Monday, February 26, 2024
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ब्रजभूमि के प्रतिष्ठित जीएलए विश्वविद्यालय में संवाद का अवसर सुखद क्षण: सीएम योगी


मथुरा। जीएलए विश्वविद्यालय, मथुरा के 11वें दीक्षांत समारोह में सभी मंच पर मंचासीन सभी जीएलए के पदाधिकारीगणों, कैबिनेट मंत्रियों और सभी विद्यार्थियों का अभिवादन करते हुए उत्तर प्रदेष के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यह सौभाग्य का क्षण है कि जब ब्रज भूमि स्थित प्रतिश्ठित विश्वविद्यालय के एकादष दीक्षांत समारोह में सभी के संवाद करने का अवसर प्राप्त हुआ है।


ब्रजभूमि की जब बात आती है तो एकाएक सभी का ध्यान एक दिव्य घटना पर चला जाता है कि आज से पांच हजार वर्श पूर्व जब लीलाधारी भगवान श्रीकृश्ण का जन्म इस धरा पर हुआ होगा। जन्म और उनके जीवन और बचपन की लीलाओं का आज भी इतने प्राचीन विरासत को लेकर हम सभी चल रहे हैं। उस समय साधन नहीं रहे होंगे, लेकिन एक बात अक्सर याद आती है, जब प्रख्यात समाजवादी चिंतक डाॅ. राममनोहर लोहिया से एक बार पूछा गया कि भारत की एकता, एकात्मता और अखंडता के आधार बिंदु क्या हैं। इस पर लोहिया ने कहा था कि दुनियां के अंदर तमाम देष बने और बिगडे़ हैं। पंरपराएं आयीं और समाप्त हुई हैं, लेकिन अगर भारत भारत बना हुआ है तो, इसके पीछे तीन महापुरूशों का सर्वाधिक योगदान है। डाॅ. लोहिया ने तीन महापुरूश ही बताए न कि किसी भगवान कहा और न ही ईष्वर की संज्ञा दी।
सीएम योगी ने कहा कि आज अगर भारत एक भारत बना हुआ तो राम, श्रीकृश्ण और भगवान षिव की आस्था है। पूरब से पष्चिम तक सुदूर अरूणांचल में जायेंगे तो अरूणांचल में रूकमिणी की कथा रची बसी है, जिस प्रकार से ब्रजभूमि में आने पर राधे रानी की जय कहने से अपने आपको वंचित नहीं रख सकते। यही भाव सुदूर पूर्वोत्तर के राज्यों में महारानी रूकमिणी के साथ जुड़ा हुआ है। पूरब से पष्चिम को जोड़ने का कार्य उस काल खंड में भगवान श्रीकृश्ण ने किया था। ठीक उसी प्रकार त्रेतायुग मंे भगवान राम ने पूरब से पष्चिम और उत्तर से दक्षिण को जोड़ने का कार्य किया। उत्तर से दक्षिण जो सीमाएं भगवान राम ने हजारों वर्श तय की थीं भारत की वही सांस्कृतिक सीमा आज राजनैतिक सीमा के रूप में भी है। द्वादष ज्योर्तिलिंगों के माध्यम से पूरे भारत को एकता के रूप में जोड़ने का कार्य भगवान षिव के द्वारा अलग अलग स्थलों पर किया गया। यही एकता आज भगवान षिव के प्रति आस्था के रूप में जुड़ी हुई है।


