HomeUncategorizedअध्यापक शिक्षा के क्षेत्र में कार्यरत विद्वानों द्वारा विद्या भारती विद्यालय दर्शन

अध्यापक शिक्षा के क्षेत्र में कार्यरत विद्वानों द्वारा विद्या भारती विद्यालय दर्शन

वृन्दावन। परमेश्वरी देवी धानुका सरस्वती विद्या मंदिर में पंचदिवसीय विद्यालय दर्शन कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम अंतर्गत देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए अध्यापक शिक्षा के क्षेत्र में कार्यरत विद्वान विद्यालय की शैक्षिक एवं प्रशासनिक व्यवस्थाओं, शिक्षण पद्धतियों, गतिविधियों तथा विद्यालय जीवन के विभिन्न आयामों का अध्ययन एवं प्रत्यक्ष अवलोकन कर रहे हैं।
विद्यालय के प्रबंधक शिवेन्द्र गौतम ने बताया कि विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान तथा राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) के संयुक्त तत्वावधान में गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय, नोएडा एवं काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी के सहयोग से देशभर के विद्या भारती विद्यालयों के विद्यालय दर्शन की योजना बनाई गई है। यह कार्यक्रम अध्यापक विकास कार्यक्रम के रूप में शिक्षा विभाग से जुड़े विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर एवं रिसर्च स्कॉलर्स के लिए आयोजित किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि विद्यालय दर्शन कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान द्वारा देशभर में संचालित विद्यालयों के माध्यम से विकसित गुणवत्तापूर्ण एवं संस्कारयुक्त शिक्षा पद्धति का अध्ययन करना है। इसके अंतर्गत भारतीय शिक्षा दर्शन, भारतीय ज्ञान परंपरा, पंचकोशात्मक समग्र विकास, पंचपदी शिक्षण पद्धति तथा विद्यालय जीवन के विभिन्न पक्षों का गहन अध्ययन एवं अवलोकन किया जा रहा है।
यह पंचदिवसीय कार्यक्रम 6 से 10 सितम्बर तक आयोजित किया जा रहा है, जिसमें विद्वान विद्यालय परिसर में रहकर विद्यार्थियों के बीच उनकी विभिन्न शैक्षिक, सह-शैक्षिक एवं रचनात्मक गतिविधियों का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त कर रहे हैं।
परमेश्वरी देवी धानुका सरस्वती विद्या मंदिर, वृन्दावन में विद्यालय दर्शन हेतु चार विद्वानों का दल आया है। इनमें डॉ. राजेंद्र प्रसाद, असिस्टेंट प्रोफेसर, अग्रवाल पी.जी. कॉलेज, बल्लभगढ़, फरीदाबाद, डॉ. कौशलेंद्र सिंह, असिस्टेंट प्रोफेसर, आर्य महिला पी.जी. कॉलेज, वाराणसी, जयप्रकाश शर्मा, काशी नरेश शिक्षा स्नातकोत्तर महाविद्यालय, भदोही तथा एकांश, प्रवक्ता, बी.एल.एस. इंटरनेशनल स्कूल, हाथरस शामिल हैं।

विद्यालय दर्शन के प्रथम चरण में विद्वानों ने शिशु वाटिका की शिक्षण एवं व्यवस्थाओं का गहन अवलोकन किया। इस दौरान कक्षा अरुण से द्वितीय तक के विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत वंदना, राधा-कृष्ण स्वरूप सज्जा प्रतियोगिता, कक्षा-कक्ष में पठन-पाठन, शिक्षण माध्यम तथा शिशु वाटिका की विभिन्न व्यवस्थाओं का अध्ययन किया गया।
दूसरे दिन विद्वानों ने कक्षा तृतीय से पंचम तक की शिक्षण व्यवस्थाओं एवं शिक्षण पद्धतियों का अवलोकन किया। विद्यार्थियों की विभिन्न गतिविधियों, जैसे आर्ट एंड क्राफ्ट, खेलकूद, योग, ताइक्वांडो एवं घोष प्रदर्शन का भी अध्ययन किया गया। आगामी दो दिनों में विद्वान कक्षा 6 से 12 तक के विद्यार्थियों की शिक्षण पद्धतियों, शैक्षिक एवं सह-शैक्षिक गतिविधियों तथा विद्यालय में उपलब्ध विभिन्न संसाधनों का अवलोकन करेंगे।
विद्यालय दर्शन कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण पक्ष विद्यालय परिवार से जुड़े विभिन्न हितधारकों के साथ संवाद एवं चर्चा भी है। कार्यक्रम के प्रथम दिन विद्वानों ने अभिभावकों के साथ चर्चा-वार्ता की तथा विद्यालय के स्वावलंबी पूर्व छात्रों से भी विभिन्न विषयों पर संवाद किया। दूसरे दिन विद्यालय की छात्र संसद के पदाधिकारियों एवं मंत्रिमंडल के साथ बैठक कर उनकी कार्यप्रणाली, दायित्वों एवं विद्यालय संचालन में उनकी भूमिका को समझा। सायंकाल विद्यालय के पूर्व आचार्यों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ भी विचार-विमर्श किया गया। आगामी दिनों में विद्यालय प्रबंध समिति एवं विद्यालय के शिक्षकों के साथ भी विस्तृत चर्चा-वार्ता आयोजित की जाएगी।
इस पंचदिवसीय अध्ययन कार्यक्रम के माध्यम से विद्वान विभिन्न शैक्षिक परंपराओं, शैक्षिक गतिविधियों, शिक्षण पद्धतियों, बाल-केंद्रित शिक्षा, क्रिया-आधारित शिक्षा तथा संस्कारयुक्त एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के विभिन्न आयामों का अध्ययन कर रहे हैं। साथ ही यह भी समझने का प्रयास किया जा रहा है कि भारतीय शिक्षा दर्शन एवं जीवन-मूल्यों को आधुनिक तकनीक तथा वर्तमान समय की आवश्यकताओं के साथ किस प्रकार प्रभावी ढंग से समाहित किया जा सकता है।
कार्यक्रम के सफल संचालन में विद्यालय के प्रधानाचार्य विपिन कुमार शर्मा, उपप्रधानाचार्य ओमप्रकाश शर्मा, वरिष्ठ शिक्षक देवेन्द्र कुमार गौतम एवं राहुल शर्मा का मार्गदर्शन एवं सहयोग रहा। प्राथमिक विभाग के विद्यालय दर्शन कार्यक्रम की व्यवस्थाओं का संचालन एवं समन्वय हेड मिस्ट्रेस ऋतु रानी एवं असिस्टेंट हेड मिस्ट्रेस बरखा शर्मा द्वारा किया गया।

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