल सर्जरी के लिए चिकित्सकों की टीम को बधाई दी वहीं दौलतराम के परिजनों ने के.डी. हॉस्पिटल प्रबंधन का आभार जताया।

जीएलए और आइडियालाइफ हेल्थकेयर के मध्य एमओयू साइन

स्वास्थ्य सुधार के क्षेत्र में जीएलए फार्मेसी के छात्रों को मिलेंगे अवसर

मथुरा : वर्तमान समय में फार्मेसी के छात्रों को इण्डस्ट्री का एक्सपोजर जरूरी है, जिससे छात्र अपने आपको इंडस्ट्री में कार्य करने के योग्य बना सकें। इसके लिए हेल्थकेयर जैसी बेहतर जगह मिलना जरूरी है। इसी के मद्देनजर जीएलए विश्वविद्यालय, मथुरा और आइडियालाइफ हेल्थकेयर, कानपुर के बीच एमओयू साइन हुआ है। इसके माध्यम से फार्मेसी के छात्रों को टेवलेट, कैप्सूल, आईड्राॅप्स, सीरप आदि बनाने की विधि और उनकी गुणवत्ता परीक्षण के तरीके सीखने का अवसर मिलेगा।

विदित रहे कि जीएलए के फार्मेसी विभाग में छात्रों के लिए आधुनिक प्रयोगशालाएं हैं। जिनमें उत्कृष्ट शिक्षक स्वास्थ्य के क्षेत्र में अनुसंधान के साथ-साथ विभिन्न दवाओं के प्रयोग और उनसे होने वाले फायदे और नुकसान के बारे में भी जानकारी देते हैं। साथ ही साथ प्रयोगशालाओं में दवाओं का परीक्षण करने का अवसर भी मिलता है। छात्रों को फार्मा इंडस्ट्रीज में भ्रमण और ट्रेनिंग के दौरान वहां उपयोग में लायी जा रही तकनीकों का ज्ञान मिल सके, इसी उद्देश्य से आइडियालाइफ हेल्थकेयर कंपनी के साथ एमओयू साइन की आवश्यकता नजर आई।

इंटरनेशनल रिलेशन एंड एकेडमिक कोलैबोरेशन विभाग के डीन प्रो. दिलीप कुमार शर्मा कहते हैं कि जीएलए विश्वविद्यालय भारत में श्रेष्ठ शिक्षा, अनुसंधान और बेहतर रोजगार दिलाने के नाम से जाना जाता है। इसीलिए विश्वविद्यालय उन दिग्गज कंपनियों के साथ एमओयू साइन करना सुनिश्चित करता है जहां से प्रत्येक छात्र को कुछ नया सीखने और जानने के लिए मिले। आइडियालाइफ वर्षों से हेल्थकेयर के क्षेत्र में नामी कंपनी के रूप में जानी जाती है। उन्होंने बताया कि यह एमओयू जीएलए कुलसचिव अषोक कुमार सिंह एवं आइडिया हेल्थकेयर के मैनेजिंग डायरेक्टर डाॅ. सौरभ भार्गवा के हस्ताक्षर के बाद प्रभावी हुआ है।

फार्मेसी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डाॅ. योगेश मूर्ति ने बताया कि यह कंपनी पिछले 75 वर्षों से विभिन्न प्रकार की दवाओं का निर्माण कर रही है। इस एमओयू के अन्तर्गत छात्र प्रोडक्शन यूनिट का भ्रमण कर चुके है। भ्रमण के दौरान छात्रों ने यहां हो रहे प्रोडक्शन की प्रक्रिया को देखा और समझा। प्रोडक्शन मैनेजर से वार्तालाप कर दवा बनने की विधि और लैबों में स्थापित उपकरणों के बारे में जानकारी हासिल की। आने वाले समय में कुछ बीफार्मा के छात्र इस कंपनी में समर ट्रेनिंग पर जाएंगे।

विभागाध्यक्ष प्रो. मीनाक्षी वाजपेयी बताया कि इस तरह के एमओयू ‘कंपनियों में शिक्षण-प्रशिक्षण का माध्यम बनेंगे और फार्मा इंडस्ट्री की जरूरतों के हिसाब से अपने आपको तैयार कर पायेंगे। फार्मेसी विभाग के निदेशक प्रो. एम अरोकिया बाबू ने आने वाले समय में और भी नई फार्मा कंपनी के साथ एमओयू करने पर जोर दिया, ताकि एमफार्मा के छात्रों को अनुसंधान के अवसर मिल सकें।