अपने संबोधन में सीएम योगी ने भारतीय संस्कृति और परंपरा के महिमा मंडन के बाद कहा कि यदि प्रोडक्ट की पैकेजिंग अच्छी है तो लोग उसके पीछे भागते हैं। हर एक चीज का अपना महत्व है। जीएलए विवि ने अनेक क्षेत्रों में बेहतर कार्य किया है। सीएम ने कहा कि 2000 में जब उप्र में टेक्निकल यूनिवर्सिटी स्थापित हुई तो विवि के रूप में अपने आप को स्थापित करना और विवि के रूप में भी अच्छी रेपुटेशन हासिल कराने के लिए वर्तमान में जीएलए के प्रतिकुलाधिपति प्रो.डीएस चैहान ने कुलपति के रूप में आगे बढ़ाने पर जोर दिया। दुर्भाग्य से उस समय की सरकारों ने इस पर ध्यान नहीं दिया। इसीलिए बहुत पीछे हम रह गए, क्योंकि जिन लोगों ने इस पर काम किया, वे आगे बढ़ गए। जीएलए विष्वविद्यालय टेक्निकल कोर्सेस को लेकर काम कर रहा है। वर्तमान में जीएलए ने काॅरपोरेट जगत में भी ख्याति प्राप्त की।


सीएम ने उप्र की इन्वेस्टर ग्लोबल समिट को लेकर कहा कि 2018 में जब हमने पहला समिट किया, उस समय पहली बार टीम गठित की गई थी, जिसकी 19 से 30 हजार करोड़ के निवेश की योजना थी। हमने कहा कि उप्र का बजट 4 लाख 22 हजार का है, उससे कम का निवेश नहीं। बाद में 4 लाख 68 हजार के निवेश आए। यहां पेप्सी की यूनिट आयी और इसी तरक की तमाम यूनिट आयी। यह निवेश इन सभी युवाओं के रोजगार की अनंत संभावनाए बनाएगा। उप्र में स्थापित होने वाली यूनिट और निवेश लाखों नौकरियां लेकर आएगा। विवि अपने विद्यार्थियों को तैयार करे, यह आज की आवश्यकता है। उन्होंने छात्र छात्राओं से स्वयं को तकनीकी रूप से तैयार करने के साथ साथ अपनी विरासत से संवाद बनाए रखने और उसके साथ अपना आत्मीय संबंध जोड़ते रहने का भी आह्वान किया।


सीएम ने विद्यार्थियों से कहा कि आज यह एक सुखद पल का क्षण है कि जब सभी विद्यार्थियों को ब्रजभूमि के प्रतिश्ठित जीएलए विष्वविद्यालय से डिग्री पाकर आगे की आसान राह देखने का अवसर मिला है। विष्वविद्यालय की प्रगति रिपोर्ट देखकर पता चलता है कि जीएलए विद्यार्थियों के लिए बहुत कुछ किया है। कंपनियांे ने कैंपस प्लेसमेंट के माध्यम से रोजगार दिया है। इसके अलावा पूर्व छात्र भी यहां से निरंतर जुडे हुए हैं। अब डिग्रीधारक सभी छात्रों को प्रण लेकर देष के विकास में सहयोग देने की जरूरत है।

ग्लोबल समिट निवेष बढ़ाएगा रोजगार
उप्र इन्वेस्टर ग्लोबल समिट में हुआ निवेश सभी युवाओं के लिए रोजगार की अनंत संभावनाए बनाएगा। जब प्रदेश में होने वाला निवेश और खुलने वाली नयी नयी यूनिटें युवाओं के लिए लाखों नौकरियां लेकर आएंगे। उन्होंने कहा कि स्टार्ट अप की संस्कृति के लिए युवाओं को सरकारी योजनाओं से जोड़ें। साथ ही मुख्यमंत्री ने छात्र-छात्राओं से कैरियर की दौड़ में बढ़ने के साथ ही अपनी विरासत से आत्मीयता और संवाद बनाए रखने का भी संदेश दिया।

