Monday, September 27, 2021
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रालोद नेता ठा. तेजपाल सिंह गुपचुप सपा मुखिया से क्यों मिले, एक फोटो वायरल होने से मथुरा की राजनीति में क्यों मची हलचल, जानिए

मथुरा। राष्ट्रीय लोकदल के नेता एवं प्रदेश के पूर्व मंत्री ठाकुर तेजपाल सिंह यूपी में विधानसभा चुनाव आने से ठीक पहले सपा प्रमुख अखिलेश यादव से गुपचुप तरीके से मिले। इस मुलाकात के फोटो इन दिनों सोशल मीडिया वायरल हो गए। इसे लेकर एक बार फिर मथुरा की राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है। राजनेताआें के बीच तरह-तरह की चर्चाएं हैं तो रालोद और सपा कार्यकर्ता भी असमंजस हैं। कि आखिर पर्दे के पीदे मथुरा के नेता गुपचुप मीटिंग क्यों कर रहे हैं।


मथुरा की राजनीतिक हलचल को देख नियो न्यूज ने रालोद नेता तेजपाल सिंह से इस गुपचुप मीटिंग का रहस्य जाना साथ ही आगामी विधानसभा चुनाव में वह किस पार्टी से चुनाव मैदान में आएंगे, सपा प्रमुख से मिलने का मतलब क्या था? इन सभी सवालों के जवाब हमने लिए हैं।

रालोद नेता एवं पूर्व मंत्री ठा. तेजपाल सिंह ने नियो न्यूज से विशेष बातचीत में कहा कि उनके समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव से पिछले दिनों मैं मिला था। लेकिन इसमें कोई संदेहात्मक बात नहीं है। जाए। क्यों कि सपा और रालोद एक मिशन की दो धाराएं हैं। ये दोनों धाराएं वही धारा हैं जो रालोद एवं किसानों के मसीहा चौधरी चरन सिंह वाली धारा थी। उन्होंने कहा कि आागामी विधानसभा चुनाव में सपा और रालोद के बीच गठबंधन की बात हो रही है। तो ऐसे में सपा प्रमुख अखिलेश यादव के साथ एक सामान्य मुलाकात थी। उनसे सौहार्दपूर्ण तरीके से बात हुई। उन्होंने कहा कि हम तो एक निमित्त मात्र हैं करना तो नेताओं को ही है।

उन्होंने कहा कि यूपी विधानसभा चुनाव में दोनों ही दल के नेता मिलकर कुछ अच्छा करने जा रहे हैं। निश्चित रुप से यह माना जा रहा है कि बहुत ही अच्छा समीकरण बनेगा और 2022 में अखिलेश यादव और जयंत चौधरी मिलकर सरकार बनाएंगे। इनकी सरकार बनने से कोई रोकने वाला नहीं है।

आगामी विधानसभा चुनाव में रालोद और सपा का गठबंधन तय


अखिलेश के साथ सोशल मीडिया पर फोटो वायरल होने के बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या रालोद नेता ठाकुर तेजपाल सिंह सपा से विधानसभा चुनाव के लड़ सकते हैं। इस अहम सवाल पर ठाकुर तेजपाल सिंह ने कहा कि वह विशुद्ध रुप से लोकदल में हैं और लोकदल से आगामी समय में लोक दल से ही चुनाव लड़ेंगे। तेपार्ल ंसह ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि दोनों पार्टी के बीच कुछ अलग नहीं है। दोनों ही गठबंधन में हैं और गठबंधन से ही चुनाव होगा।

जाट वोट बैंक भाजपा को छोड़ क्यों रालोद में लौट रहा


उन्होंने कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव में दोनों ही नेता अखिलेश यादव और जयंत चौधरी मिलकर ही तय करेंगे कि किस जिले से किसे चुनाव लड़ाना है। उन्होंने कहा कि आगामी चुनाव को लेकर जनता में उत्साह के साथ एक भरोसा देखा जा रहा है। इस चुनाव में खासकर जाट वोटर की बात करते हुए ठाकुर तेजपाल सिंह ने कहा कि जो छिटक कर बीजेपी में चला गया था किसान आन्दोलन से वह फिर से उसने वापसी की है। क्यों कि आन्दोलन कर रहे किसान नेता राकेश टिकैत के साथ घटना हुई तो किसी ने भी साथ नहीं दिया था। उस समय रालोद नेता अजीत सिंह ने साथ दिया था। जयंत चौधरी भी वहां पहंचे। पब्लिक में उन्हें लेकर फिर से उत्साह देखा गया और इसी का नतीजा हुआ कि जाट फिर से वापस आया है।
उन्होंने कहा कि जाट समाज की दूसरी सहानुभूति यह है कि किसान नेता एवं रालोद प्रमुख रहे अजीत सिंह हमारे बीच से चले गए। तो जाट समाज फिर से जयंत चौधरी से जुड़ा है। पूरा जाट वोटर अपने नेता जंयत चौधरी की तरह देख रहा है।