जीएलए में औषधि के पारंपरिक ज्ञान को विज्ञान से जोड़ने पर जोर –
मथुरा। जीएलए विश्वविद्यालय, मथुरा के फार्मेसी विभाग में हर्बल दवा का मानकीकरण पर एक अतिथि व्याख्यान का आयोजन हुआ। इस मौके पर एचएनबी सेन्ट्रल यूनिवर्सिटी गढ़वाल के फार्मेसी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. नामदेव ने हर्बल दवा का मानकीकरण करना क्यों जरूरी है और पारंपरिक दवाओं के ज्ञान को किस तरह से आजकल की दवाओं से जोड़ा जाए के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कैसे हम पौधों को खान-पान के साथ-साथ दवाओं की तरह प्रयोग कर सकते हैं।

उन्होंने बताया कि हर्बल प्रोड्क्टस कई कॉम्बिनेशन में आते है, जिनकी गुणवत्ता को जानना अतिआवष्यक है। हर्बल ड्रग्स का शरीर पर क्या असर होगा यह इस बात पर निर्भर करेगा कि उसका सेवन किसके साथ किया जा रहा है। उदाहरण के तौर पर उन्होंने त्रिफला चूर्ण के बारे में जानकारी दी।
इस मौके पर विभागाध्यक्ष डाॅ. मीनाक्षी वाजपेयी ने प्रो. नामदेव का आभार व्यक्त कर उनसे भविष्य में रिसर्च कोलैबोरेशन करने का अनुरोध किया।

फार्मेसी विभाग के निदेशक प्रो. एम अरोकिया बाबू ने स्मृति चिन्ह् भेंट किया। डा. कमल शाह ने कार्यक्रम का संचालन किया। व्याख्यान के दौरान सभी रिसर्च स्काॅलर व शिक्षकगण उपस्थित रहे।

उद्यमिता से रूबरू हुए राजीव एकेडमी के छात्र-छात्राएं

नवीरा की संस्थापक रसना बैजल ने बताए सफलता के गुर

मथुरा। राजीव एकेडमी फॉर टेक्नोलॉजी एण्ड मैनेजमेंट के बीबीए विभाग द्वारा उद्यमिता पर आयोजित गेस्ट लेक्चर में नवीरा कम्पनी की संस्थापक रसना बैजल ने छात्र-छात्राओं को नए उद्यम शुरू करने के साथ सफल उद्यमी बनने के तरीके बताए। उन्होंने कहा कि सफल उद्यमी बनने में समयानुकूल प्रबंधन बहुत मायने रखता है।
अतिथि वक्ता के रूप में आईं मथुरा में सिले-सिलाए वस्त्रों की कम्पनी नवीरा की संस्थापक रसना बैजल ने छात्र-छात्राओं को नई इण्डस्ट्री शुरू करने के कई टिप्स दिए। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यापारिक कार्य को आरम्भ करने के पूर्व एक पक्की योजना बनाई जाती है। व्यापार आगे सफल होने की परसेण्टेज और वर्तमान में उस व्यापार की क्या रेटिंग है तथा आर्थिक रूप से आय-व्यय कितना हो सकता है, यह सब बातें सोचनी होती हैं। दरअसल सम्बन्धित व्यापार में भरपूर लाभ होने की सम्भावना आदि के बारे में विचार करते हुए ही उद्यम शुरू करने का जोखिम उठाया जाता है जिसमें अप्रत्याशित लाभ और अनजान खतरे दोनों होते हैं।
श्रीमती बैजल ने कहा कि अपना उद्यम शुरू करते समय एक उद्देश्य तय किया जाता है जिससे होने वाले लाभ के बारे में भी पता चला सके। यदि इन सभी को हम अच्छी तरह से मैनेज करके चलें तो उद्यम सफल होता है। विद्यार्थियों की जिज्ञासा शान्त करते हुए उन्होंने उद्यमिता की विशेषताओं, उद्यमी की योग्यता और उसकी बाजार पर पकड़ के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी।
श्रीमती बैजन ने सिले-सिलाए वस्त्रों की कम्पनी नवीरा का उदाहरण देते हुए कहा कि 2016 में यह कम्पनी छोटी सी दुकान के रूप में स्थापित हुई थी जो आज पाँच दर्जन से अधिक प्रसिद्ध ब्राण्डों के साथ खासा व्यापार कर रही है। यह कम्पनी मथुरा की स्थानीय बाल जनसंख्या के लिए वस्त्रों की आपूर्ति करती है साथ ही पूरे देश से इसे बड़े आर्डर भी मिलते हैं। अंत में संस्थान के निदेशक डॉ. अमर कुमार सक्सेना ने श्रीमती रसना बैजल का आभार माना।