युवाओं को सरकारी योजनाओं से जुड़ने की जरूरत
सीएम ने कहा कि संस्थानों को इस दिशा में नए प्रयास करने चाहिए कि शासन की केंद्र ओर राज्य की योजनाओं को हम अपने पाठयक्रम का हिस्सा कैसे बनाएं। सरकार के कार्यक्रमों और योजनाओं को उनसे अलग करने की हम अक्सर कोशिश करते हैं, लेकिन जब छात्र यहां से निकलेगा तो क्या होगा। हमें एक टीम गठित करनी चाहिए जो छात्र छात्राओं को सरकारी योजनाओं की जानकारी दे। कोई अपना रोजगार खड़ा करना चाहिता है, परिवार के पास पैसा नहीं है। आसानी से वह स्टार्ट अप हासिल करना चाहता है, इसके लिए सरकारी योजनाएं जरुरी हैं। केंद्र और राज्य सरकार ने इंटनर्शशिप की स्कीम निकाली हे। आधा मानदेय आप दीजिए, आधा हम देंगे। छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं में भाग लेना चाहते हैं, उसकी तैयारियों की व्यवस्था की है। उप्र में तकनीकी रूप से समर्थ होने के लिए शासन की स्कीम का लाभ लें। स्टार्ट अप की एक नयी संस्कृति को जन्म देना होगा। एमएसएमई का सबसे बड़ा बेस हमारे पास है। सरकार ने 96 लाख इकाईयों को बचाया। हमने एक स्कीम निकाली। हमारे परंपरागत उद्योगों से जुड़े लोगों ने अपने पुरुषार्थ से रास्ता दिखाया।

पूरे प्रदेष आईसीयू देने में पायी सफलता
सीएम योगी ने कहा कि हमने कोरोना काल में वर्चुअल आईसीयू चलाए। उप्र के 36 जनपद ऐसे थे, जिनके पास एक भी वेंटिलेटर नहीं थे। हमने उन जिलों को वेंटिलेटर दिए। हमने लखनऊ में उनको ट्रेनिंग दिलाई। इसको आगे बढ़ाने के लिए हर जनपद में नियमित रूप से व्यवस्था बनाई। वर्चुअल तरीके से भी जगह की व्यवस्थाएं देखीं। पूरे प्रदेश के सभी जनपदों में हम आईसीयू देने में सफल रहे। यदि वर्चुअल आईसीयू चल सकता है तो कोई कारण नहीं कि हम अपनी संस्थाओं में क्लासों में इसे प्रयोग न कर सकें। हमें उस दिशा में प्रयास करने होंगे। प्रधानमंत्री की मंशा है कि इस 21 वीं सदी का नेतृत्व भारत दुनिया को दे और जी 20 के रूप में यही अवसर भारत के पास आया है।

दुनियां ने सराहीं कोरोना में भारत की व्यवस्थाएं
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कोरोना काल में आपने देखा होगा कि क्या स्थिति थी। लोग सशंकित थे कि भारत और उप्र में क्या होगा। दुनिया में जितने लोगा कोरोना से मरे थे, लेकिन उससे ज्यादा मौत भूख से हुई थी। लेकिन हमारी सरकार ने फ्री में टेस्ट, फ्री में उपचार, फ्री में वैक्सीन थी। पहली बार यह हुआ कि किसी महामारी के 9 महीने में ही वैक्सीन आ जाए। दुनिया में सबसे कम मृत्युदर और प्रबंधन भारत का रहा। डब्लूएचओ जैसी संस्थाओं ने भी सराहा।

अन्य देशों को दिखाया सामर्थ्य
सीएम ने कहा कि जी 20 के समिट के माध्यम से हम अपने आप को वैश्विक मंच पर स्थापित कर सकते हैं। उप्र के अंदर भी कुछ समिट होने है, उसके लिए तैयारी करनी है। अपने यहां आतिथ्य और सेवा के लिए भारत प्रसिद्ध है। 9 मित्र देशों के प्रतिनिधियों के आगामी आगमन पर हम आतिथ्य सेवा कर सकते हैं। वे यहां प्रमुख सामाजिक और पौराणिक स्थलों का भ्रमण करेंगे, उनकी व्यवस्था में हम सहयोग कर सकते हैं, ताकि वे यहां के सामर्थ्य, आतिथ्य भाव और स्वच्छता को देखें तो एक नयी छवि लेकर जाएं। हमने किन किन क्षेत्रों में प्रगति की है, इसे दिखाने का भी अवसर होगा।

