
कोसीकलां। कंधों पर कांवड़, पैरों में छाले और आंखों में पढ़ाई दोबारा शुरू होने का सपना… यह कहानी है बठैन गेट निवासी दिव्यांग दंपती के चार बच्चों की, जो भगवान शिव से अपनी पढ़ाई फिर शुरू कराने की मनौती लेकर हरिद्वार से गंगाजल लेकर अपने घर की ओर लौट रहे हैं।
तालाबशाही निवासी भरतलाल की आर्थिक स्थिति कमजोर है। उनके और उनकी पत्नी के दिव्यांग होने के कारण परिवार की आमदनी सीमित है। बच्चों के मुताबिक आर्थिक तंगी के चलते स्कूल की फीस जमा नहीं हो सकी और उनकी पढ़ाई प्रभावित हो गई। पढ़ाई छूटने के बाद बच्चों ने भगवान भोलेनाथ से अपनी पढ़ाई दोबारा शुरू होने की मनौती मांगी और कांवड़ यात्रा पर निकल पड़े।
भरतलाल अपने तीन बच्चों के साथ 30 जुलाई को ई-रिक्शा से हरिद्वार पहुंचे और वहां से गंगाजल लेकर कांवड़ यात्रा शुरू की। परिवार मंगलवार को शिवालय पहुंचकर भगवान शिव का जलाभिषेक करेगा। चारों भाई-बहनों में बड़ी बहन कक्षा 11, दूसरी बेटी कक्षा 9, बेटा कक्षा 6 और सबसे छोटी बेटी कक्षा 3 में पढ़ती है। बच्चों का कहना है कि वे पढ़-लिखकर अपना भविष्य संवारना चाहते हैं और उनकी सबसे बड़ी इच्छा है कि उनकी पढ़ाई फिर से शुरू हो जाए।
कांवड़ यात्रा के दौरान बच्चों के चेहरों पर थकान और पैरों में छालों के बावजूद उनके कदम रुके नहीं हैं। उनके मन में सिर्फ एक उम्मीद है कि भोलेनाथ उनकी पुकार सुनेंगे और उन्हें दोबारा स्कूल जाने का अवसर मिलेगा। बच्चों की यह कांवड़ यात्रा आर्थिक तंगी के बीच शिक्षा के लिए उनके संघर्ष और जज्बे की मार्मिक तस्वीर पेश कर रही है।
स्कूल प्रबंधन ने आरोपों को बताया बेबुनियाद
वहीं विद्यालय प्रबंधक तरुण गुप्ता ने बच्चों को फीस जमा न करने के कारण स्कूल से निकाले जाने के आरोपों को बेबुनियाद बताया। उनका कहना है कि चार में से तीन बच्चे उनके विद्यालय में पढ़ते हैं और तीनों 24 जुलाई से स्कूल नहीं आ रहे हैं। प्रबंधक के अनुसार फीस जमा न होने के बावजूद बच्चों को परीक्षा में शामिल कराया गया था। लगातार अनुपस्थित रहने के कारण उनके खिलाफ निष्कासन की प्रक्रिया शुरू की गई है।
मंगलवार को बच्चो सहित दिव्यांग परिवार ने अपने घर के समीप शिव मंदिर में भगवान शिव की पूजा कर जलाभिषेक किया और पढ़ाई की आस लगाई।