आरआईएस के छात्र हार्दिक अग्रवाल ने कराटे में जीता गोल्ड मेडल

चैम्पियंस आफ चैम्पियन कराटे कप में मिला बेस्ट फाइटर अवॉर्ड

मथुरा। राजीव इंटरनेशनल स्कूल के होनहार छात्र हार्दिक अग्रवाल ने सुरवीन इंटरनेशनल स्कूल में आयोजित चैम्पियंस आफ चैम्पियन कराटे कप प्रतियोगिता में अपने वेट कैटेगरी में स्वर्णिम सफलता हासिल कर मथुरा जनपद का गौरव बढ़ाया है। प्रतियोगिता के पारितोषिक वितरण समारोह में अतिथियों ने हार्दिक की चुस्ती-फुर्ती और प्रदर्शन की सराहना करते हुए मेडल, प्रशस्ति पत्र और ट्रॉफी प्रदान की। हार्दिक अग्रवाल को बेस्ट फाइटर अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया।
प्रतियोगिता के ऑर्गनाइजर अजय कुमार और आशीष त्यागी अनुसार सात जून बुधवार को सुरवीन इंटरनेशनल स्कूल में इंटर स्टेट चैम्पियंस आफ चैम्पियन कराटे कप प्रतियोगिता में दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के विभिन्न शहरों गाजियाबाद, मेरठ, बुलंदशहर, आगरा, मैनपुरी तथा मेजबान मथुरा के लगभग डेढ़ सौ बालक-बालिका खिलाड़ियों ने अपना कौशल दिखाया। इस प्रतियोगिता में राजीव इंटरनेशनल स्कूल के छात्र हार्दिक अग्रवाल ने अपनी वेट कैटेगरी में स्वर्ण पदक जीतने के साथ ही बेस्ट फाइटर अवॉर्ड भी हासिल किया।
प्रतियोगिता के पारितोषिक वितरण समारोह में प्रधानाचार्य डॉ. सरिता सिंधु, मुख्य अतिथि देवव्रत धामा, निवाड़ी नगर पंचायत के चेयरमैन अनिल त्यागी, अलका चौधरी, मयंक त्यागी आदि ने विजेता तथा उप-विजेता खिलाड़ियों को पुरस्कृत करते हुए भविष्य में और बेहतर प्रदर्शन की शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर अतिथियों और आयोजकों द्वारा हार्दिक को बेस्ट फाइटर अवॉर्ड भी दिया गया। प्रतियोगिता के निर्णायकों ने माना कि हार्दिक अग्रवाल में गजब का टैलेंट और चुस्ती-फुर्ती है।
आर.के. एज्यूकेशनल ग्रुप के अध्यक्ष डॉ. रामकिशोर अग्रवाल, प्रबंध निदेशक मनोज अग्रवाल, शैक्षिक संयोजिका प्रिया मदान ने चैम्पियंस आफ चैम्पियन कराटे कप प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतने वाले छात्र हार्दिक को हार्दिक बधाई देते हुए उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है। डॉ. रामकिशोर अग्रवाल ने अपने संदेश में कहा कि हर बच्चे को किसी न किसी गेम्स में जरूर हिस्सा लेना चाहिए ताकि वह शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रह सके।