क्षेत्रीय समाज से सामंजस्य बनाने की आवश्यकता
सीएम योगी ने कहा कि अक्सर देखने को मिलता है कि जहां भी जो संस्थान/विष्वविद्यालय सरकार के माध्यम से बन रहा है या किसी निजी संगठन के माध्यम से बन रहा है, वहां के आसपास के लोगों से उस संस्थान/विष्वविद्यालय के लोगों का संवाद पूरी तरह से समाप्त रहता है, जो कि एक विचित्र स्थिति है। सोचने वाली और करने वाली बात यह है कि जहां भी और जिस जगह कोई संस्था या विष्वविद्यालय तैयार हो रहा तो वह किसलिए हो रहा है। जबकि उसी संस्था या विष्वविद्यालय से आसपास के क्षेत्रों के अच्छे ताल्लुकात होना जरूरी है, क्योंकि उसी क्षेत्र के लोग हैं, जो उसे आगे बढ़ा सकते हैं। इसके लिए आसपास के क्षेत्र और जनपद की समाजिक, भौगोलिक और आर्थिक सहित आदि रिपोर्ट संस्थाओं के पास होनी चाहिए। इन सभी बातों पर जीएलए विष्वविद्यालय ने काफी पहल की है, जो कि सराहनीय है।
उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय संस्थाओं को सरकार द्वारा जारी किए जाने वाले प्रोजेक्टों के लिए अपने क्षेत्र के विद्यार्थी अथवा अपने षिक्षकगणों को तैयार करना चाहिए, जिससे सरकार को बाहरी संस्थाओं पर भरोसा न कर जिस क्षेत्र के लिए प्रोजेक्ट है, उसी क्षेत्र के युवाओं को वह प्रोजेक्ट जारी हो और वह सषक्तिकरण की ओर बढें। इससे बहुत समस्याओं का समाधान होता हुआ दिखाई देगा। दूसरा युवाओं के पास एक खंड का फ्लो भी होगा।

जीएलए की सीएसईडी लैब देखकर खुष नजर आये मुख्यमंत्री
मथुरा। समयानुसार इंसान किसी न किसी रूप में नए अनुसंधान की ओर अग्रसर है। इनमें से अधिकतर वर्तमान में इंटरनेट प्रयोग करने वाले षिक्षक और विद्यार्थी सहित प्रोफेषनल दिग्गज हैं। जिनके जहन में अवधारणाएं, आइडिया या विचार आते रहते हैं, जो कि उनकी दिलचस्पी के होते हैं और जो उन्हें प्रोत्साहित करते हैं। ठीक इसी के इतर जीएलए विष्वविद्यालय, मथुरा के छात्र और षिक्षकों ने नए अनुसंधान पर जोर देते हुए 3 हजार से अधिक पब्लिकेषन, 400 से अधिक पेटेंट पब्लिष और 30 से अधिक पेटेंट ग्रांट कराये हैं। इस संबंध में जब जीएलए विष्वविद्यालय में स्थापित सीएसईडी लैब के उद्घाटन के दौरान उत्तर प्रदेष के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को जानकारी दी गयी तो वह काफी खुष नजर आये और उन्होंने दीक्षांत समारोह में कईयों बार जीएलए की विषेशताओं के बारे में बताया।


