
मथुरा। शिक्षा और संस्कारों के अनूठे केंद्र संस्कृति विश्वविद्यालय में इस वर्ष का स्थापना दिवस समारोह बेहद खास और भव्य हुआ। गौरवशाली विरासत और शैक्षणिक उत्कृष्टता के नए सोपान तय कर चुके इस विश्वविद्यालय का पूरा परिसर सुरों की महफिल से सराबोर हो गया। देश के जाने-माने और युवाओं के चहेते बॉलीवुड सिंगर मोहम्मद इरफान के गीतों का जादू विद्यार्थियों के सर चढ़कर छा गया। इस वर्ष की थीम में अतीत और वर्तमान का एक बेहतरीन कोलाज देखने को मिलेगा। छात्र-छात्राएं जहाँ एक तरफ 80 के दशक के ‘रेट्रो वाइब्स’ और सुनहरे दौर की यादों को ताज़ा करने की तैयारियों में जुटे हैं, वहीं मोहम्मद इरफान ने मंच पर आकर इस शाम को रूहानी और रूमानी बना दिया। इरफान ने जब अपने सुपरहिट और रूह को छू लेने वाले गीतों जैसे— ‘दर्द दिलों के कम हो जाते’, ‘दिल संभल जा जरा (फिर मोहब्बत)’, ‘बंजारा’ और ‘बारिश’ की तान छेड़ी, तो समूचा ब्रज क्षेत्र और विश्वविद्यालय परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। उनकी मखमली आवाज़ में गाए गए इन गानों को लाइव सुनने के लिए युवाओं में ‘क्रेज’ सातवें आसमान पर नजर आया।
इरफान ने अपने गीतों की शुरुआत यारियां फिल्म के लोकप्रिय गीत दिल मेरा है नासमझ कितना..से की। संस्कृति विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने जबर्दस्त शोर के साथ अपने प्रिय गायक का मंच पर उतरते ही स्वागत किया। चारों तरफ तालियों की आवाज तब तक गूंजती रही जब तक वे मंच पर पहुंच नहीं गए। हिमेश रेशमियां द्वारा कंपोज किया, सनम तेरी कसम का गीत, तुझे देखते ही आंखें हो जाती हैं नम सुनाकर उन्होंने धीरे-धीरे विद्यार्थियों के दिल में उतरना शुरू कर दिया। विद्यार्थियों के जबर्दस्त उत्साह और प्यार से कुछ ही देर में इरफान ऐसे मस्त हुए कि उन्होंने अपनी गायकी में पूरी इनर्जी झोंक दी। एक के बाद एक दिल को छूने वाले गीत, दर्द दिलों के गर कम हो जाते, तू ही तू हर जगह आजकल क्यूं है, मुझको इतना बताए कोई, केसरिया तेरा रंग है पिया, तू पास है मेरे पास है ऐसे, तेरे बिना गुजारा ऐ दिल है मुश्किल, एक आस मिली मुझको, जो कुबूल किसी ने किया, कोई मुझसे मिला, जैसे बंजारे को घर, ऐसा क्यूं करूंगा जानूं में जानूं न जैसे नए दौर के गीतों के तुरंत बाद जब उन्होंने पुराने गीतों की झड़ी लगाई तो विद्यार्थियों के साथ शिक्षक भी झूमने को मजबूर हो गए। लता जी का गाया गाना लग जा गले से फिर ये मुलाकात हो के न हो, जगजीत सिंह की गजल , होठों से छू लो तुम मेरा गीत अमर कर दो। लोकप्रिय गायक केके की याद में उन्होंने उनके गीत सुनाए।
इरफान का छात्र-छात्राओं पर ऐसा चढ़ा कि वे सब स्टेज के नजदीक आकर उनका साथ देने लगे। विद्यार्थियों की इस लयबद्ध संगत ने इरफान को यह कहने पर मजबूर कर दिया कि वाह, संस्कृति। ये पढ़ने वाले बच्चे संगीत की भी इतनी पकड़ रखते हैं, गजब। इरफान के गीतों से विद्यार्थी इस कदर जुड़ गए कि वे लगातार इरफान को गाने को मजबूर करते रहे, ढाई घंटे से ज्यादा बिना रुके इरफान ने भी गाने गाकर अपनी गायकी का ऐसा सबूत दिया जो यह बताता है कि वे युवा दिलों की धड़कन क्यूं हैं। अंत में उन्होंन भंगड़ा ऐसा गाया कि सारा मैदान नाच उठा। रात ठीक 10 बजे से शुरू हुआ इरफान के गीतों का यह सफर आधी रात जाकर रुका। एक उत्सव, अनगिनत यादें” विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ. सचिन गुप्ता और पूरे संस्कृति परिवार ने इस मील के पत्थर को छूने की खुशी साझा करते हुए कहा कि यह स्थापना दिवस केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि हमारी यात्रा, हमारे मूल्यों और हमारे छात्रों की ऊर्जा का उत्सव है। लोकप्रिय गायक मोहम्मद इरफान का सम्मान करते हुए डा. सचिन गुप्ता ने कहा कि आप जैसे राष्ट्रीय स्तर के फनकार की उपस्थिति ने इस जश्न को ऐतिहासिक और कभी न भूलने वाली याद में तब्दील कर दिया।