संस्कृति विवि के छात्र ने हरियाणा यूथ बाक्सिंग में जीता गोल्ड

मथुरा। संस्कृति विश्वविद्यालय के बीए मनोविज्ञान के द्वितीय वर्ष के छात्र मनमोहन ने हरियाणा यूथ बाक्सिंग चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर अपने परिवार और विश्वविद्यालय का नाम रौशन किया है। 75 किलो भार वर्ग के इस मुकाबले में पांच मुकाबलों में जीत हासिल करने के बाद यह मेडल हासिल हुआ। हरियाणा यूथ चैंपियनशिप-2023 में हरियाणा के लगभग 450 यूथ बाक्सर ने भाग लिया।
मनमोहन की जीत पर विवि के चांसलर डा. सचिन गुप्ता सहित सभी अधिकारियों, शिक्षकों ने हर्ष व्यक्त करते हुए बधाई दी है। गोल्ड मेडल जीतने के बाद मनमोहन ने जानकारी देते हुए बताया कि बचपन के मोटापे से मुक्ति पाने के लिए वे 13 साल की उम्र में बाक्सिंग अकेडमी जाने लगे। अकेडमी में ऐसा मन लगा कि उनका रुझान बाक्सिंग की ओर बढ़ गया। पलवल हरियाणा के गांव बनचारी के रहने वाले मनमोहन ने बताया कि बाक्सिंग की शिक्षा और प्रशिक्षण वे प्रसिद्ध राष्ट्रीय प्रशिक्षक और अनेक पदक विजेता अशोक सिंह सोरोत से उनकी अपनी अकेडमी सुभाष चंद्र बोस स्पोर्ट्स अकेडमी से ले रहे हैं। मनमोहन के पिता श्यामवीरजी खेती करते हैं। चाचा बाबूरामजी और दादाजी नंदलालजी हरियाणा पुलिस में हैं। मनमोहन की दो बड़ी बहनें हैं। सारा परिवार एक साथ रहता है। परिवार की ओर से उन्होंने अपने खेल और पढ़ाई के लिए पूरा सपोर्ट है। संस्कृति विवि के शिक्षक मो. फहीम ने बताया कि मनमोहन की इच्छा बाक्सिंग में देश के लिए खेलने की है। मनमोहन को पढ़ाई और अपने खेल के अलावा कोई और शौक नहीं है। उन्होंने बताया कि सुबह डेढ़ घंटा और शाम को साढे तीन घंटा वे अपनी प्रैक्टिस करते हैं, बाकी समय पढ़ाई पर ध्यान देते हैं।

समय पूर्व जन्मे शिशुओं के लिए वरदान बना के.डी. हॉस्पिटल

एनआईसीयू में भर्ती 12 शिशुओं में छह का वजन डेढ़ किलो से कम

मथुरा। शिशु का जन्म हर मां के लिए बहुत ही खूबसूरत अहसास है। हर मां और शिशु का सम्बन्ध गर्भ से ही शुरू हो जाता है। लेकिन कुछ शिशु मां की अस्वस्थता या दीगर कारणों से नौ महीने पूरे होने से पहले ही जन्म ले लेते हैं ऐसे बच्चे को प्रीमैच्योर बेबी कहा जाता है। प्रीमैच्योर बेबी मां के गर्भ में पर्याप्त समय तक नहीं रह पाता इसलिए जन्म के बाद ऐसे शिशुओं को अन्य शिशुओं के मुकाबले अतिरिक्त देखभाल की जरूरत होती है। ऐसे शिशुओं की देखभाल और उपचार के लिए के.डी. मेडिकल कॉलेज-हॉस्पिटल एण्ड रिसर्च सेण्टर इस समय वरदान साबित हो रहा है।
के.डी. हॉस्पिटल प्रीमैच्योर शिशुओं के उपचार और देखभाल के लिए इसलिए भी उपयुक्त है क्योंकि यहां सुयोग्य चिकित्सकों और नर्सेज की टीम होने के साथ ही अत्याधुनिक वेंटीलेटर, सीपैप, फोटोथेरेपी, इंक्यूवेटर, सरफेक्टेंट आदि सुविधाएं उपलब्ध हैं। डॉ. के.पी. दत्ता के मार्गदर्शन और डॉ. संध्या लता, डॉ. उमेश, डॉ. सुप्रिया, डॉ. मुदासिर तथा डॉ. दिव्यांशु अग्रवाल की देखरेख में इस समय यहां के एनआईसीयू में एक दर्जन शिशुओं का उपचार किया जा रहा है। इन शिशुओं में छह शिशु तो डेढ़ किलो से भी कम वजन के हैं।
विभागाध्यक्ष शिशु रोग डॉ. के.पी. दत्ता का कहना है कि समय पूर्व जन्मे बच्चे का विकास ठीक प्रकार से नहीं हो पाता है, इसलिए उन पर कई प्रकार के स्वास्थ्य खतरे रहते हैं। इनमें से कुछ खतरे तो कुछ समय के अंतराल में ही लुप्त हो जाते हैं लेकिन कुछ जीवन भर के लिए शिशु के साथ जुड़ सकते हैं। डॉ. दत्ता का कहना है कि ऐसे शिशुओं को गहन एनआईसीयू में देखभाल की जरूरत पड़ती है। समय पूर्व जन्मे शिशुओं के फेफड़े पूर्ण रूप से विकसित नहीं होने के कारण वे प्राय: सांस सम्बन्धी बीमारियों से पीड़ित रहते हैं। ऐसे शिशु जीवन के पहले वर्ष तक सांस लेने की समस्या से जूझ सकते हैं। भविष्य में ऐसे शिशुओं में अस्थमा होने की सम्भावना भी ज्यादा होती है।
विशेषज्ञ शिशु रोग डॉ. संध्या लता का कहना है कि प्रीटर्म शिशुओं में अपरिपक्व मस्तिष्क एक आम बात है। ऐसे शिशु जो गर्भावस्था के 30-32 हफ्तों की समयावधि में जन्मे होते हैं, उनके मस्तिष्क का वजन सामान्य अवधि में जन्मे शिशु के मुकाबले केवल दो-तिहाही ही होता है जो आगे जाकर कई प्रकार के न्यूरोलॉजिकल विकार जैसे एडीएचडी, सेरेब्रल पाल्सी और ऑटिज्म को बढ़ावा दे सकता है। डॉ. संध्या लता का कहना है कि समय पूर्व जन्मे कुछ शिशुओं में एपनिया नाम की बीमारी भी पायी जाती है। यह आमतौर पर 20 सेकेंड या उससे अधिक समय के लिए सांस रुकने की स्थिति को कहते हैं। यदि बार-बार आपके शिशु की सांस आना बंद हो रही है, तो उसे शिशु रोग विशेषज्ञ को जरूर दिखा लें।
डॉ. संध्या लता बताती हैं कि गर्भावस्था के 34 सप्ताह से पहले पैदा होने वाले बच्चों में श्वसन संकट सिंड्रोम या आरडीएस एक आम बात है। आरडीएस से पीड़ित शिशुओं में सर्फेक्टेंट नामक प्रोटीन नहीं होता है जिसमें फेफड़ों में हवा का आदान-प्रदान ठीक ढंग से नहीं हो पाता। प्रीटर्म शिशु में इंट्रावेंट्रिकुलर हेमोरेज या आईवीएच होने की सम्भावना भी ज्यादा होती है। यह वह अवस्था होती है जिसमें मस्तिष्क में लगातार खून बह रहा होता है। खून को बहने से रोकने का तो कोई तरीका नहीं है, इसलिए डॉक्टर खून की आपूर्ति करने के बाद बच्चे को सघन चिकित्सा इकाई में रखकर उसे बचाने की कोशिश करते हैं।