विदित रहे कि जीएलए में स्थापित भारत सरकार के विज्ञान प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा चलायी जा रही स्कीम न्यूजेन आइईडीसी के माध्यम से नवाचार एवं अविश्कार हेतु छात्रों को आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। इसके अलावा छात्रों के स्टार्टअप की षुरूआत और कंपनी रजिस्टर्ड कराने के लिए विष्वविद्यालय में टेक्नोलाॅजी बिजनेस इंक्यूबेटर सेंटर स्थापित है, जो कि विद्यार्थियों को काॅरपोरेट दिग्गजों से मुलाकात कराने और उनके अविश्कार को मार्केट एवं काॅरपोरेट जगत पहुंचाने के लिए पूरी सहायता प्रदान करता है। इसी के तहत अब तक 47 से अधिक स्टार्टटप और 28 से अधिक विद्यार्थियों की कंपनी रजिस्टर्ड हो चुकी हैं। अनुसंधान के क्षेत्र में पिछले कई वर्शों में जीएलए विष्वविद्यालय, मथुरा ने नए आयाम गढ़े हैं। 12 से अधिक रिसर्च सेंटर जिनमें सोलर एनर्जी, माइक्रो नेनो डेवलपमेंट, बेंटले लैब आॅफ एक्सीलेंस, सस्टेनेबल इनवायरनमेंट एंड एग्रीकल्चर, एडवांस्ड कंस्ट्रक्षन इंजीनियरिंग, सेंटर फाॅर कम्प्यूटर विजन एंड इंटेलीजेंट सिस्टम, लैबव्यू एकेडमी, टेक्सास इंस्टूमेंट इनोवेषन, सेंटर फाॅर काउ साइंस, आईपीआर रिसर्च सेंटर के माध्यम से 3 हजार से अधिक पब्लिकेषन, 400 से अधिक पेटेंट पब्लिष एंड 30 से अधिक पेटेंट ग्रांट कराने में विष्वविद्यालय अग्रणी रहा है। कोरोना के दौर की बात की जाय तो रिसर्च के ग्राफ में अधिक बढ़ोत्तरी देखी गयी। जिनमें से स्कोपस में वर्श 2020 में 689 और 2021 में 778 पब्लिकेषन हुए। वेब आॅफ साइंस/एससीआई इंडेक्स में वर्श 2020 में 223 और 2021 में 229 पब्लिकेषन हुए। एच इंडेक्स में वर्श 2020-21 में 36 पब्लिकेषन रहे, तो वहीं साइटेषन के बारे में बात की जाय तो वर्श 2020 में 14 हजार 296 और वर्श 2021-22 में 15 हजार 273 से अधिक का आंकड़ा ग्राफ ने छुआ।


रिसर्च पब्लिकेषन से अलग हटकर षिक्षक और छात्रों ने विभिन्न क्षेत्रों और काॅरपोरेट जगत के हित में अपने आइडिया सुझाते हुए भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय को पेटेंट फाइलिंग कर 400 से अधिक पेटेंट पब्लिष कराने सफलता हासिल की। इसके अलावा इन्हीं में से 30 से अधिक प्रोटोटाइप तैयार कर पेटेंट ग्रांट कराकर सफलता की सीढ़ी चढ़े। अगर इस सफलता की बात की जाय तो यह सफलता कोरोना की पहली और दूसरी लहर वर्श 2020-21 में षिक्षक और छात्रों के अच्छी संख्या में हाथ लगी। वर्श 2020 में 93 पेटेंट पब्लिष और 4 ग्रांट हुए। वर्श 2021-22 में 120 से अधिक पब्लिष और 15 से अधिक ग्रांट हुए। यानि वर्क फा्रॅम होम के दौरान भी विष्वविद्यालय ने षिक्षकों और छात्रों भूरपूर सहयोग और सुविधाएं प्रदान कीं। जिससे उन्हें नए अनुसंधान करने में आसानी हुई।


