
मथुरा । संस्कृति आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल मथुरा के द्वितीय वर्ष के विद्यार्थियों ने भरतपुर एवं जयपुर में तीन दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण किया। यह भ्रमण रसशास्त्र एवं भैषज्य कल्पना, द्रव्यगुण तथा अगदतंत्र विभागों द्वारा विद्यार्थियों को एनसीआईएसएम पाठ्यक्रम के तृतीय टर्म की शैक्षणिक जानकारियां देने के लिए आयोजित किया गया था। भ्रमण के प्रथम दिन विद्यार्थियों ने केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान, भरतपुर का भ्रमण कर विभिन्न वनस्पतियों, औषधीय पौधों एवं पादप जैव विविधता का प्रत्यक्ष अध्ययन किया। भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों को द्रव्यगुण विषय के अंतर्गत औषधीय वनस्पतियों की पहचान, प्राकृतिक आवास, संरक्षण तथा चिकित्सकीय उपयोगिता को समझने का अवसर प्राप्त हुआ।
इस दौरान विद्यार्थियों ने राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान, मानद विश्वविद्यालय, जयपुर का शैक्षणिक भ्रमण किया। संस्थान के कुलपति प्रो. संजीव शर्मा की अनुमति के बाद भ्रमण समन्वयक डॉ. मनिता के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों ने एनआईए ओपीडी, ओपीडी औषधि वितरण केंद्र, पंचकर्म आईपीडी, अगदतंत्र ओपीडी, नशा मुक्ति केंद्र एवं आईपीडी, अगदतंत्र संग्रहालय, डेमो हर्बल गार्डन, एडवांस्ड ह्यूमन फिजियोलॉजी लैब, वर्चुअल रियलिटी लैब, हिस्टोपैथोलॉजी लैब, केंद्रीय प्रयोगशाला तथा क्षेत्रीय कच्ची औषधि भंडार का अवलोकन किया।
विद्यार्थियों ने अंतर्विषयक अध्ययन इकाइयों के अंतर्गत सौंदर्य प्रयोगशाला एवं क्लिनिक, आहार एवं पोषण, प्रिवेंटिव कार्डियोलॉजी, मर्म एवं खेल चिकित्सा तथा वृक्षायुर्वेद से संबंधित गतिविधियों की जानकारी भी प्राप्त की। बड़ी संख्या में रोगियों की उपस्थिति तथा व्यवस्थित विभागीय एवं चिकित्सालयीन कार्यप्रणाली से विद्यार्थी अत्यंत प्रेरित हुए। द्रव्यगुण विभागाध्यक्ष डॉ. सुदीप्त कुमार रथ, धन्वंतरि उपवन के प्रोफेसर एवं प्रभारी डॉ. सुमित तथा द्रव्यगुण विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ. लक्ष्मी ने विद्यार्थियों को औषधीय पौधों, हर्बेरियम निर्माण, कच्ची औषधि पहचान, क्षेत्रीय कच्ची औषधि भंडार तथा धन्वंतरि उपवन के संबंध में विस्तृत जानकारी प्रदान की।
रसशास्त्र एवं भैषज्य कल्पना विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. ठाकुर राकेश सिंह तथा फार्मेसी प्रभारी डॉ. सोभनाथ ने विद्यार्थियों को रसशास्त्र विभाग, संग्रहालय, शिक्षण फार्मेसी, जीएमपी प्रमाणित फार्मेसी, औषधि परीक्षण प्रयोगशाला तथा बड़े स्तर पर औषधि निर्माण इकाई की कार्यप्रणाली से परिचित कराया। विद्यार्थियों ने आयुर्वेदिक औषधि निर्माण, गुणवत्ता परीक्षण, भंडारण, पैकेजिंग तथा बड़े पैमाने पर उत्पादन की प्रक्रियाओं का प्रत्यक्ष अध्ययन किया। अगदतंत्र विभाग के प्रोफेसर डॉ. शरद कुमार पोर्ते ने अगदतंत्र ओपीडी, संग्रहालय, विष विज्ञान तथा संबंधित चिकित्सकीय एवं शैक्षणिक गतिविधियों के विषय में विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया।
भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने शल्यतंत्र विभागाध्यक्ष एवं एनआईए के प्रो-वाइस चांसलर प्रो. डॉ. पी. हेमंत कुमार से भी भेंट की। उन्होंने विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया तथा जारी शल्य सीएमई की शैक्षणिक गतिविधियों के संबंध में मार्गदर्शन प्रदान किया।
संस्कृति विश्वविद्यालय की सीईओ डॉ. मीनाक्षी शर्मा के प्रोत्साहन तथा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के प्रति उनकी सकारात्मक सोच पर आधारित यह भ्रमण विद्यार्थियों के लिए विशेष ज्ञानवर्धन का स्रोत बना। इस भ्रमण को डीन स्टूडेंट वेलफेयर डॉ. डी. एस. तोमर, प्राचार्य डॉ. मोहनन तथा उप-प्राचार्य डॉ. एकता कपूर ने आवश्यक प्रशासनिक मार्गदर्शन एवं सहयोग प्रदान किया। शैक्षणिक भ्रमण में महाविद्यालय की ओर से संकाय सदस्य—भ्रमण समन्वयक डॉ. मितेश सिंह चौहान, डॉ. मनीष सिंह तोमर तथा डॉ. प्रतिभा—विद्यार्थियों के साथ उपस्थित रहे। विद्यार्थी समन्वयक अभिषेक यादव एवं यश्वी जायसवाल ने भी भ्रमण की व्यवस्थाओं में सक्रिय एवं जिम्मेदार भूमिका निभाई।