स्कूल तथा कॉलेज की एक शाम जवाहर बाग के नाम

जिलाधिकारी पुलकित खरे की अध्यक्षता में जवाहर बाग परिसर में उद्यान विकास समिति जवाहर बाग की समीक्षा बैठक ली। कैंटीन, पार्क, रख रखाव, सुरक्षा आदि की जानकारी जिला उद्यान अधिकारी से प्राप्त की। जिलाधिकारी ने निर्देश देते हुए कहा कि सुरक्षा के दृष्टिगत पुलिस बल तथा होमगार्ड बढ़ाए जाएं, साइकिल चलाने के लिए टेंडर प्रक्रिया कर साइकिल चलाने को व्यवस्था की जाए, जवाहर बाग में विभिन्न कार्यक्रम के लिए विशेष व्यक्तियों से संपर्क किया जाए।
विभिन्न स्कूल तथा कॉलेजों के छात्र छात्राओं को जोड़ा जाए और विशेष शहरी स्कूलों को प्राथमिकता दें। छात्र छात्राओं के टेलेंट एव प्रतिभा को प्रदर्शन करने का मौका दिया जाए। कार्यक्रमों की रूप रेखा तैयार की जाए और रोस्टर जारी किया जाए। विभिन्न अधिकारियों से सुझाव मांगे। स्कूल के बच्चों को नेचर वॉक कराएं तथा बच्चो को विजिट कराते हुए विभिन्न पेड़ों के बारे में जानकारी दें। स्कूल तथा कॉलेज की एक शाम जवाहर बाग के नाम। ब्रज क्षेत्र के प्रजातियों के पौधे लगाए जाएं। पानी के लिए आरो लगाया जाए, गाइड, प्लांट विशेषज्ञ तथा एक्सपर्ट लोग रखे जाएं, जिससे टूरिस्ट लोगों को जानकारी दे सकें। टीशर्ट, कैप तथा ब्रज के विभिन्न सामान रखें और उनकी विक्री करें। जवाहर बाग के परिचय के लिए एक बुकलेट तैयार की जाए। जवाहर बाग की सभी लाइटें तथा साउंड सही कराए जाएं, साइन बोर्ड लगाए जाएं, जवाहर बाग के सभी फलों को जानकारी प्रदर्शित हों और उनका विवरण भी हो। पेड़ों पर फसाड़ लाइटें लगाई जाएं। जिलाधिकारी ने वॉटर पार्क, ओपन थियेटर, ओपन जिम तथा चाइल्ड पार्क का निरीक्षण किया और व्यविस्थ तरीके से कार्य योजना बनाने के निर्देश जिला उद्यान अधिकारी को दिए।