पीएचडी डिग्री धारक
फिजिक्स में कोमल, मैनेजमेंट में प्रमोद कुमार सिन्हा, कम्प्यूटर साइंस इंजीनियरिंग प्रवीन मित्तल, मैनेजमेंट विजय कुमार चैधरी, अंग्रेजी दिव्या षर्मा, कैमिस्ट्री सुनिता भास्कर, माइक्रोबायोलाॅजी एंड इम्यूनोलाॅजी में नंदिनी षर्मा, अंग्रेजी नीतू पाल, मैनेजमेंट पल्लवी चतुर्वेदी, कम्प्यूटर एप्लीकेषन भुवनेष सिंह, मैकेनिकल इंजीनियरिंग में राहुल कुमार और संतोश कुमार सिंह, अंग्रेजी सुरेन्द्र सिंह जादौन, बायोटेक्नोलाॅजी नितिन खंडेलवाल, मैनेजमेंट मेघा भार्गव, कम्प्यूटर साइंस इंजीनियरिंग राजेष कुमार त्रिपाठी, फिजिक्स पुश्पलता और उदय सिंह, इलेक्ट्राॅनिक्स एंड कम्यूनिकेषन इंजीनियरिंग दिव्या सिंह, मैकेनिकल इंजीनियरिंग अजीत, कम्प्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग राहुल प्रधान, इलेक्ट्राॅनिक्स एंड कम्यूनिकेषन इंजीनियरिंग अल्का अग्रवाल, फार्मेसी महिमा षर्मा, कैमिस्ट्री सुश्मिता प्रमाणिक, मैकेनिकल इंजीनियरिंग उदयवीर सिंह, कम्प्यूटर साइंस इंजीनियरिंग उपेन्द्र वर्मा, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग राजीव कुमार चैहान, इलेक्ट्राॅनिक्स एंड कम्यूनिकेषन इंजीनियरिंग परेष चन्द्र साउ, फार्मेसी षालिनी कुमारी, मैकेनिकल इंजीनियरिंग अंकिता अवस्थी, इलेक्ट्राॅनिक्स एंड कम्यूनिकेषन इंजीनियरिंग राजेष कपूर, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग स्वप्निल श्रीवास्तव, अंग्रेजी पूनम षर्मा, मैकेनिकल इंजीनियरिंग आकाष षर्मा, कम्प्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग दिवाकर सिन्हा, सिविल इंजीनियरिंग अंकुर गुप्ता और आषीश षुक्ला, मैकेनिकल इंजीनियरिंग पंकज कुमार सिंह, फार्मेसी हुमा षाफी, एजुकेषन नीरज, अंग्रेजी प्रियंका जैन, फार्मेसी स्मृति साहू, मैकेनिकल इंजीनियरिंग सुमित नागर, माइक्रोबायोलाॅजी एंड इम्यूनोलाॅजी ममता सिंह, सिविल इंजीनियरिंग प्रियंका गुप्ता, एजुकेषन चंद्रिका चाहर एवं बायोटेक्नोलाॅजी में कुसुम साइ दवुलुरी को पीएचडी की उपाधि प्राप्त हुई।

इन्हें मिले मेरिट सर्टिफिकेट
बीएससी आॅनर्स (कैमिस्ट्री) व (फिजिक्स) पूजा अग्रवाल, जितेन्द्र सैनी, बीए आॅनर्स (इकाॅनाॅमिक्स)ए यषिका यादव, बीकाॅम आॅनर्स (ग्लोबल एकाउंटिंग) महक अग्रवाल, बीटेक सीएस आइओटी हिमांषु सिंह, बीटेक इलेक्ट्राॅनिक्स प्रणव कुमार, एमएससी बायोटेक्नोलाॅजी अनुपम, कैमिस्ट्री भावना षर्मा, मैथमेटिक्स नीरज कुषवाहा, माइक्रोबायोलाॅजी एंड इम्यूनोलाॅजी और फिजिक्सम महिमा सिंह कुंतल और भावना, एमटेक सिविल इंजीनियरिंग रिशभ वर्मा, सीएस आयुशी वर्मा, इलेक्ट्रीकल इंजीनियरिंग अंजू उपाध्यााय, इलेक्ट्राॅनिक्स एंड कम्यूनिकेषन और मैकेनिकल हेमंत कुमार रावत और सचिन कुमार षर्मा, एमबीए कंस्ट्रक्षन सौरभ, डिप्लोमा फार्मेसी अर्पित रघुवंषी सहित पाॅलीटेक्निक (डिप्लोमा) के कुल 24 विद्यार्थियों को मेरिट सर्टिफिकेट से नवाजा गया।

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