Sunday, September 25, 2022
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छात्रों के अपनी प्राचीन चिकित्सा के प्रति विश्वास करना होगा

  • संस्कृति विवि में आयोजित सेमिनार में बोले प्रो.श्रीनिवासन


मथुरा। संस्कृति विश्वविद्यालय में मर्म चिकित्सा के अंतर्गत ‘इक्या इनिशियेटिव इन एनशिएंट हीलिंग’ विषय को लेकर आयोजित एक महत्वपूर्ण सेमिनार में बंगलौर के श्री परिपूर्ण सनातन चैरीटेबल ट्रस्ट के फाउंडर प्रोफेसर (डा.) एवी श्रीनिवासन ने आयुर्वेद के छात्रों और शिक्षकों से कहा आह्वान किया कि पहले वे स्वयं अपनी प्राचीन चिकित्सा पद्धति पर विश्वास करें क्योंकि यह शत-प्रतिशत लाभकारी और प्राकृतिक है।


उन्होंने कहा कि यह देखने में आ रहा है कि कुछ बच्चे आयुर्वेदिक मेडिकल कालेज में सिर्फ इसलिए प्रवेश ले लेते हैं क्योंकि वे डाक्टर की डिग्री लेना चाहते हैं। ये बच्चे न तो ठीक से आयुर्वेद को पढ़ते हैं, न सीखना चाहते हैं। अभी तीन साल पहले तक जनमानस में भी जो ऐलोपैथी के प्रति विश्वास था वह आयुर्वेदिक चिकित्सा के प्रति नहीं देखा गया।

लेकिन पिछले कुछ वर्षों से आयुर्वेदिक चिकित्सा के क्षेत्र में जो काम हुआ है, कोरोना काल में जिसप्रकार से विश्वस्तर पर आयुर्वेदिक चिकित्सा, जिसमें योग भी शामिल का महत्व स्वीकारा गया है उसको देखते हुए कहा जा सकता है कि इस भारतीय चिकित्सा के प्रति लोगों के विश्वास में आशातीत वृद्धि होगी। उन्होंने बताया कि वे अबतक ऐसे सैंकड़ों मरीजों को असाध्य रोगों से मुक्ति दिला चुके हैं जिनको ऐलोपैथी के चिकित्सकों ने लाइलाज बताकर लौटा दिया था। प्रो. श्रीनिवासन ने कहा कि भारतीय प्राचीन चिकित्सा पद्धति में जो क्षमता है वो अन्य किसी चिकित्सा पद्धति में नहीं है। उन्होंने कहा कि लोग करोड़ों रुपये खर्च कर देते हैं अपने रोगों की चिकित्सा में और फिर भी उनका शरीर रोगग्रस्त रहता है, जबकि आयुर्वेदिक चिकित्सा द्वारा चंद रुपयों में इन रोगों को जड़ से समाप्त किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि हमारा नर्वस सिस्टम ही हमारा प्राण है, इसकी चिकित्सा ही मर्म चिकित्सा कहलाती है।


संस्कृति विवि के चांसलर सचिन गुप्ता ने कहा कि संस्कृति आयुर्वेदिक मेडिकल कालेज सही अर्थों में आयुर्वेद की शिक्षा ग्रहण करें और चिकित्सक बनें, इसके लिए हमने ऐसे आयुर्वेदिक शिक्षा के संस्थानों से एमओयू किए हैं, ताकि प्राचीन भारतीय चिकित्सा पद्धति को विश्वस्तर पर ले जाया जा सके। इससे पूर्व संस्कृति स्कूल आफ एग्रीकल्चर के डीन डा. रजनीश त्यागी ने प्रो. श्रीनिवासन का परिचय देते हुए उनकी उपलब्धियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। सेमिनार के दौरान ही प्रो. श्रीनिवासन ने स्पांडलाइटिस से पीड़ित संस्कृति विवि के एक शिक्षक को मर्म चिकित्सा देकर 10 मिनट में ही आराम दिलाकर सबको अचंभित कर दिया। अंत में संस्कृति आयुर्वेदिक मेडिकल कालेज के प्राचार्य डा. सुजित के.दलाई ने आगंतुकों के प्रति आभार व्यकत् करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का कुशल संचालन संस्कृति ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट सेल की सदस्य अनुजा गुप्ता ने किया।

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