बैठक में मुख्य विकास अधिकारी मनीष मीना, पुलिस अधीक्षक नगर एम पी सिंह, डिप्टी कलेक्टर निकेत वर्मा, अधिशासी अभियंता लोक निर्माण अजय कुमार सिंह, जिला विद्यालय निरीक्षक भास्कर, जिला उद्यान अधिकारी मनोज चतुर्वेदी सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

तीन गैंगस्टर अपराधियों ने अवैध तरीके से अर्जित की गयी सम्पत्ति कीमत करीब 39.84 लाख रुपये को गैंगस्टर एक्ट के तहत कुर्क की गई

गोवर्धन. थाना पुलिस द्वारा तीन गैंगस्टर अपराधियों के द्वारा गैंग बनाकर अवैध तरीके से अर्जित की गयी सम्पत्ति अनुमानित कीमत करीब 39.84 लाख रुपये को गैंगस्टर एक्ट के तहत जमीन कुर्क की गई. माफियाओं एवं गिरोह बंद अपराधियों द्वारा आपराधिक कृत्य कर अवैध रुप से अर्जित की गई सम्पत्ति के जब्तीकरण के विरुद्ध चलाये जा रहे अभियान के तहत क्षेत्राधिकारी, तहसीलदार, नायव तहसीलदार व प्रभारी निरीक्षक थाना गोवर्धन मय पुलिस बल की मौजूदगी में ग्राम देवसेरस में आदेश श्रीमान जिला मजिस्ट्रेट मथुरा के अनुपालन में अन्तर्गत धारा 14(1) गैंगस्टर एक्ट अधिनियम के तहत कुर्क(जब्तिकरण) सम्पत्ति जिसकी कुल अनुमानित कीमत 39.84 लाख रुपये है की गयी. अभियुक्तगण जुनैद पुत्र नुरू निवासी देवसेरस, शमीम उर्फ शकील पुत्र नुरू निवासी देवसेरस,रिंकू उर्फ रुकुमद्दीन पुत्र रमजान निवासी देवसेरस थाना गोवर्धन जनपद मथुरा. जिसमें
अभियुक्तगण जुनैद व शमीम उर्फ शकील सम्पत्ति ग्राम देवसेरस में दर्ज भूमि श्रेणी-1 (क) खसरा नं0-754 क्षेत्रफल 0.414 है0 पर एक पक्के मकान का निर्माण कराया है। जिसकी मुल्याकंन के अनुसार लागत 12.21 लाख रुपये है। अभियुक्त रिंकू उर्फ रुकुमद्दीन सम्पत्ति ग्राम देवसेरस में दर्ज भूमि खसरा नं0-751 क्षेत्रफल 0.138 है0 पर एक पक्के मकान का निर्माण कराया है। जिसकी मुल्याकंन के अनुसार लागत 19.26 लाख रुपये है। तथा माँ के नाम एक प्लाट खसरा नं0 54 क्षेत्रफल 167.42 वर्ग मीटर है जिसकी मुल्याकंन के अनुसार लागत 8.37 लाख रुपये की गई है. तामील करने वाली टीम राममोहन शर्मा, क्षेत्राधिकारी, अजीत कुमार, तहसीलदार, बृजेश कुमार नायव तहसीलदार, प्र0नि0 ओमहरि वाजपेयी थाना गोवर्धन, देवेन्द्र सिंह, विनोद कुमार, राजोव तोमर, हरिओम, नितेश मलिक, सुशील कुमार हरेन्द्र कुमार, अनिल कुमार, अभिमन्यु. पंकज विपिन कुमार, सहदेव, अशोक कुमार,कमलेश चतुर्वेदी सुमाला थाना गोवर्धन जनपद मथुरा