जिला पंचायत चुनाव में रालोद की क्यों हुई हार

पिछले दिनों हुए जिला पंचायत के चुनाव में रालोद की हार पर ठाकुर तेजपाल सिंह ने कहा कि जिला पंचायत का चुनाव लोकल चुनाव है। इस चुनाव में भी हमारा मुकाबला भाजपा से होता है और इसमें भाजपा का भी एक भी नहीं जीता। एक हार का कारण यह भी रहा ठाकुर तेजपाल सिंह के बेटे और भाई को कोरोना महामारी ने घेर लिया। चुनाव के दौरान यह समस्या आ गई कि वह परिजनों की जान बचाएं या चुनाव देखें। इस कारण वह चुनाव में नहीं जा पाए। लेकिन फिर भी जनता ने जो निर्णय लिया है कि उसे हम स्वीकार करते हैं और हम इस पर भी आत्ममंथन करेंगे कि कहां कोई कमी रह गई, क्या नाराजगी है , जिसे दूर करने का प्रयास करेंगे।

क्यों नहीं चली रही है छाता की सुगर मिल

कई सरकारें बदल गई लेकिन दशकों से छाता सुगर मिल न चल पाने की समस्या क्षेत्रवासियों के सामने बरकरार बनीं रही। इस सवाल पर ठाकुर तेजपाल सिंह ने कहा कि छाता सुगर मिल का दुर्भाग्य यह है कि जो इस समय भाजपा की सरकार में मंत्री हैं यह उस समय बसपा सरकार में मंत्री थे। उनके समय पर ये सुगर मिल बिकी थी और उसी समय पर बंद हो गई थी। मौजूदा भाजपा सरकार में एक बार फिर उम्मीद जगी थी कि भाजपा सरकार में छाता से मंत्री बने हैं तो शायद यह मिल फिर से चलेगी। लेकिन वह आशा निराशा में बदल गई। हम उस समय विधायक थे लेकिन सरकार हमारी नहीं थी। सरकार सपा की थी। हमने इस मामले में प्रयास किया तो मिल फिर से चलने की स्थिति आ रही थी, लेकिन इस बीच में चुनाव आ गया और सरकार चली गई। उन्होंने कहा कि वह जनता को भरोसा दिलाते हैं जैसे ही सपा और रालोद की सरकार मिलकर बनेगी। तो निश्चित रुप से इस मिल को चलवाएंगे।

ऐसा क्या हुआ कि जनता चाहती है बदलाव

उन्होंने कहा कि सरकार में रहते हुए मंत्री और उनके नुमाइंदे हैं, जिन्होंने जिस तरह से तहसीलों को उठापठक की राजनीति करके जनता को परेशान कर रखा है। जनता उससे प्रताड़ित है। जनता इंतजार कर रही है कि कब वह समय आएगा जो इनको अपने से अलग करेंगे। छाता की जनता इंतजार कर रही है कि कब वह समय आए जिससे इन्हें पलटें। जनता हमने से कहने लगी है कि अबकें तो तुम्हारों ही पोत है। यानि तुम्हारी ही बारी है। इससे पता चलता है कि वह परिवर्तन चाहती हैं।

हर मोर्चे पर विफल हैं योगी सरकार

आखिर में उन्होंने कहा कि योगी सरकार की हर मोर्चे पर फेल हो गई है। कानून व्यवस्था, किसान, युवाओं को रोजगार सभी के मामले में लोग परेशान है। भ्रष्टाचार चरम पर है। प्रदेश की स्थिति बेकाबू हो गई है। लोग अपने आपको जरा भी सुरक्षित नहीं समझ रहे हंै। योगी के मीठे शिगूफे और अच्छी बातों से काम नहीं चलेगा। काम धरातल पर होने चाहिए।

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