मथुरा। पिछले दिनों गोरखपुर विश्वविद्यालय के एक कार्यक्रम में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल द्वारा अपने भाषण में अपनीं ही सरकार और उसके मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर घुमा फिरा कर गहरी चोट किया जाना जनमानस को बेहद अखर रहा है। यह सर्व विदित है कि इसके पीछे राज क्या है। राज यह है कि फूंक कहीं और से लगी तथा बाजा कहीं और से बजा। यह सब खेल गुजराती एन्ड कंपनी द्वारा संचालित है।
कहते हैं कि "विनाश काले विपरीत बुद्धि" मेरी भविष्य वांणी है कि जितना योगी जी को उखाड़ने की कोशिश होगी ये उतनी ही मजबूती से जमते चले जाएंगे। मुझे लगता है कि देश विरोधियों से भी ज्यादा खतरनाक योगी आदित्यनाथ को माना जा रहा है। इसके पीछे का सारा खेल प्रधानमंत्री की कुर्सी का है।
मेरा सुझाव है कि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी नहीं मारनी चाहिए। पूर्व में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को हाशिए पर करने का सबक भूल गए क्या? अगर अब भी न चेते तो फिर कब चेतोगे जब" अब पछताए होत क्या जब चिड़ियां चुग गईं खेत" वाली कहावत चरितार्थ होगी।